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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

वैदिक देवता

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वेदों में वर्णित देवताओं को वैदिक देवता कहते हैं - ये आधुनिक हिन्दू धर्म में प्रचलित देवताओं से थोड़े अलग हैं। वेदों के प्रत्येक मंत्र का एक देवता होता है। देवता का अर्थ - दाता, प्रेरक या ज्ञान-प्रदाता होता है वेदों को समझने के लिए प्राचीन काल से चली आ रही पद्धति वेदांग में शब्द-मूल के ग्रंथ निरूक्त में लिखा गया है - देवता कस्मात्, दानात दीपनात्, द्योतनात। यानि देवता किस कारण से, दान से, प्रकाशित करने से या द्योतित करने से। शतपथ ब्राह्मण, जो यजुर्वेद का विवेचन ग्रंथ है, उसमें लिखा है - विद्वांसों हि देवा यानि विद्वान ही देवता होते हैं (क्योंकि वो ज्ञान का दान और प्रकाश करते हैं, बताते हैं)। जिन देवताओं का मुख्य रूप से वर्णन हुआ है वे हैं - अग्नि, इन्द्र, सोम, मित्र वरुण, सूर्य, अशिवनौ, ईश्वर, द्यावा पृथ्वी आदि। ये वैदिक देवता आज भारतीय हिन्दू धर्म में व्यक्ति आधारित देवता जैसे - राम, कृष्ण, हनुमान, शिव, लक्ष्मी, गणेश, बालाजी, विष्णु, पेरुमल, शक्ति आदि से अलग हैं। वेदों में शाश्वत वस्तुओं और भावनाओं को देवता माना गया है, जबकि पुराणों में दिव्य व्यक्तियों और प्राणियों को - जिन्होने अनेक व्यक्तियों को सन्मार्ग दिखाया है। आधुनिक हिन्दू धर्म में पुराण और अन्य स्मृति ग्रंथों के देवताओं का अधिक प्रयोग है। अन्य वैदिक देवताओं में रुद्र, आदित्य, दम्पत्ति, बृहस्पति आदि आते हैं। वेदों में विश्वेदेवा करके अखिल-देवताओं का भी उल्लेख है जो इन सबको एक साथ संबोधित करता है। शाब्दिक और चारित्रिक विवेचन शाब्दिक अर्थ से इनको चारित्रिक रूप में दिखाने का भी प्रावधान है। जैसे, इन्द्र जिसका अर्थ बिजली होता है, को वृत्र का संहारकर्ता कहा गया है। वृत्र का अर्थ मेघ यानि बादल से है निरूक्त २.५.४। इस कारण से इन्द्र को वर्षा कराने और उर्वरता बढ़ाने वाले मानव-सदृश्य दिव्य व्यक्ति के रूप में निरुपित किया जाता है। पश्चिमी विद्वानों ने इन देवताओं के नाम को ग्रीक और पारसी धर्म के मिथकों के देवताओं से भी जोड़ा है , जैसे - द्यौ-पित्र - Jupiter सोम - Haom वैदिक देवताओं की तालिका +वैदिक देवताओं की तालिकाक्रम संख्यादेवदेवीउत्स१इन्द्रऋग्वेद के २५ मन्त्रों में, जिसमें १.३२.२, १.१६४.४६, ८.१२.२८, १.१०३.२ ओ १.३२.१ ऋक् की टीका२अग्निऋग्वेद के २०० मन्त्रों में३सोमऋग्वेद के १२३ मन्त्रों में४अश्विनीकुमार (अश्विनौ)ऋग्वेद के ५६ मन्त्रों में ५वरुणऋग्वेद के ४६ मन्त्रों में६मरुतऋग्वेद के ३८ मन्त्रों में७मित्रऋग्वेद के २८ मन्त्रों में Noel Seth,"Man's Relation to God in the Varuna Hymns," in the St. Thomas Christian Encyclopaedia of India, Ed. George Menachery, Vol.III, 2010, pp.4 ff.८ऊषा (भार)ऋग्वेद के २१ मन्त्रों में९वाय़ुऋग्वेद के १२ मन्त्रों में१०सवितृऋग्वेद के ११ मन्त्रों में११ऋभुऋग्वेद के ११ मन्त्रों में१२पूषा या पूशनऋग्वेद के १० मन्त्रों में१३अप्रीऋग्वेद के ९ मन्त्रों में१४बृहस्पतिऋग्वेद के ८ मन्त्रों में१५सूर्यऋग्वेद के ८ मन्त्रों में१६द्यौषपितृ (स्वर्ग)ऋग्वेद के ६ मन्त्रों में१७पृथ्वी माता (पृथिवी)ऋग्वेद के ६ मन्त्रों में१८अप (जल)ऋग्वेद के ६ मन्त्रों में१९आदित्यगणऋग्वेद के ६ मन्त्रों में२०विष्णुऋग्वेद के ४ मन्त्रों में२१बृहस्पतिऋग्वेद के ६ मन्त्रों में२२रुद्रऋग्वेद के ४ मन्त्रों में२३दधिकरऋग्वेद के ४ मन्त्रों में२४यम (मृत्यु)ऋग्वेद के ४ मन्त्रों में२५सरस्वती नदी/सरस्वतीऋग्वेद के ३ मन्त्रों में२६पर्जन्य (वृष्टि)ऋग्वेद ५.८३ तथा ७.१०१ एवं अथर्ववेद ४.१५२७वाक् (वक्तृता)ऋग्वेद के २ मंत्रों में, जिसमें १०.१२५२८वास्तुस्पतिऋग्वेद ७.५५२९विश्वकर्माऋग्वेद के २ मन्त्रों में३०मन्युऋग्वेद के २ मन्त्रों में३१कपिञ्जल (इन्द्र का रूप)ऋग्वेद के २ मन्त्रों में३२रात्रि३३मन (चिन्ताधारा), विशिष्ट धारणाऋग्वेद के १०.५८ स्तोत्र३३पुरुषपुरुष सूक्त महाजागतिक मनुष्य (ऋग्वेद १०.९०)३४अदितिऋग्वेद की १०.६३.३३५इन्द्राणी (शची)३६भग३७वसुक्र३८अत्रि३९अपां नपात४०क्षेत्रपति४१घ्रत४२निरीतिऋग्वेद १०.५९४३असंति४४ऊर्वशीऋग्वेद १०.९५.१८४५पुरुर्बसऋग्वेद १०.९५.१८४६वेनऋग्वेद १०.१२३४७अरण्यनीऋग्वेद १०.१४६४८मायाभेद (अविद्या लङ्घन)ऋग्वेद १०.१७७४९तर्कस्यऋग्वेद १.८९.६; १०.१७८.१; ५.५१५०त्वष्टा५१शरण्यु (सञ्जना)५२त्रिताऋग्वेद में ४१ बार५३विश्वदेवऋग्वेद ३.५४.१७ सन्दर्भ श्रेणी:वेद श्रेणी:हिन्दू धर्म