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मुकद्दीमा
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मुकद्दीमा مقدّمة ابن خلدون La Muqaddima d'Ibn Khaldoun.jpg इब्न खल्दून उत्तर अफ्रीका (वर्तमान ट्यूनीशिया/अल्जीरिया) अरबी इतिहासलेखन, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, जनसांख्यिकी ऐतिहासिक पूर्वपीठिका / दर्शन 1377 ईस्वी
मुकद्दीमा (مقدّمة; अंग्रेज़ी: Muqaddimah), जिसे अक्सर इब्न खल्दून का मुकद्दीमा या प्रोलेगोमेना भी कहा जाता है, 1377 ईस्वी में लिखी गई एक महान ऐतिहासिक और दार्शनिक कृति है। इसकी रचना प्रसिद्ध अरब इतिहासकार, दार्शनिक और समाजशास्त्री इब्न खल्दून ने की थी। मूल रूप से इस पुस्तक को उनके विशाल विश्व इतिहास के ग्रंथ किताब अल-इबार की 'प्रस्तावना' या 'पूर्वपीठिका' के रूप में लिखा गया था। हालाँकि, समय के साथ 'मुकद्दीमा' अपने आप में एक स्वतंत्र और कालजयी कृति बन गई। आधुनिक विद्वान इस पुस्तक को समाजशास्त्र, जनसांख्यिकी, इतिहासलेखन और अर्थशास्त्र के सबसे प्रारंभिक और आधारभूत ग्रंथों में से एक मानते हैं।Age Globalization: Meaning and Metaphors
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उद्देश्य
इब्न खल्दून ने 'मुकद्दीमा' की रचना उस समय की जब वे राजनीतिक उथल-पुथल से दूर अल्जीरिया के कलात इब्न सलामा नामक एक किले में एकांतवास कर रहे थे। उनका मुख्य उद्देश्य केवल राजाओं और युद्धों का विवरण देना नहीं था, बल्कि उन छिपे हुए कारणों और सामाजिक नियमों की खोज करना था जो किसी सभ्यता के उदय और पतन को निर्धारित करते हैं। इब्न खल्दून ने इतिहास को मात्र कथाओं के संग्रह के बजाय एक 'विज्ञान' के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया, जहाँ घटनाओं का तार्किक और कारण-प्रभाव विश्लेषण किया जा सके।Mahdi Muhsin Ibn Khaldun's Philosophy of History: A Study in the Philosophic Foundation of the Science of Culture Routledge 2015 978-1138804968 63-65Rediscovering the Islamic Classics: How Editors and Print Culture Transformed an Intellectual Tradition
'असबिय्याह' (सामाजिक एकजुटता) का सिद्धांत
इस पुस्तक की सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवधारणा असबिय्याह है, जिसे हिंदी में 'सामाजिक एकजुटता', 'सामुदायिक भावना' या 'समूह चेतना' कहा जा सकता है।
इब्न खल्दून के अनुसार, मानव समाज का विकास और साम्राज्यों का निर्माण इसी 'असबिय्याह' पर निर्भर करता है। यह भावना खानाबदोश या कबीलाई समाजों में सबसे अधिक मजबूत होती है, क्योंकि उन्हें कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए एक-दूसरे के सहयोग की आवश्यकता होती है। इसी मजबूत एकजुटता के बल पर खानाबदोश कबीले अक्सर शहरी और विलासी सभ्यताओं पर विजय प्राप्त कर लेते हैं और नए राजवंश की स्थापना करते हैं।Gellner Ernest Cohesion and Identity: The Maghreb from Ibn Khaldun to Emile Durkheim Government and Opposition 10 2 1975 203–218"Islamic philosophy and the globalization of science: Ahmed Cevdet's translation of the sixth chapter of Ibn Khaldun's Muqaddimah"
सभ्यताओं का चक्रीय पतन
इब्न खल्दून ने सभ्यताओं के जीवन-चक्र का एक स्पष्ट मॉडल प्रस्तुत किया। वे तर्क देते हैं कि जब कोई नया राजवंश सत्ता में आता है, तो कुछ पीढ़ियों के बाद शहर की विलासिता, आराम और भ्रष्टाचार के कारण उनकी मूल 'असबिय्याह' (एकजुटता) कमज़ोर पड़ने लगती है। शासक जनता पर भारी कर लगाने लगते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है। अंततः, कोई नया और मजबूत 'असबिय्याह' वाला बाहरी कबीला उन पर हमला करता है और सत्ता छीन लेता है। इस प्रकार सभ्यताओं का यह चक्रीय पहिया घूमता रहता है।Weiss Dieter Ibn Khaldun on Economic Transformation International Journal of Middle East Studies 1995 27 1 29-35
अर्थशास्त्र पर विचार
मुकद्दीमा में अर्थशास्त्र के कई ऐसे सिद्धांतों की व्याख्या की गई है, जिन्हें सदियों बाद एडम स्मिथ और जॉन मेनार्ड कीन्स जैसे पश्चिमी विचारकों ने लोकप्रिय बनाया। इब्न खल्दून ने 'श्रम विभाजन', मूल्य निर्धारण, और संपत्ति के अधिकारों पर विस्तार से लिखा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर की दरें शुरुआत में कम होनी चाहिए ताकि व्यापार को बढ़ावा मिले; यदि कर बहुत अधिक बढ़ा दिए जाएँ, तो सरकारी राजस्व वास्तव में कम हो जाता है (यह अवधारणा आज 'लॉफ़र कर्व' के नाम से जानी जाती है)।
ऐतिहासिक महत्व
ब्रिटिश इतिहासकार अर्नोल्ड जे. टॉयन्बी ने 'मुकद्दीमा' की प्रशंसा करते हुए लिखा था कि यह "इतिहास के दर्शन पर लिखा गया एक ऐसा काम है, जो किसी भी समय या स्थान पर किसी भी दिमाग द्वारा बनाए गए काम में यकीनन सबसे महान है।" आज भी यह ग्रंथ इस्लामी स्वर्ण युग की बौद्धिक क्षमता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
इब्न खल्दून का मुकद्दीमा
श्रेणी:अरबी साहित्य