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बालकृष्ण भगवन्त बोरकर
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बालकृष्ण भगवन्त बोरकर 150 बालकृष्ण भगवन्त बोरकर बालकृष्ण भगवन्त बोरकर बोरिम 30 नवम्बर 1910 8 जुलाई 1984 स्वतन्त्रता सेनानी, कवि, लेखक, भाषाई कार्यकर्ता मराठी, कोंकणी कोंकणी भारतीय पद्मश्री
बालकृष्ण भगवन्त बोरकर (कोंकणी: बाळकृष्ण भगवन्त शेणय बोरकार) (1910–1984) भारत के गोवा राज्य के एक कवि थे। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह ससया के लिये उन्हें सन् १९८१ में साहित्य अकादमी पुरस्कार (कोंकणी) से सम्मानित किया गया।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी 11 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead उन्हें 'बा-कि-बाब' नाम से भी जाना जाता है।
बा भा बोरकर ने कम आयु से ही कविताएँ लिखना आरम्भ कर दिया था। वी सा खाण्डेकर, बोरकर की कविताओं के एक प्रारम्भिक समर्थक थे। बोरकर ने 1950 के दशक में गोवा के स्वतन्त्रता संग्राम से जुड़े और पूना चले गए जहाँ उन्होंने रेडियों सेवा में काम किया। उनका अधिकांश साहित्य मराठी में लिखा हुआ है लेकिन कोंकणी भाषा में भी उन्होंने बहुत साहित्य लिखा था। उन्होंने कहा कि साथ ही एक गद्य लेखक के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वे गद्य लेखक के रूप में भी उत्कृष्ट लेख रहे थे।
उनके द्वारा लिखी गई कविताएँ महात्मायन (गाँधी जी को समर्पित एक अधूरी कविता) और तमहस्तोत्र (मधुमेह और बुढ़ापे के कारण अन्धेपन की सम्भावना पर) प्रसिद्ध हैं।
बाहरी कड़ियाँ
Readings of Borkar's poetry
Recital of Borkar's poetry by his nephew Dr. Ghanashyam Borkar
सन्दर्भ
श्रेणी:मराठी कवि
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत कोंकणी भाषा के साहित्यकार
श्रेणी:1910 में जन्मे लोग