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411 समाचार
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जय हरिवर्मन प्रथम

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जय हरिवर्मन प्रथम राजाधिराज रुद्रवर्मन चतुर्थ जिन्न्यान जय हरिवर्मन द्वितीय ? फ़न रन, चम्पा 1162 अथवा 1167 विजय, चम्पा रत्नभूमिविजय / शिवानन्दन चम्पा के राजा 1147/49–1162/67 जय इन्द्रवर्मन तृतीय जय हरिवर्मन प्रथम श्री जय हरिवरमादेव जय हरिवर्मन प्रथम (? – 1167) चम्पा के राजा और महान चाम थे। 12वीं सदी के ख्मेर–चाम युद्धों के दौरान सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपने शासन का अधिकांश समय चम्पा पर अपना नियंत्रण मजबूत करने में व्यतीत किया। उनके बाद उनके पुत्र जय हरिवर्मन द्वितीय ने पद सम्भाला। जीवनी 12वीं सदी के पूर्वार्द्ध के मध्य में चम्पा राज्य और ख्मेर साम्राज्य ने रुक-रुक कर एक दूसरे पर हमले किये तथा दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव दिखाया। सन् 1145 में ख्मेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने चम्पा पर कब्जा कर लिया और उसकी राजधानी विजय पर को अधिकृत कर लिया। चाम राजा जय इन्द्रवर्मन तृतीय को अपदस्त कर दिया।Golzio, Karl-Heinz. "New Perspectives on the Bayon?." Zeitschrift der Deutschen Morgenländischen Gesellschaft 159, no. 1 (2009): 71-80. ख्मेर साम्राज्य ने हरिदेव प्रथम को कठपुतली बनाकर गद्दी पर बैठाया और प्रदेश को लूट लिया।Higham Charles The civilization of Angkor Phoenix London 2003 1-84212-584-2 62762388 p. 120Hall D. G. E. The Kingdom of Champa 1981 https://doi.org/10.1007/978-1-349-16521-6_8 A History of South-East Asia 201–210 Hall D. G. E. Macmillan Asian Histories Series London Macmillan Education UK en 10.1007/978-1-349-16521-6_8 978-1-349-16521-6 2021-06-18 इस आक्रमण के बाद चाम लोगों ने ख्मेर समर्थित राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह के दौरान हरिवर्मन पांडुरंग की विद्रोही सेनाओं के नेता बन गये। वो कुलीन व्यक्ति थे और उन्हें शिवानंदन के नाम से भी जाना जाता था। सन् 1147 में उन्होंने चम्पा पर अतिक्रमण किये ख्मेरों की सेना को हरा दिया। ख्मेर राजा सूर्यवर्मन को और सेना भेजनी पड़ी; हालांकि सन् 1145 और 1150 के मध्य सूर्यवर्मन की मौत हो गयी (सम्भवतः सन् 1149 में दूसरी सेना का नेतृत्व करते हुये) तथा इससे ख्मेरों की शक्ति काफी कमजोर हो गयी। सन् 1149 अथवा सन् 1150 में हरिवर्मन और उनकी सेना ने हरिदेव प्रथम को पराजित करके हत्या कर दी। हरिवर्मन का शिघ्र राज्याभिषेक किया गया और उन्हें जय हरिवर्मन प्रथम कहा गया। राजा बनने के बाद उन्होंने सन् 1150 में ख्मेरों के दूसरे अभियान को चम्पा से पीछे हटने को मजबूर कर दिया। हालांकि कुछ स्रोतों के अनुसार ख्मेरों के साथ संघर्ष सन् 1160 तक जारी रहा। सन्दर्भ श्रेणी:चम्पा