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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पवनदूतम्

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पवनदूतम् (=पवन दूत) एक ऐतिहासिक संस्कृत काव्य है।https://www.google.co.uk/books/edition/A_History_of_Classical_Poetry/E0aYeR67booC?hl=en&gbpv=0 A History of Classical Poetry Siegfried Lienhard 1998 Harrassowitz इसकी रचना सेन राजवंश के राजा लक्ष्मण के दरबार में एक कवि धोयि ने की थी। राजा लक्ष्मण ने १२वीं शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध में गौड़ पर शासन किया था, जो अब बंगाल है।Into the Twilight of Sanskrit Court Poetry Knutson Jesse 2014-03-14 Univ of California Press 978-0-520-28205-6 Berkeley 34 पवनदूत, कालिदास के मेघदूत की तरह संदेशवाहक काव्य है जिसमें पवन (हवा) को दूत बनाकर अपना सन्देश भेजा जा रहा है। पवनदूतम् में दक्षिण की एक गंधर्व युवती कुवलयावती की कथा है, जिसे राजा लक्ष्मण से प्यार हो जाता है जब वह उन्हें उनकी विजय यात्रा के समय देखती है। वह दक्षिणी हवा से अपना संदेश राजा के दरबार में ले जाने के लिए कहती है। अन्य संदेशवाहक काव्यों की तरह पवनदूतम् का विषय 'विरह' है। रोमांस के संकेत कभी दूर नहीं होते। कवि ने कुल १०४ पदों में से ४८ श्लोकों में दक्षिण के चंदन पर्वत से बंगाल के विजयपुर में राजा लक्ष्मण के महल तक पवन की यात्रा का वर्णन किया है। शेष ३४ श्लोकों में कुवलयावती के प्रेम एवं राजा के अद्भुत गुणों का विस्तार से वर्णन किया गया है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ Pavana Dutam With Sanskrit Notes By Chinta Haran Chakravarti मेघदूतम् और पवनदूतम् का तुलनात्मक अध्ययन श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ श्रेणी:संस्कृत काव्य