Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

स्क्रॉल

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

अंग्रेज़ी सितंबर 2026 अंगूठाकार|350x350पिक्सेल|जोशुआ रोल, वेटिकन पुस्तकालय एक प्रकाशित स्क्रॉल, शायद 10वीं शताब्दी का, बीजान्टिन साम्राज्य में बनाया गया था। दाएँ|अंगूठाकार|एस्तेर की पुस्तक, सेविले, स्पेन दाएँ|अंगूठाकार|आज इब्रानी स्क्रॉल के लिए स्याही बनाने में उपयोग की जाने वाली सामग्री एक स्क्रॉल (पुरानी फ्रेंच शब्द एस्क्रोए से निर्मित) जिसे रोल से भी कहा जाता है, यह कागज, पपाइरस या चर्मपत्र का एक लपेटा हुआ बंडल है, जो कुछ लिखते वक्त काम आता है।http://www.oxfordreference.com scroll Beal Peter 2008 A Dictionary of English Manuscript Terminology 1450–2000 Oxford University Press https://web.archive.org/web/20130602205448/http://www.oxfordreference.com/ 2 June 2013 21 November 2013 Online संरचना अंगूठाकार|वॉल्यूमेन और रोटुलस, दो प्रकार के स्क्रॉल एक स्क्रॉल आमतौर पे कहि पृष्ठों में विभाजित होता है। कभी-कभी इन पृष्ठों को किनारों पर एक साथ चिपकाया जाता है और इस तरह पपाइरस या चर्मपत्र की अलग-अलग परतों का निर्माण होता है। स्क्रॉल को आमतौर पर इस प्रकार से खोला जाता है ताकि एक समय में एक ही पृष्ठ पढ़ने या लिखने को मिले। बाकी के पृष्ठों को एक-एक करके घुमाया जाता है और पढ़ा जाता है, या उसमें लिखा जाता है। पाठक या लेखक जिस भि पृष्ठ पर काम कर राहा है उस मूल पृष्ठ के अतिरिक्त बाकि के पृष्ठों को लपेट कर उस्के बाएं या दाएं हिस्से में रखा जाता है। मूल् पृष्ठ के ऊपर से नीचे तक पंक्तियों में लिखा जाता है। भाषा के आधार पर, अक्षरों को बाएं से दाएं, दाएं से बाएं, या भिन्न भिन्न् दिशाओ में भि लिखा जा सकता है। इतिहास. अंगूठाकार|चीनी चांदी के स्क्रॉल भारों में ड्रेगन के साथ उभरा हुआ है, जो देखने के लिए उतारने पर स्क्रॉल को स्थिर करने के लिए उपयोग किया जाता है। स्क्रॉल तथ्य से समृद्ध ग्रंथों का पहला रूप था जो संपादन योग्य है। इसका उपयोग पूर्वी भूमध्यसागरीय प्राचीन मिस्र की सभ्यताओं में किया जाता था। चर्मपत्र स्क्रॉल का उपयोग इस्राएलियों द्वारा शुरु किया गया। चर्मपत्र पृष्ठों के साथ कोडेक्स या बाध्य पुस्तक का आविष्कार रोमनों द्वारा किया गया था, जो पहली शताब्दी ईस्वी के आसपास लोकप्रिय हो गया था।https://www.history.com/news/history-lists/10-innovations-that-built-ancient-rome 10 Innovations That Built Ancient Rome Andrews Evan November 20, 2012 History https://web.archive.org/web/20180312144032/https://www.history.com/news/history-lists/10-innovations-that-built-ancient-rome 12 March 2018 11 March 2018 रोमन काल तक स्क्रॉल को कोडैक्स की तुलना में अधिक उच्च माना जाता था। स्क्रॉल पर लिखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्याही को एक ऐसी सतह पर चिपकना होता था जिसे बार-बार लपेटा और खोला जाता था, इसलिए इसके लिए खास तरह की स्याही बनाई गई थी। इसके बावजूद, समय के साथ स्याही धीरे-धीरे पपड़ी बनकर स्क्रॉल से झड़ने लगती थी। चीनी "व्हर्लविंड पुस्तक" चीन में छोटी किताबों का एक विशेष रूप होता है जिसे व्हर्लविंड पुस्तक कहा जाता है। इसमें कागज़ के कई टुकड़ों को ऊपर से बाँस द्वारा बाँधा जाता है और फिर उन्हें गोल आकार मे लपेट लिया जाता है।http://idp.bl.uk/education/bookbinding/index.a4d Bookbinding https://web.archive.org/web/20160110193132/http://idp.bl.uk/education/bookbinding/index.a4d 10 January 2016 स्कॉटलैंड स्कॉटलैंड लगभग 13वीं से 17वीं शताब्दी के दौरान किसी सूची या अनुसूची (schedule) के रूप में लिखे गए दस्तावेज़ों, लेखों या स्क्रॉल के लिए स्क्रो शब्द का प्रयोग किया जाता था। वहाँ स्क्रो लिखने वाले लोगो का एक कार्यालय मौजूद था जिसे रोटुलोरम क्लर्कस के नाम से जाना जात था।Beal, 2008, "scrow". कोडेक्स द्वारा प्रतिस्थापन पुस्तक का कोडेक्स रूप (यानी स्क्रॉल को मोड़कर पन्नों में बदलना, जिससे दस्तावेज़ को पढ़ना और संभालना बहुत आसान हो गया) रोमन काल के दौरान सामने आया।सूटोनियस रचित डिवस जूलियस (56.6) के एक प्रसंग के आधार पर यह किंवदंती प्रचलित है कि जूलियस सीज़र गॉल अभियानों में तैनात अपनी सेनाओं को संदेश भेजने के लिए स्क्रॉल को अकोर्डियन (जापानी पंखे) की तरह मोड़कर उनका इस्तेमाल करते थे। लेकिन परिच्छेद का सटीक अर्थ किसी भी तरह से स्पष्ट नहीं है। जैसा कि सी. एच. रॉबर्ट्स और टी. सी. स्कीट बताते हैं कि "जूलियस सीज़र ही कोडेक्स के आविष्कारक रहे होंगे... निश्चित रूप से एक दिलचस्प धारणा है; लेकिन उस प्रसंग से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए, ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना संदेहास्पद है"।The Birth of the Codex Roberts C.H. Skeat T.C. The British Academy 1987 0-19-726061-6 London 19 शुरुआती कोडेक्स के साक्ष्यों से यह बात पूरी तरह स्पष्ट होती है कि ईसाइयों ने ही सबसे पहले कोडेक्स का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल करना शुरू किया था। दूसरी शताब्दी के कई ईसाई पपाइरस कोडेक्स हमें मिलते हैं, जिनमें से एक नमुना कम से कम 150 ईस्वी से पहले का है। "कुल मिलाकर, यह मानना असंभव है कि ईसाइयों द्वारा कोडेक्स को अपनाया जाना लगभग 100 ईस्वी के बाद हुआ होगा (हो सकता है कि यह इससे भी पहले शुरू हो चुका हो)।"The Birth of the Codex Roberts C. H. Skeat T. C. The British Academy 1987 London 61 इस बदलाव के व्यावहारिक कारण भी थे; यदि पाठक दस्तावेज़ के अलग-अलग छोरों पर दी गई जानकारी को एक साथ देखना चाहता था, तो स्क्रॉल में ऐसा करना काफी मुश्किल था। इसके अलावा, स्क्रॉल पर केवल एक तरफ लिखा जाता था, जबकि कोडेक्स में पन्ने के दोनों तरफ लिखा जा सकता था। चौथी शताब्दी के बाद से कोडेक्स ही पुस्तकों का मानक रूप बन गया और स्क्रॉल (रोल) का सामान्य उपयोग धीरे-धीरे बंद हो गया। जब किसी चर्मपत्र स्क्रॉल मे लिखित तथ्यो को कोडेक्स के पन्नो पर कॉपी कर लिया जाता था, तो उस पुराने स्क्रॉल को शायद ही कभी सँभालकर रखा जाता था। जो थोड़े बहुत बचे थे, उनमें से अधिकांश स्क्रॉल पुरातत्वविदों को प्राचीन मृतको कि समाधि या प्राचीन बस्तियों के दबे हुए कचरे से मिले हैं।Murray, Stuart A.P. (2009) The Library: An Illustrated History. Chicago, IL. Skyhorse Publishing. (p.27) आधुनिक तकनीक अंगूठाकार|16वीं शताब्दी का डिस हेवुड स्क्रॉल, जो गंभीर रूप से जल गया है। वर्चुअल अनफोल्डिंग (डिजिटल रूप से खोलना) क्षतिग्रस्त या नाजुक स्क्रॉल को बिना नुकसान पहुँचाए खोलने और पढ़ने की एक आधुनिक तकनीक है। हाथो से खोलने पर पुराने संवेदनशील स्क्रॉल अक्सर नष्ट हो जाते हैं, लेकिन वर्चुअल अनफोल्डिंग मे यह नहि होता है। इस तकनीक के जरिये टोमोग्राफ़ द्वारा पुराने स्क्रॉल का 3D एक्स-रे स्कैन किया जाता है, जिसे बाद में सॉफ्टवेयर (कंप्यूटर प्रोग्राम) के ज़रिए डिजिटल रूप से खोला जाता है। इसके बाद स्क्रॉल का विस्तार से अध्ययन किया जा सकता है और मशीन मशीन लर्निंग की विधियों का उपयोग करके संसाधित किया जा जाता हैं। इस तकनीक का उपयोग इज़राइल के जले हुए 'एन-गेडी स्क्रॉल', इंग्लैंड के पानी से खराब हुए 'ब्रेसिंगम स्क्रॉल' और जले हुए 'डिस हेवुड स्क्रॉल', पोंपेई ज्वालामुखी विस्फोट में जले 'हरक्यूलेनियम पपायरी', एक मूर्ति के भीतर मिले मंगोलियाई बौद्ध स्क्रॉल, जॉर्डन से प्राप्त ताबीज जैसे धातु के स्क्रॉल, यूरोप के बंद पत्रों, और चीन के बाँस स्क्रॉल को पढ़ने के लिए किया गया है। संदर्भ श्रेणी:लिखाई माध्यम