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बरनावा
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वार्णावत तहसील बागपत जिला मेरठ 29.1103635 77.4277461 right उत्तर प्रदेश 219 2001 0121 Barnava_(35).JPG लाक्षागृह टीले से बरनावे का दृश्य
बरनावा या वारणावत मेरठ से ३५ किलोमीटर दूर और सरधना से १७ कि.मी बागपत जिला में स्थित एक तहसील है। इसकी स्थापना राजा अहिबरन ने बहुत समय पूर्व की थी।http://www.india9.com/i9show/Barnawa-21344.htm बरनावा 11 जनवरी 2010 https://web.archive.org/web/20160305011318/http://www.india9.com/i9show/Barnawa-21344.htm 5 मार्च 2016 live यहां महाभारत कालीन लाक्षाग्रह चिन्हित है। लाक्षाग्रह नामक इमारत के अवशेष यहां आज एक टीले के रूप में दिखाई देते हैं। महाभारत में कौरव भाइयों ने पांडवों को इस महल में ठहराया था और फिर जलाकर मारने की योजना बनायी थी। किन्तु पांडवों के शुभचिंतकों ने उन्हें गुप्त रूप से सूचित कर दिया और वे निकल भागे। वे यहां से गुप्त सुरंग द्वारा निकले थे। ये सुरंग आज भी निकलती है, जो हिंडन नदी के किनारे पर खुलती है। इतिहास अनुसार पांडव इसी सुरंग के रास्ते जलते महल से सुरक्षित बाहर निकल गए थे।मेरठ में है हस्तिनापुर https://web.archive.org/web/20120329044818/http://neerajjaatji.blogspot.com/2008/12/blog-post_7160.html 29 मार्च 2012 । मुसाफ़िर हूं यारों। १६ दिसम्बर २००८। नीरज जाट जी जनपद में बागपत व बरनावा तक पहुंचने वाली कृष्णा नदी का यहां हिंडन में मिलन होता है।नदियां बनी जहर https://web.archive.org/web/20101207221719/http://www.hindi.indiawaterportal.org/content/%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%B9%E0%A4%B0 7 दिसंबर 2010 |इंडिया वॉटर पोर्टल
उल्लेखनीय है कि पांडवों ने जो पाँच गाँव दुर्योधन से माँगे थे वह गाँव पानीपत, सोनीपत, बागपत, तिलपत, वरुपत (बरनावा) यानि पत नाम से जाने जाते हैं।http://kairana.blogspot.com/2008/12/blog-post_31.html कैराना 11 जनवरी 2010 https://web.archive.org/web/20160305120817/http://kairana.blogspot.com/2008/12/blog-post_31.html 5 मार्च 2016 live जब श्रीकृष्ण जी संधि का प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के पास आए थे तो दुर्योधन ने कृष्ण का यह कहकर अपमान कर दिया था कि "युद्ध के बिना सुई की नोक के बराबर भी जमीन नहीं मिलेगी।" इस अपमान की वजह से कृष्ण ने दुर्योधन के यहाँ खाना भी नहीं खाया था। वे गए थे महामुनि विदुर के आश्रम में। विदुर का आश्रम आज गंगा के उस पार बिजनौर जिले में पड़ता है। वहां पर विदुर जी ने कृष्ण को बथुवे का साग खिलाया था। आज भी इस क्षेत्र में बथुवा बहुतायत से उगता है।
लाक्षागृह
महाभारत कालीन लाक्षाग्रह चिन्हित है। लाक्षाग्रह नामक इमारत के अवशेष यहां आज एक टीले के रूप में दिखाई देते हैं। महाभारत में कौरव भाइयों ने पांडवों को इस महल में ठहराया था और फिर जलाकर मारने की योजना बनायी थी। किन्तु पांडवों के शुभचिंतकों ने उन्हें गुप्त रूप से सूचित कर दिया और वे निकल भागे। वे यहां से गुप्त सुरंग द्वारा निकले थे। ये सुरंग आज भी निकलती है, जो हिंडन नदी के किनारे पर खुलती है। इतिहास अनुसार पांडव इसी सुरंग के रास्ते जलते महल से सुरक्षित बाहर निकल गए थे।
चित्र दीर्घा
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आवागमन
बरनावा जाने के लिए मेरठ से शामली रोड होते हुए बरनावा रोड द्वारा रास्ता है। यहां के लिये उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें चलती हैं।
सन्दर्भ
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