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सैंटियागो रॅमॉन कजल
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सैंटियागो रॅमॉन वाई कजल Santiago Ramón y Cajal (1852-1934) portrait (restored).jpg 1899 में रॅमॉन वाई कजल 1852 5 1 y पेटिला डे आरागॉन, स्पेन 1934 10 17 1852 5 1 y मद्रिद, स्पेन ज़रागोज़ा विश्वविद्यालय आधुनिक तंत्रिका विज्ञान के जनकन्यूरॉन की खोजकैजल पिंड, कैजल-रेट्ज़ियस कोशिका, कैजल की अंतरालीय कोशिका, न्यूरॉन सिद्धांत, वृद्धि शंकु, डेंड्रिटिक स्पाइन, दीर्घकालिक पोटेंशिएशन, मॉसी फाइबर, न्यूरोट्रॉफिक सिद्धांत, एक्सो-एक्सोनिक सिनैप्स, पायनियर एक्सॉन, पिरामिडल कोशिका, रेडियल ग्लियल कोशिका, रेटिनल गैंग्लियन कोशिका, ट्राइसिनैप्टिक सर्किट, दृश्य मानचित्र सिद्धांत शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार (1906) तंत्रिका विज्ञानविकृतिविज्ञानऊतकविज्ञान वैलेंसिया विश्वविद्यालयकॉम्प्लूटेंस विश्वविद्यालय, मैड्रिड विश्वविद्यालयबार्सिलोना विश्वविद्यालय
सैंटियागो रॅमॉन वाई कजल (स्पेनी: sanˈtjaɣo raˈmon i kaˈxal; 1 मई 1852 – 17 अक्टूबर 1934)Santiago Ramón y Cajal: The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1906 https://www.nobelprize.org/prizes/medicine/1906/cajal/biographical/ 2020-06-25 NobelPrize.org en-USA Mind for Numbers टार्चर पेंगुइन 978-0-399-16524-5 193 2014 https://archive.org/details/isbn_9780399165245/page/193 एक स्पेनी तंत्रिका वैज्ञानिक, रोगविज्ञानी और ऊतकविज्ञानी थे, जिन्होंने तंत्रिका शरीर रचना विज्ञान तथा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के अध्ययन में क्रांतिकारी योगदान दिया। उन्हें कैमिलो गोल्गी के साथ संयुक्त रूप से 1906 का शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।https://www.nobelprize.org/prizes/medicine/1906/cajal/biographical/ The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1906 NobelPrize.org वे किसी वैज्ञानिक क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले स्पेनी वैज्ञानिक थे।
कजल का सबसे महत्वपूर्ण योगदान तंत्रिका तंत्र की सूक्ष्म संरचना की समझ को विकसित करना था। उन्होंने यह प्रतिपादित किया कि तंत्रिका तंत्र असंख्य पृथक कोशिकाओं—न्यूरॉनों—से बना है, जो एक-दूसरे से संपर्क तो करती हैं, किंतु आपस में निरंतर रूप से जुड़ी नहीं होतीं। यह विचार बाद में न्यूरॉन सिद्धांत के रूप में प्रसिद्ध हुआ और आधुनिक तंत्रिका विज्ञान की आधारशिला बना।
कजल ने कैमिलो गोल्जी द्वारा विकसित गोल्जी रंगाई विधि का उपयोग करके मस्तिष्क और तंत्रिका ऊतकों का सूक्ष्म अध्ययन किया। उनकी असाधारण अवलोकन क्षमता और कलात्मक कौशल के कारण वे न्यूरॉनों तथा उनकी शाखाओं के अत्यंत सटीक चित्र बनाने में सफल हुए। मस्तिष्क कोशिकाओं के वृक्षाकार विकास और उनके पारस्परिक संबंधों को दर्शाने वाले उनके सैकड़ों चित्र 20वीं शताब्दी के मध्य से ही शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते रहे हैं।History of Neuroscience सोसायटी फॉर न्यूरोसाइंस http://www.sfn.org/index.cfm?pagename=HistoryofNeuroscience_main 2008-10-09 dead https://web.archive.org/web/20080515121003/http://www.sfn.org/index.cfm?pagename=HistoryofNeuroscience_main 2008-05-15
मस्तिष्क की सूक्ष्म संरचना पर उनके मौलिक अनुसंधानों ने उन्हें आधुनिक तंत्रिका विज्ञान का अग्रदूत बना दिया। आज भी कजल के कार्य को न्यूरोसाइंस के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
जीवनी
सैंटियागो रॅमॉन वाई कजल का जन्म 1 मई 1852 को पेटिला दे आरागोन में हुआ था। उनका बचपन अत्यंत चंचल, स्वतंत्र और विद्रोही स्वभाव का था। अनुशासनहीनता तथा अधिकार का विरोध करने की प्रवृत्ति के कारण उन्हें कई बार एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में भेजा गया। उनके बचपन की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक 1863 की है, जब ग्यारह वर्ष की आयु में उन्होंने कथित रूप से घर में बनाई गई एक छोटी तोप से पड़ोसी के आँगन का फाटक क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में रखा गया।सैंटियागो रॅमॉन कजल, Recuerdos de mi Vida Volume I, Chapter X, Madrid Imprenta y Librería de N. Moya, Madrid 1917, online at Instituto Cervantes (Spanish)
कजल बचपन से ही चित्रकला, मूर्तिकला और व्यायाम जैसी गतिविधियों में असाधारण रुचि रखते थे। वे एक कुशल कलाकार और चित्रकार थे तथा मानवीय आकृतियों और प्राकृतिक वस्तुओं का सूक्ष्म चित्रण करने में निपुण थे। किंतु उनके पिता जुस्तो रॅमॉन इन रुचियों को व्यावहारिक नहीं मानते थे और उन्हें प्रोत्साहित नहीं करते थे। विडंबना यह है कि यही कलात्मक क्षमता आगे चलकर उनके वैज्ञानिक कार्यों की सबसे बड़ी शक्ति बनी, क्योंकि उन्होंने तंत्रिका कोशिकाओं और मस्तिष्क की सूक्ष्म संरचनाओं के अत्यंत सटीक चित्र बनाए, जो आधुनिक तंत्रिका विज्ञान की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं।
अपने पुत्र में अनुशासन और परिश्रम की भावना विकसित करने के उद्देश्य से उनके पिता ने उन्हें कुछ समय के लिए एक मोची और बाद में एक नाई के यहाँ प्रशिक्षु के रूप में भी काम करने भेजा। यद्यपि कजल को यह अनुभव पसंद नहीं आया, फिर भी इसने उनके व्यक्तित्व के निर्माण में भूमिका निभाई।
सन्दर्भ
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श्रेणी:1852 में जन्मे लोग
श्रेणी:१९३४ में निधन