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हर्षद मेहता
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हर्षद मेहता Harshad Mehta.jpg हर्षद मेहता पानेली मोटी, सौराष्ट्र हर्षद शांतिलाल मेहता yes 1954 07 29 yes 2001 12 31 1954 07 29 ठाणे, महाराष्ट्र, भारत 5 साल का कठोर कारावास व्यवसायी, स्टॉकब्रोकर
हर्षद शांतिलाल मेहता (29 जुलाई 1954 – 31 दिसंबर 2001) एक भारतीय स्टॉकब्रोकर और धोखेबाज़ी थे, जिन्होंने 1992 शेयर मार्केट में मैनुपुलेशन (पंप एंड डंप)किया था।The securities scam of 1992 – CBI Archives http://www.cbi.gov.in/fromarchives/harshadmehta_nw/harshadmehta.php www.cbi.gov.in CBI (Central Bureau of Investigation), India 22 May 2018 1 नवंबर 2020 https://web.archive.org/web/20201101121710/http://www.cbi.gov.in/fromarchives/harshadmehta_nw/harshadmehta.php dead 1 नवंबर 2020 https://web.archive.org/web/20201101121710/http://www.cbi.gov.in/fromarchives/harshadmehta_nw/harshadmehta.php
प्रारंभिक जीवन
29 जुलाई 1954 को पनेल मोटी , राजकोट गुजरात में हर्षद मेहता का जन्म एक छोटे से बिजनेस मैन परिवार में हुआ। हर्षद मेहता का बचपन मुंबई के कांदि वली में गुजरा। उसके बाद उनका परिवार रायपुर के मौदहापारा गुरूनानक चौक मे आ के बस गया। रायपुर के होली क्रॉस बेरोन बाजार सेकेंडरी स्कूल से उन्होंने स्कूली पढ़ाई की। बारहवीं पास करने के बाद हर्षद मेहता ने मुबंई के लाजपत राय कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई की फिर अगले आठ साल तक छोटी छोटी नौकरियां की। बी कॉम पास करने के बाद हर्षद ने पहली नौकरी न्यू इंडिया अश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में बतौर सेल्स पर्सन की और उसी वक़्त उनका इंटरेस्ट शेयर मार्केट की तरफ जागा औऱ उसने नौकरी छोड़ हरिजीवनदास नेमीदास सिक्योरिटीज नाम की ब्रोक्रेज फर्म में बतौर जॉबर नौकरी ज्वॉइन कर ली और प्रसन्न परिजीवनदास को अपना गुरु मान लिया। प्रसन्न परिजीवनदास के साथ काम करते हुए हर्षद मेहता ने स्टॉक मार्केट के हर पैंतरे सीखे औऱ 1984 में खुद की ग्रो मोर रीसर्स एंड असेट मैनेजमेंट नाम की कंपनी की शुरुआत की और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बतौर ब्रोकर मेंबरशिप ली। और यहां से शुरू हुआ स्टॉक मार्केट के उस बेताज बादशाह का सफर जिसे आगे चलकर स्टॉक मार्केट
हर्षद मेहता घोटाला
1990 के दशक में हर्षद मेहता की कंपनी में बड़े निवेशक पैसा लगाने लगे थे, मगर जिस वजह से हर्षद मेहता का नाम स्टॉक मार्केट में छाया वो एसीसी यानी एसोसिएटेड सीमेंट कंपनी में उनका पैसा लगाना शुरू किया। हर्षद मेहता के एसीसी के पैसा लगाने के बाद मानो एसीसी के भाग्य ही बदल गए, क्योंकी एसीसी का जो शेयर 200 रुपये का था उसकी कीमत कुछ ही समय में 9000 हो गई। 1990 तक आते आते हर्षद मेहता का नाम हर बड़े अखबार, मैगजीन के कवर पेज पर आए दिन आने लगा। स्टॉक मार्केट में हर्षद मेहता का नाम बड़े अदब से लिया जाने लगा। हर्षद मेहता के 15500 स्कॉयर फीट के सी फेसिंग पेंट हाउस से लेकर उनकी मंहगी गाड़ियों के शौक तक सबने उन्हें एक सेलिब्रिटी बना दिया था। ऐसा पहली बार हो रहा था कि कोई छोटा सा ब्रोकर लगातार इतना इंवेस्ट कर रहा है और हर इवेस्टमेंट के साथ करोड़ों कमा रहा है। बस इसी सवाल ने हर्षद मेहता के अच्छे दिनों को बुरे दिनों में तब्दील कर दिया। सवाल था कि आखिर हर्षद मेहता इतना पैसा कहां से ला रहा है?
1992 में हर्षद मेहता के इस राज से टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार सुचेता दलाल ने इस राज का पर्दाफाश किया। सुचेता दलाल ने बताया कि हर्षद मेहता बैंक से एक 15 दिन का लोन लेता था और उसे स्टॉक मार्केट में लगा देता था। साथ ही 15 दिन के भीतर वो बैंक को मुनाफे के साथ पैसा लौटा देता था। मगर कोई भी 15 दिन के लिए लोन नहीं देता, मगर हर्षद मेहता बैंक से 15 दिन का लोन लेता था। हर्षद मेहता एक बैंक से फेक बीआर बनावाता जिसके बाद उसे दूसरे बैंक से भी आराम से पैसा मिल जाता था। हालांकि इसका खुलासा होने के बाद सभी बैंक ने उससे अपने पैसे वापस मागने शुरू कर दिए। खुलासा होने के बाद मेहता के ऊपर 72 क्रमिनर चार्ज लगाए गए और लगभग 600 सिविल केस फाइल हुए। इसके अलावा हर्षद मेहता इनसाइडर ट्रेडिंग भी करता था जैसे किसी कंपनी के छोटे एम्प्लॉय से कंपनी की सीक्रेट जानकारी हासिल कर उस कंपनी के शेयर को ऊपर नीचे लेजाता था।आपको बता दे की इनसाइड ट्रेडिंग एक अपराध है फिर भी हर्षद मेहता इस ट्रेडिंग को बड़ी चालाकी से करता था।
कैसे करता था घोटाला?
हालांकि इन सब के बावजूद हर्षद मेहता का मन नहीं माना, वो अखबारों में एडवाइजरी कॉलम्स लिखने लगा कि आप इस कंपनी में इंवेस्ट करे आपको फायदा होगा या इस कंपनी में ना करें इससे नुकसान होगा। बाद में पता चला कि मेहता सिर्फ उस कंपनी में पैसा लगाने कि एडवाइस देता था जिसमें उसका खुद का पैसा लगा हुआ है।
प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव पर लगाया घोटाले का आरोप
हर्षद मेहता ने 1993 में पूर्व प्रधानमंत्री और उस वक़्त कांग्रेस के अध्यक्ष पी वी नरसिम्हा राव पर केस से बचाने के लिए 1 करोड़ घूस लेने का आरोप लगाया था। हालांकि पर्याप्त सबूत ना होने के कारण सरकार द्वारा इसे सिरे से खारिज कर दिया गया था।
रहस्यमई मौत
हर्षद मेहता पर कई सारे केस चल रहे थे मगर उसे मात्र 1 केस में दोषी पाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उसे दोषी पाते हुए 5 साल की सजा और 25000 रुपये का जुर्माना ठोका था। मेहता थाणे जेल में बंद था। 31 दिसंबर 2001 को देर रात उसे छाती में दर्द की शिकायत हुई और इसी दौरान जेलर को कई वार बोलने के बाद उसको हॉस्पिटल के लिए ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही इनकी मृत्यु हो गई।
अगर समय पर मेहता जी को हॉस्पिटल ले जाया जाता तो वे बच जाते। इस लेख में लिखी सारी जानकारी एक तरफा है , कभी किसी ने उनके परिवार यानी की ज्योति मेहता जी और उनके भाई से सारी चर्चाएं नही की, और सुचेता दलाल भी कमाल निकली , उन्होंने किसी की भी नहीं सुनी और ईमानदारी से मेहता के दिए गए ऑफ़र ठुकरा दिए गए और एक सिविल क्रिमिनल व्यक्ति को जेल में डलवा दिया , और हृदय गति रुकने के कारण उनकी मृत्यु हुई ।
हर्षद मेहता जी के कारण भारतीय शेयर मार्केट ऊपर की ओर जा रहा था , यह विदेशी कंपनियां कैसे बर्दाश्त कर सकती थी , भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी होने का सबूत होता है शेयर मार्केट का ऊपर होना।
इन्हें भी देखें
अब्दुल करीम तेलगी
केतन पारेख
स्कैम 1992
सन्दर्भ
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श्रेणी:1954 में जन्मे लोग
श्रेणी:२००१ में निधन
श्रेणी:भारतीय व्यवसायी