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संज्ञानात्मक नक्शे
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संज्ञानात्मक मानचित्र (Cognitive map), जिसे मानसिक मानचित्र या मानसिक मॉडल भी कहा जाता है, एक प्रकार का मानसिक निरूपण (Mental Representation) है। यह किसी व्यक्ति को उसके स्थानिक वातावरण (Spatial Environment) और घटनाओं की विशेषताओं के बारे में जानकारी ग्रहण करने, उसे संचित करने (याद रखने) और पुनः उपयोग (डिकोड) करने में मदद करता है। इस अवधारणा को 1948 में एडवर्ड टॉल्मन (Edward Tolman) द्वारा प्रस्तुत किया गया था।Tolman Edward C. Cognitive maps in rats and men https://archive.org/details/sim_psychological-review_1948-07_55_4/page/n1 Psychological Review 55 4 189–208 1948 10.1037/h0061626 18870876 संज्ञानात्मक मानचित्रों का अध्ययन मनोविज्ञान, शिक्षा, पुरातत्व, योजना, भूगोल, मानचित्रकारी, वास्तुकला, शहरी योजना और प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।Kitchin R.M. Cognitive maps: what are they and why study them? https://archive.org/details/journal-of-environmental-psychology_1994-03_14_1/page/1 Journal of Environmental Psychology 14 1 1–19 1994 10.1016/S0272-4944(05)80194-X परिणामस्वरूप, इन मानसिक मॉडलों को अक्सर संज्ञानात्मक मानचित्र, मानसिक मानचित्र, स्क्रिप्ट, स्कीमा (Schemata) और संदर्भ के ढांचे (Frames of reference) के रूप में भी जाना जाता है। संज्ञानात्मक मानचित्र स्थानिक ज्ञान के संचय और "मन की आँखों" द्वारा छवियों की कल्पना करने की अनुमति देकर संज्ञानात्मक भार (Cognitive load) को कम करने का कार्य करते हैं। इसका उपयोग स्थानिक ज्ञान के माध्यम से गैर-स्थानिक कार्यों (जैसे स्मृति और कल्पना) को समझने के लिए एक रूपक (Metaphor) के रूप में भी किया जा सकता है।Epstein Russell A. Patai Eva Z. Julian Joshua B. Spiers Hugo J. The cognitive map in humans: spatial navigation and beyond Nature Neuroscience 20 11 1504–1513 2017 10.1038/nn.4656 संज्ञानात्मक मानचित्र के तंत्रिका संबंधी आधार मुख्य रूप से हिप्पोकैम्पसO'Keefe John Nadel Lynn The Hippocampus as a Cognitive Map https://archive.org/details/bwb_P8-BJP-241 Clarendon Press Oxford 1978 978-0198572060 की "प्लेस कोशिकाओं" (Place cells) और एंटोरहिनल कॉर्टेक्स (Entorhinal cortex) की "ग्रिड कोशिकाओं" (Grid cells) में पाए जाते हैं।Moser Edvard I. Kropff Emilio Moser May-Britt Place Cells, Grid Cells, and the Brain's Spatial Representation System Annual Review of Neuroscience 31 69–89 2008 10.1146/annurev.neuro.31.061307.090723 == संज्ञानात्मक मानचित्र का सृजन ==
संज्ञानात्मक मानचित्र का सृजन संज्ञानात्मक मानचित्र अनेक स्रोतों — दृश्य प्रणाली और अन्य संवेदी प्रणालियों — से उत्पन्न होते हैं। इसका अधिकांश भाग स्वयं द्वारा की गई गतिविधियों (Self-generated movement) के संकेतों के माध्यम से बनता है। दृष्टि, प्रोप्रियोसेप्शन (शरीर की स्थिति का ज्ञान), गंध और श्रवण जैसी इंद्रियों से प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने पर्यावरण के भीतर स्थान निर्धारित करने के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से 'पथ एकीकरण' (Path integration) की अनुमति देता है, जिससे एक व्यक्ति पर्यावरण के भीतर अपनी स्थिति और दिशा का प्रतिनिधित्व करता है। यह परिणामी वेक्टर, पर्यावरण और संज्ञानात्मक मानचित्र के संदर्भ में अधिक जानकारी प्रदान करता है, जिसे हिप्पोकैम्पस की कोशिकाओं द्वारा संसाधित किया जाता है।Jacobs L. F. Unpacking the cognitive map: The parallel map theory of hippocampal function https://archive.org/details/sim_psychological-review_2003-04_110_2/page/284 Psychological Review 110 2 285–315 2003 10.1037/0033-295X.110.2.285 दिशात्मक संकेत और लैंडमार्क (Landmarks) भी संज्ञानात्मक मानचित्र बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इसमें सूर्य की स्थिति, छाया, या चुंबकीय क्षेत्र (पक्षियों में) जैसे स्पष्ट संकेतों का उपयोग मानचित्र निर्माण के लिए किया जाता है।
इतिहास == संज्ञानात्मक मानचित्र का विचार सबसे पहले एडवर्ड सी. टॉल्मन (Edward C. Tolman) द्वारा विकसित किया गया था। एक संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक के रूप में, टॉल्मन ने चूहों और भूलभुलैया (Mazes) पर अपने प्रयोगों के दौरान यह विचार प्रस्तुत किया। टॉल्मन के प्रयोग में, एक चूहे को क्रॉस आकार की भूलभुलैया में रखा गया और उसे अन्वेषण करने दिया गया। प्रारंभिक अन्वेषण के बाद, चूहे को एक विशिष्ट स्थान पर रखा गया और भोजन को हमेशा दाईं ओर रखा गया। चूहा भोजन प्राप्त करने के लिए दाईं ओर मुड़ना सीख गया। हालांकि, जब चूहे को भूलभुलैया के दूसरे हिस्से से शुरू कराया गया, तो वह रटे-रटाए रास्ते पर चलने के बजाय, अपने प्रारंभिक 'संज्ञानात्मक मानचित्र' की मदद से भोजन की सही दिशा की ओर गया। स्थान बदलने से चूहे को कोई फर्क नहीं पड़ा और वह सही रास्ता खोजने में सक्षम रहा।Goldstein E. Bruce Cognitive Psychology: Connecting Mind, Research, and Everyday Experience https://archive.org/details/cognitivepsychol0000gold_c7e5 Cengage Learning 2011 978-0495502333 11-12 == आलोचना == बेनेट (1996)Bennett A. T. D. Do animals have cognitive maps? The Journal of Experimental Biology 199 2 219–224 1996 http://jeb.biologists.org/content/199/2/219 द्वारा एक समीक्षा में यह तर्क दिया गया कि गैर-मानव जानवरों में संज्ञानात्मक मानचित्र (टॉल्मन की परिभाषा के अनुसार) के लिए कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। बेनेट के अनुसार, प्रयोगात्मक परिणामों को सरल स्पष्टीकरणों द्वारा भी समझाया जा सकता है। बेनेट ने जानवरों में संज्ञानात्मक मानचित्र की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया, लेकिन प्रायोगिक परिणामों के लिए तीन वैकल्पिक व्याख्याएं दीं: # जिसे "नया शॉर्टकट" (Novel shortcut) समझा जा रहा है, वह वास्तव में नया नहीं है। # जानवर 'पथ एकीकरण' (Path integration) का उपयोग कर रहे हैं, न कि मानचित्र का। # जानवर किसी परिचित लैंडमार्क (Landmark) को एक नए कोण से पहचान रहे हैं और उसकी ओर बढ़ रहे हैं। == संबंधित शब्दावली एक 'संज्ञानात्मक मानचित्र' बाहरी दुनिया का एक मानसिक प्रतिनिधित्व है जो मन के भीतर रहता है। जबकि 'संज्ञानात्मक मानचित्रण' (Cognitive mapping) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा यह मानसिक मानचित्र तैयार किया जाता है।Downs Roger M. Stea David Image and Environment: Cognitive Mapping and Spatial Behavior https://archive.org/details/imageenvironment0000down Aldine 1973 978-0202363715 312
सन्दर्भ
श्रेणी:मनोविज्ञान