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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय
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महात्मा गान्धी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय
ज्ञान शान्ति मैत्री
१९९७
सार्वजनिक
यूजीसी
प्रोफेसर कृष्ण कुमार सिंह
वर्धा
महाराष्ट्र
भारत
ग्रामीण
www.hindivishwa.org
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय भारत का एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है।http://mhrd.gov.in/hi/mhrdhindi मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की सूची 31 जुलाई 2012 https://web.archive.org/web/20131014122433/http://mhrd.gov.in/hi/mhrdhindi 14 अक्तूबर 2013 dead विश्वविद्यालय की स्थापना भारत सरकार ने सन् १९९६ में संसद द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा की थी। इस अधिनियम को भारत के राजपत्र में ८ जनवरी सन् १९९७ को प्रकाशित किया गया। यह विश्वविद्यालय महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित है।
गान्धी जी, हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के प्रबल पक्षधर थे। इसलिये इस विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखना सर्वथा सार्थक है। वर्धा भारत के केन्द्र में स्थित होने के कारण इस विश्वविद्यालय के लिये यह स्थान भी सर्वथा उपयुक्त है।
विश्वविद्यालय के केन्द्र
नागपूर
इलाहाबाद केन्द्र
कोलकाता केन्द्र
रिद्धपूर
हजूरसाहिब नांदेड
विद्यापीठ के अंग
प्रारम्भ में इसके 8 विद्यापीठ अधिकल्पित किये गये थे, जिनके नाम तथा विभाग इस प्रकार हैं:
भाषा विद्यापीठ
भाषा विज्ञान एवं भाषा-प्रौद्योगिकी विभाग
सूचना एवं भाषा अभियांत्रिकी केंद्र
विदेशी भाषा एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र
साहित्य विद्यापीठ
हिन्दी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग
प्रदर्शनकारी कला विभाग
अग्रेज़ी साहित्य विभाग
उर्दू साहित्य विभाग
संस्कृत साहित्य विभाग
मराठी साहित्य विभाग
संस्कृति विद्यापीठ
गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग
स्त्री अध्ययन विभाग
डॉ॰ बाबासाहेब आम्बेडकर सिदो कान्हू मुर्मू दलित एवं जनजातीय अध्ययन केंद्र
डॉ॰ भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र
अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ
अनुवाद अध्ययन विभाग
प्रवासन एवं डायस्पोरा अध्ययन विभाग
मानविकी एवं समाजिक विज्ञान विद्यापीठ
जनसंचार विभाग
मानवविज्ञान विभाग
महात्मा गांधी फ़यूजी-गुरूजी सामाजिक कार्य अध्ययन केंद्र
शिक्षा विद्यापीठ
शिक्षा विभाग
मनोविज्ञान विभाग
प्रबंधन विद्यापीठ
वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग
विधि विद्यापीठ
वर्धा समाज कार्य संस्थान
समाज कार्य विभाग
दूर शिक्षा निदेशालय
विश्वविद्यालय के अधिनियम की धारा 4 में उल्लिखित विश्वविद्यालय के उद्देश्यों में बताया गया है किविश्वविद्यालय का उद्देश्य - दूरस्थ शिक्षा पद्धति के माध्यम से हिन्दी को लोकप्रिय बनाना होगा'। साथ हीधारा 5 के उपबन्ध (5) के अन्तर्गत विश्वविद्यालय को प्रदत्त शक्तियों में यह बताया गया है कि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से उन व्यक्तियों को जिनके बारे में वह निर्धारित करे, सुविधाएँ प्रदान करना है'|
इस पृष्ठभूमि के आलोक में 15 जून, 2007 को महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम का उदघाटन भारत के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया।
विश्वविद्यालय संगणक केन्द्र
लेबोरेट्री इन इनफार्मेटिक्स फार द लिबरल आर्ट्स (लीला )
लीला प्रयोगशाला सभी आईटी शिक्षण संबंधित लर्निंग, रिसर्च, और विश्वविद्यालय के आईटी विस्तार से संबंधित गतिविधियों का समर्थन करता है. यह छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी की सुविधाएं प्रदान करता है। लीला प्रयोगशाला विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों- स्थापना, वित्त, लाइब्रेरी, स्कूल, केंद्र और इस विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के लिए कार्यालय स्वचालन उपकरण के विकास के लिए काम किया जा रहा है, साथ ही विश्वविद्यालय के वेबसाइट का रखरखाव एवं अद्यतन कार्य भी लीला लैब की जिम्मेदारी है।
विश्वविद्यालय की सभी सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित गतिविधियों के लिए लीला की परिकल्पना एक केंद्रीय सुविधा के रूप में की गई है। पाठयक्रमों में सूचना प्रौद्योगिकी के घटकों को पूर्ण करना लीला विभाग के दायित्वो मे से एक है। इसके तहत एक सर्टिफिकेट कोर्स कंप्यूटर फंडामेंटलस् एवं अनुप्रयोग एम ए पाठ्यक्रमों के लिए चलाया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम एम ए के सभी पाठ्यक्रमों में एक अनिवार्य विषय के रूप में है। लीला द्वारा एम फिल एवं पीएच डी के शोधार्थियों के शोध कोर्स-वर्क के लिए दिये गये दिशा निर्देशो के अनुरूप पाठ्यक्रम का निर्माण एवं संचालन किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम का नाम कम्प्यूटर ऑपरेशन एवं अनुप्रयोग है।
विदेशी शिक्षण प्रकोष्ठ
परिचय
हिंदी दुनिया की सबसे प्रमुख भाषाओं में से एक है। भारत और दुनिया के दूसरे देशों में इसे बोलने और समझने वालों की संख्या बहुत बड़ी है। पिछले दशकों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हिंदी के प्रभाव और हस्तक्षेप को महसूस किया गया है। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रमुख दायित्वों में से एक हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना भी है। अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी के विकास के लिए केंद्रीय और समन्वयक अभिकरण के रूप में कार्य करने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर प्रयत्नशील है। आठवें और नवें विश्व हिंदी सम्मेलनों में विश्वविद्यालय को इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए थे। नवें विश्व हिंदी सम्मेलन में विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी शिक्षण के लिए मॉडल पाठ्यक्रम निर्माण का विशेष दायित्व भी विश्वविद्यालय को सौंपा गया है।
विश्वविद्यालय ने सौंपे गए और अपेक्षित दायित्वों को पूरा करने के लिए विदेशी शिक्षण प्रकोष्ठ की स्थापना की है। प्रकोष्ठ का लक्ष्य सब प्रकार से हिंदी को एक समर्थ अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में विकसित करने के साथ-साथ ही दुनिया के दूसरे भाषा-भाषी देशों के साथ सांस्.तिक संबंध के विस्तार और संवाद के सेतु का निर्माण करना भी है। यह प्रकोष्ठ विदेशी विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रमों का संचालन, प्रबंधन, नियमन और शिक्षण करता है। प्रकोष्ठ द्वारा विदेशी विद्यार्थियों के लिए विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण के कई पाठ्यक्रम संचालित हैं। इनमें 3-4 सप्ताह के गहन हिंदी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, तीन माह और छह माह के प्रमाणपत्र तथा एक वर्ष का डिप्लोमा पाठ्यक्रम मुख्य है। अब तक इन पाठ्यक्रमों में यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों - जर्मनी, पोलैंड, बेल्जियम, क्रोएशिया, हंगरी, श्रीलंका, थाइलैंड, मॉरिशस, चीन, मलेशिया, जापान, सिंगापुर, नेपाल, कोरिया, यू.एस.ए. आदि के विद्यार्थी अध्ययन कर चुके हैं। कई देशों के विद्यार्थी विभिन्न अनुशासनों में नियमित एम.ए./एम.फिल./पी-एच.डी. पाठ्यक्रमों में अध्ययन और शोध परियोजनाओं में कार्य कर रहे हैं।
अनुबन्ध
विश्वविद्यालय ने अपने शैक्षणिक/अकादमिक गतिविधियों के विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत दुनिया के 7 देशों के 9 विश्वविद्यालयों/ संस्थान के साथ शैक्षणिक अनुबंध किया है और भविष्य में कई अन्य विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ अनुबंध की योजना है। इन अनुबंधों के अंतर्गत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और अनुबंधित विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों/शोधार्थियों और शिक्षकों के बीच परस्पर शैक्षणिक/अकादमिक गतिविधियों के आवश्यकताओं के अनुरूप आदान-प्रदान के कार्यक्रम होते हैं।
अनुबंधित विश्वविद्यालय/संस्थानश्रीलंकायूनिवर्सिटी ऑफ केलानिया, केलानियाHttp://Www.Kln.Ac.Lk/श्रीलंकासबरगामुवा यूनिवर्सिटी, बेलिहुलोयाHttp://Www.Sab.Ac.Lk/मॉरिशसमहात्मा गांधी इंस्टीट़यूट, मोकाHttp://Www.Mgirti.Orgहंगरीइतवॉस लोरांद यूनिवर्सिटी, बुदापेस्तHttp://Www.Elte.Hu/Enबेल्जियमघेंट यूनिवर्सिटी, घेंटHttp://Www.Ugent.Be/Enइटलीयूनिवर्सिटी ऑफ टूरिन, टूरिनHttp://Www.Unito.It/जर्मनीयूनिवर्सिटी ऑफ टयूबेंगिन, जर्मनीHttp://Www.Uni-Tuebingen.De/Enजर्मनीयूनिवर्सिटी ऑफ हम्बुर्ग, जर्मनीHttp://Www.Uni-Hamburg.De/रूसमॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी, मॉस्कोHttp://Www.Msu.Ru/जापान टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ़ फॉरेन स्टडीज, टोक्यो http://www.tufs.ac.jp/english/चीन जियान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीफ्रांसइनाल्को (INALCO), पेरिसhttp://www.inalco.fr/सिंगापुरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुरhttp://www.nus.edu.sg/चीनबीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी,बीजिंगhttp://global.bfsu.edu.cn/en/चीन कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ चाइना http://en.cuc.edu.cn/
संचालित पाठ्यक्रम
क्र. सं.पाठ्यक्रम का नामअवधि1.अल्पावधि गहन प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम4 सप्ताह2.आधार पाठ्यक्रम4 सप्ताह3.डिप्लोमा पाठ्यक्रम2 सेमेस्टर4.बी.ए. हिंदी : भाषा, साहित्य और संस्कृति6 सेमेस्टर5.एम.ए.हिंदी4 सेमेस्टर
शुल्क/सुविधाएँ
240 यू.एस. डॉलर प्रतिमाह
(उल्लिखित सुविधाओं सहित)
नागपुर एयरपोर्ट अथवा वर्धा/सेवाग्राम रेलवे स्टेशन से विश्वविद्यालय परिसर तक आगमन एवं प्रस्थान के समय
फादर कामिल बुल्के अंतरराष्ट्रीय छात्रावास (एसी) में आवासीय सुविधा
भोजन (शाकाहारी एवं मांसाहारी)
एसी क्लास-रूम
लैंग्वेज लैब
24 घंटे बिजली
'आर ओ' प्रशोधित पेयजल प्रशोधित पेय जल
इंटरनेट
केंद्रीय पुस्तकालय
जिम
विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र
खेलकूद
विश्वविद्यालय के प्रकाशन
विश्वविद्यालय की पत्रिकाएं
पुस्तक-वार्ता
बहुवचन
Hindi Language Discourse Writing
हिंदी-विश्व विश्वविद्यालय की द्विमासिक समाचार पत्रिका
विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित अन्य पुस्तकें
संचयिताएं
विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित संचयिताएंक्र.सं.पुस्तकों के नामलेखक/संपादकप्रकाशकवर्षमूल्य1.हजारी प्रसाद द्विवेदी संचयिताराधावल्लभ त्रिपाठीवाणी प्रकाशन, दिल्ली2001400/-2.अज्ञेय संचयितानंदकिशोर आचार्यराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2001395/-3.सूर्यकांत त्रिपाठी निराला संचयिताडॉ. रमेशचन्द्र शाहवाणी प्रकाशन, दिल्ली2001395/-4.महादेवी वर्मा संचयितानिर्मला जैनवाणी प्रकाशन, दिल्ली2002400/-5.मैथलीशरण गुप्त संचयितानंदकिशोर नवलराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2002275/-6.जैनेन्द्र कुमार संचयिताडॉ. ज्योतिष जोशीपूर्वोदय प्रकाशन, दिल्ली2002425/-7.त्रिलोचन संचयिताध्रुव शुक्लवाणी प्रकाशन, दिल्ली2002375/-8.रामचंद्र शुक्ल संचयितारामचंद्र तिवारीवाणी प्रकाशन, दिल्ली2003500/-9.श्रीकांत वर्मा संचयिताउदयन वाजपेयीराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2003325/-10.भवानी प्रसाद संचयिताप्रभात त्रिपाठीराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2003450/-11.रघुवीर सहाय संचयिता&Amp;Amp;Nbsp;कृष्ण कुमारराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2003225/-12.नामवर सिंह संचयितानंदकिशोर नवलराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2003350/-13फणीश्वरनाथ रेणु संचयितासुवास कुमारमेधा बुक्स, दिल्ली2003590/-14.केदारनाथ अग्रवाल संचयिता (HD)डॉ. अशोक त्रिपाठीसाहित्य भंडार, इलाहाबाद2011500/-15.केदारनाथ अग्रवाल संचयिता (PB)डॉ. अशोक त्रिपाठीसाहित्य भंडार, इलाहाबाद2011&Nbsp;16.स्वामी अछूतानंद हरिहर संचयिताकँवल भारतीस्वराज प्रकाशन, दिल्ली2011450/-17.उपाध्याय श्री बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघनडॉ. भवदेव पाण्डेयशिल्पायन, दिल्ली2012375/-18.चंद्रकुँवर वर्त्वाल संचयितागंगा प्रसाद विमलविजया बुक्स, दिल्ली2012275/-19.सूर संचयिताप्रो. मैनेजर पाण्डेयराजकमल प्रकाशन2012250/-20.कमलेश्वर संचयितागंगा प्रसाद विमलकिताबघर प्रकाशन, दिल्ली2013850/-21.निर्मला जैन संचयितारामेश्वर रायवाणी प्रकाशन, दिल्ली2013495/-22.रामविलास शर्मा संचयितामुरली मनोहर प्रसाद सिंहआधार प्रकाशन, हरियाणा2014500/-23.प्रतापनारायण मिश्र संचयिताओमप्रकाश सिंहशिल्पायन, दिल्ली2014350/-विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकें24.द्विज देव ग्रंथावलीविद्यानिवास मिश्रप्रभात प्रकाशन, दिल्ली2000200/-25.द फर्स्ट पब्लिश एन्थोलॉजी ऑफ हिंदी पोइट्सइमरे बंगारेनबो प्रकाशन2000225/-26.कविता का शुक्लपक्षबच्चन सिंह/अवधेश प्रधानराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2001325/-27.पंत सहचरअशोक वाजपेयी/अपूर्वानंदवाणी प्रकाशन, दिल्ली2001395/-28.राकेश समग्रनंदकिशोर नवलवाणी प्रकाशन, दिल्ली2001395/-29.अँधेरे मेंकृष्ण बलदेव वैदरेनबो प्रकाशन2001150/-30.समक्षआलोक राय/मुश्ताक अलीहंस प्रकाशन2002375/-31.हिंदी की जनपदीय कविताविद्यानिवास मिश्रलोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद2002600/-32.कवि नायक अज्ञेयइला डालमिया कोइरालाप्रभात प्रकाशन, दिल्ली2002100/-33.छंद छंद पर कुमकुमवागीश शुक्लप्रभात प्रकाशन, दिल्ली2002300/-34.स्वच्छंदडॉ. प्रभात रंजनराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2002175/-35.अन्त: करण का आयतनअशोक वाजपेयीवाणी प्रकाशन, दिल्ली2003395/-36.स्मृति, मति और प्रज्ञा
धर्मपाल से उदयन वाजपेयी की बातचीतउदयन वाजपेयीवाणी प्रकाशन, दिल्ली2003125/-37.सूची पत्रकतादेउष रुज़ेविचपूर्वोदया प्रकाशन, दिल्ली2003100/-38.पूज्य पिता के सहज सत्य परध्रुव शुक्लवाग्देवी प्रकाशन, बीकानेर200390/-39.उर्दू साहित्य का देवनागरी में लिपिकरणवागीश शुक्लवाणी प्रकाशन, दिल्ली2003195/-40.अन्तर्लोकप्रो. नंदकिशोर आचार्यराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2003250/-41.हिंदी साहित्यशास्त्रनंदकिशोर नवलवाणी प्रकाशन, दिल्ली2003300/-42.हिंदी साहित्य का मौखिक इतिहास (चार खण्ड)नीलाभम.गां.अं.हि.वि., वर्धा20041000/-43.मीराँ संचयननंदचतुर्वेदीवाणी प्रकाशन, दिल्ली2006175/-44.तमिल शैव सन्त सुन्दरम्डॉ. एन. सुंदरम्
रामानुज अस्थानाम.गां.अं.हि.वि., वर्धा2007400/-45.आठवॉ विश्व हिंदी सम्मेलनप्रो. जी. गोपीनाथनम.गां.अं.हि.वि., वर्धा2007300/-46.निर्मल विमर्शप्रो. जी. गोपीनाथन
रामानुज अस्थानाम.गा.अं.हि.वि., वर्धा2007200/-47.तुलनात्मक साहित्य विश्वकोशप्रो. जी. गोपीनाथनम.गां.अं.हि.वि., वर्धा20081700/-48.विश्वभाषा हिंदी की अस्मिताप्रो. जी. गोपीनाथनम.गां.अं.हि.वि., वर्धा200860/-49.पुस्तक और मैंप्रो. जी. गोपीनाथनम.गां.अं.हि.वि., वर्धा200860/-50.हिंदी विमर्शडॉ. डी. एन. प्रसादम.गां.अं.हि.वि., वर्धा2008110/-51.स्त्री विमर्श: भारतीय परिपेक्ष्यके.एम. मालतीवाणी प्रकाशन, दिल्ली2010300/-52.वाल्ट व्हिटमन: घास की पत्तियां संचयनचंद्रबली सिंहवाणी प्रकाशन, दिल्ली2011350/-53.केदार शेष अशेषनरेन्द्र पुण्डरीकअनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद2011500/-54.एमिलि डिकिन्सन की कविताएं संचयनचंद्रबली सिंहवाणी प्रकाशन, दिल्ली2011550/-55.कर्नाटक के शरणों के वचनटी.जी. प्रभाशंकर प्रेमीस्वराज प्रकाशन, दिल्ली2011350/-56.प्रेमचंद की शेष रचनाएंडॉ. प्रदीप जैनराजकमल प्रकाशन, दिल्ली2012450/-57.बीसवीं शदी का इतिहास तथा अन्य कविताएंवी.के. हरिहरन उण्णित्तानसाहित्य भंडार, इलाहाबाद2012200/-58.हिंदी देवनागरी लिपि और यूनिकोडजगदीप सिंह दाँगीम.गा.अं.हि.वि., वर्धा201220/-59.भारतीय डास्पोरा: विविधि आयाम..राजकमल प्रकाशन2013350/-60.वर्धा हिंदी शब्दकोशराम प्रकाश सक्सेनाभारतीय ज्ञानपीठ20131000/-61हिंदी समाज विज्ञान विश्वकोश (छ: खंड)अभय कुमार दुबेराजकमल प्रकाशन20136000/-.62.गांधी चिंतनडॉ. नृपेन्द्र प्रसाद मोदीनयी किताब, दिल्ली2014250/-
छवि संग्रह
विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पोस्टर, सी.डी. एवं छवि संग्रह1.पोस्टरकवि सुमित्रानंदन पंत पर पोस्टरम.गा.अं.हि.वि., वर्धा.....15/-2.कविता सती सीडी36 कवियों द्वारा कविता-पाठ का वीडियों सी.डीम.गा.अं.हि.वि., वर्धा......1500/-3.निर्मल वर्मा छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-4.कुँवर नारायण छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-5.कृष्णा सोबती छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-6.भीष्म साहनी छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-7.विष्णु प्रभाकर छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-8.नेमिचन्द्र जैन छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-9.मनोहर श्याम जोशी छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-10नामवर सिंह छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-11.केदारनाथ सिंह छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-12.त्रिलोचन छवि संग्रह..म.गा.अं.हि.वि., वर्धा2003175/-
स्थापना
शान्ति, अहिंसा, सत्याग्रह, खादी, चरखा, स्वराज और जनता के हित के लिये आत्मबल का सन्देश देने वाले महात्मा गान्धी हिन्दी के भी उतने ही बड़े हिमायती थे। वे मानते थे कि आजादी की लड़ाई में हिन्दी का उपयोग एक निर्णायक हथियार के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की स्थापना की थी। इन दोनों संस्थाओं ने अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इन्हीं में से एक राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के प्रयासों से 1975 में नागपुर में हुए पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन में स्वीकृत एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के अनुरूप 1997 में भारत की संसद में पारित एक विशेष अधिनियम के तहत वर्धा में अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही भारतेन्दु की एक अधूरी आकांक्षा भी पूरी हुई। भारतेन्दु की संचित अभिलाषा थी - 'अपने उद्योग से मैं एक शुद्ध हिन्दी यूनिवर्सिटी स्थापित करना।' गान्धी जी द्वारा हिन्दी के संवर्धन के लिये किये गये कार्यों को देखते हुए उन्हीं के नाम पर भारत के बीचों-बीच स्थित वर्धा में पाँच टीलों पर यह अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना।
उद्देश्य
हिन्दी भाषा और साहित्य का संवर्धन और विकास करना और उस प्रयोजन के लिए विद्या की सुसंगत शाखाओं में शिक्षण और अनुसंधान की सुविधाएँ प्रदान करना;
हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में तुलनात्मक अध्ययन और अनुसंधान के सक्रिय अनुसरण के लिये व्यवस्था करना;
देश और विदेश में सुसंगत सूचना के विकास और प्रसारण के लिये सुविधाएँ प्रदान करना;
विदेशों में हिन्दी में अभिरुचि रखने वाले हिन्दी विद्वानों और समूहों तक पहुँचना और विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिये उन्हें सहबद्ध करना ;
दूर शिक्षा पद्धति के माध्यम से हिन्दी को लोकप्रिय बनाना।
विश्वविद्यालय की परिकल्पना शिक्षा की एक वैकल्पिक संस्था के रूप में की गयी। यह सतत विचार प्रक्रिया का परिणाम है जिसमें अपने उद्देश्यों को पाने के लिय् शैक्षणिक तकनीकों में निरन्तर नवीनीकरण एवं मूल्यानुरूप नीतियों के लिये अनवरत प्रयास करना शामिल है। यह विश्वविद्यालय अपने ज्ञानात्मक आधारों में वैश्विक एवं अपनी संरचना में अन्तरराष्ट्रीय है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास होगा कि -
वह विभिन्न ज्ञानानुशासनों में अद्यतन मौलिक सृजन तथा विश्व की अन्य भाषाओं में विद्यमान ज्ञान सम्पदा का अनुवाद हिन्दी भाषा में कर सके,
समस्त विश्व में फैले हुए भारतीय मूल के व्यक्तियों तथा विदेशी हिन्दी अध्येताओं / प्रेमियों के लिए एक सम्पर्क केन्द्र का कार्य कर सके,
समस्त विश्व में हिन्दी भाषा से सम्बन्धित अध्ययन/शोध/अनुसंधान आदि का व्यापक डाटाबेस तैयार करे जिससे हिन्दी भाषा से सम्बन्धित जानकारी सरलता से व्यापक जन तक पहुँच सके,
हिन्दी की बेहतरीन रचनाओं को विश्व की अन्य समृद्ध भाषाओं - फ्रेंच, स्पेनिश, चीनी, अरबी इत्यादि - में अनुवाद करे।
दृष्टिकोण
राष्ट्रीय नेताओं एवं हिन्दी प्रेमियों की यह एक उत्कट आकांक्षा रही है कि हिन्दी भारतीयों की भावनाओं एवं विचारों की अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर अपना समुचित स्थान ग्रहण करे। दूसरी ओर उनकी यह सोच भी थी कि न केवल विदेशों में अपितु समूचे विश्व में फैले हुए भारतीय मूल के व्यक्तियों के बीच भाषायी आदान-प्रदान के समन्वय हेतु हिन्दी का एक अन्तर्राष्ट्रीय सचिवालय स्थापित किया जाए। इसके अतिरिक्त उनकी यह भी परिकल्पना थी कि अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिन्दी की सम्पूर्ण सम्भावनाओं के विकास और संवर्धन के लिये एक केन्द्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाये।
ध्येय
क्षेत्रीय भाषा, राष्ट्रभाषा और अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिन्दी का संवर्धन और विकास
कार्य लक्ष्य
हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाना
अप्रतिम वैकल्पिक भाषा (जनसंचार/व्यवसाय, प्रबन्धन, विज्ञान व प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा और प्रशासन में अपनी भूमिका के साथ)
राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी संगठनों में सम्पर्क-सूत्र की भूमिका के निर्वाह के लिये नेटवर्क संयोजन
भारतीय और अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी भाषाओं के साथ नेटवर्क संयोजन
भारतीय संस्कृति की संवाहिका के रूप में हिन्दी
हिन्दी द्वारे-द्वारे
हिन्दी के एग्रेगेटर (संकलक) का निर्माण)
अधिनियम
महात्मा गान्धी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1996-1997 का क्रमांक 3
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय
श्रेणी:भारत के विश्वविद्यालय
श्रेणी:वर्धा
श्रेणी:विशेषज्ञता विश्वविद्यालय
श्रेणी:हिन्दी विश्वविद्यालय
श्रेणी:महात्मा गांधी को समर्पित स्मारक