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वाचन
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right|thumb|300px|लाओस के एक गाँव में बच्चों को सस्वर पाठ कराती एक संस्था के स्वयंसेवक । सस्वर पाठ कराना, साक्षरता बढाने का एक सफल तरीका है।
किसी पाठ को या पुस्तक के किसी भाग को सस्वर अथवा मौनरूप से पढ़ना वाचन या पठन (Reading) कहलाता है। दूसरे शब्दों में, किसी भाषा में लिखित सामग्री को पढ़ना और समझना ही वाचन है। वाचन एक जटिल संज्ञानात्मक प्रक्रिया (Cognitive process) है जिसमें 'संकेतों' का प्रसंस्करण करते हुए उनसे 'अर्थग्रहण' किया जाता है। वस्तुतः यह 'भाषा प्रसंस्करण' का एक रूप है। इस प्रक्रिया में कोई कितना सफल है, इसका मापन ही पठनबोध (reading comprehension) कहलाता है।
वाचन के प्रकार
'भाषा' शब्द से ही ज्ञात होता है कि भाषा का मूल रूप उच्चरित रूप है। इसका दृष्टिकोण प्रतीक लिपिबद्ध होता है। मुद्रित रूप, लिपिबद्ध रूप का प्रतिनिधि है। जब हम बच्चे को पढ़ाना आरम्भ करते हैं तो अक्षरों के प्रत्यय हमारे मस्तिष्क के कक्ष भाग में क्रमबद्ध होकर एक तस्वीर बनाते हैं, और हम उसे उच्चरित करते हैं। यह क्रिया जिसमें शब्दों के साथ अर्थ ध्वनि भी निहित है, वाचन कहलाती है।
वाचन को मूलतः दो भागों में विभक्त कर सकते हैं।
(१) सस्वर वाचन
(२) मौन वाचन
स्वर सहित पढ़ते हुए अर्थ ग्रहण करने को सस्वर वाचन कहा जाता है। यह वाचन की प्रारम्भिक अवस्था होती है। वर्णमाला के लिपिबद्ध वर्णों की पहचान सस्वर वाचन के द्वारा ही करायी जाती है।
लिखित सामग्री को बिना आवाज निकाले पढ़ना मौन वाचन कहलाता है। मौन वाचन में वाचक के होठ बंद रहते हैं।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
शिक्षण विधियाँ
बाहरी कड़ियाँ
वाचन के प्रकार
श्रेणी:शिक्षा