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कुँवर सिंह
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सितंबर 2024
right |thumb|भारतीय स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम (१८५७) के कुंवर सिंह
thumb|300px|वीर कुंवर सिंह
कुंवर सिंह (13 नवंबर 1777 - 26 अप्रैल 1858) सन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थेhttp://archive.org/details/indianempireitsh08mart The Indian empire : its history, topography, government, finance, commerce, and staple products : with a full account of the mutiny of the native troops ... Martin Robert Montgomery Roberts Emma 1858 London ; New York : London Print. and Pub. Co. Robarts - University of Toronto। अन्याय विरोधी व स्वतंत्रता प्रेमी बाबू कुंवर सिंह कुशल सेना नायक थे। इनको 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने के लिए जाना जाता है।http://www.bhaskar.com/news/JHA-BOK-c-234-240680-NOR.html संग्रहीत प्रति 25 दिसंबर 2014 https://web.archive.org/web/20141225073725/http://www.bhaskar.com/news/JHA-BOK-c-234-240680-NOR.html 25 दिसंबर 2014 live
जीवन अवधि
वीर कुंवर सिंह का जन्म 13 नवम्बर 1777 को बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर गांव के एक क्षत्रिय जमीनदार परिवार में हुआ था। इनके पिता बाबू साहबजादा सिंह अंग्रेजी सरकार के प्रति विश्वासपात्र बने जिसके कारण उन्हें भोजपुर जिले की जमींदारी मिली थी। उनके माताजी का नाम पंचरत्न कुंवर था.
उनके छोटे भाई अमर सिंह, दयालु सिंह और राजपति सिंह एवं इसी खानदान के बाबू उदवंत सिंह, उमराव सिंह तथा गजराज सिंह नामी जागीरदार रहे तथा अपनी आजादी कायम रखने के खातिर सदा लड़ते रहे। http://mokamaonline.com/?p=1163 संग्रहीत प्रति 30 दिसंबर 2014 https://web.archive.org/web/20141230061643/http://mokamaonline.com/?p=1163 30 दिसंबर 2014 dead http://days.jagranjunction.com/2013/04/22/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A5%80/ संग्रहीत प्रति 7 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150530021132/http://days.jagranjunction.com/2013/04/22/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A5%80/ 30 मई 2015 dead
1857 के संग्राम में बाबू कुंवर सिंह
1857 में अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर कदम बढ़ाया। मंगल पांडे की बहादुरी ने सारे देश में विप्लव मचा दिया।http://www.khabarexpress.com/Vartmaan-Sahitya-Magzine-1-7- https://web.archive.org/web/20190423051526/http://www.khabarexpress.com/Vartmaan-Sahitya-Magzine-1-7- 23 अप्रैल 2019
177.html बिहार की दानापुर रेजिमेंट, बंगाल के बैरकपुर और रामगढ़ के सिपाहियों ने बगावत कर दी। मेरठ, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, झांसी और दिल्ली में भी आग भड़क उठी। ऐसे हालात में बाबू कुंवर सिंह ने अपने सेनापति मैकु सिंह एवं भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया।http://m.jagran.com/news/bihar-11254594.html संग्रहीत प्रति 2 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150102081647/http://m.jagran.com/news/bihar-11254594.html 2 जनवरी 2015 live
27 अप्रैल 1857 को दानापुर के सिपाहियों, भोजपुरी जवानों और अन्य साथियों के साथ आरा नगर पर बाबू वीर कुंवर सिंह ने कब्जा कर लिया। अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी भोजपुर लंबे समय तक स्वतंत्र रहा। जब अंग्रेजी फौज ने आरा पर हमला करने की कोशिश की तो बीबीगंज और बिहिया के जंगलों में घमासान लड़ाई हुई। बहादुर स्वतंत्रता सेनानी जगदीशपुर की ओर बढ़ गए। आरा पर फिर से कब्जा जमाने के बाद अंग्रेजों ने जगदीशपुर पर आक्रमण कर दिया। बाबू कुंवर सिंह और अमर सिंह को जन्म भूमि छोड़नी पड़ी। अमर सिंह अंग्रेजों से छापामार लड़ाई लड़ते रहे और बाबू कुंवर सिंह रामगढ़ के बहादुर सिपाहियों के साथ बांदा, रीवां, आजमगढ़, बनारस, बलिया, गाजीपुर एवं गोरखपुर में विप्लव के नगाड़े बजाते रहे। ब्रिटिश इतिहासकार होम्स ने उनके बारे में लिखा है, 'उस बूढ़े राजपूत ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अद्भुत वीरता और आन-बान के साथ लड़ाई लड़ी। यह गनीमत थी कि युद्ध के समय कुंवर सिंह की उम्र अस्सी के करीब थी। अगर वह जवान होते तो शायद अंग्रेजों को 1857 में ही भारत छोड़ना पड़ता।http://bihar.chauthiduniya.com/2011/05/siyasi-talvarn-chalne-lagi.html संग्रहीत प्रति 2 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150102081449/http://bihar.chauthiduniya.com/2011/05/siyasi-talvarn-chalne-lagi.html 2 जनवरी 2015 dead
वीरगति
इन्होंने 23 अप्रैल 1858 में, जगदीशपुर के पास अंतिम लड़ाई लड़ी। ईस्ट इंडिया कंपनी के भाड़े के सैनिकों को इन्होंने पूरी तरह खदेड़ दिया। उस दिन बुरी तरह घायल होने पर भी इस बहादुर ने जगदीशपुर किले से "यूनियन जैक" नाम का झंडा उतार कर ही दम लिया। वहाँ से अपने किले में लौटने के बाद 26 अप्रैल 1858 को इन्होंने वीरगति पाई।http://www.jagran.com/news/national-babu-kunwar-singh-salute-to-valor-10327555.html संग्रहीत प्रति 8 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150121091807/http://www.jagran.com/news/national-babu-kunwar-singh-salute-to-valor-10327555.html 21 जनवरी 2015 live
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय
बाहरी कड़ियाँ
स्मरण : बाबू कुंवर सिंह (जागरण-याहू)
श्रेणी:1777 में जन्मे लोग
श्रेणी:1858 में निधन
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