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बहुभाषिकता
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बहुभाषिकता (Multilingualism) का अर्थ है एक व्यक्ति या लोगों के समूह द्वारा एक से अधिक भाषाओं का उपयोग करना। बहुभाषी का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जो दो या अधिक भाषाओं का प्रयोग करता है। विश्व में बहुभाषी लोगों की संख्या एकभाषियों की तुलना में बहुत अधिक है। विद्वानों का मत है कि द्विभाषिकता किसी भी व्यक्ति के ज्ञान एवं व्यक्तित्व के विकास के लिये बहुत उपयोगी है।
जब भाषाएँ केवल दो होती हैं, तो इसे सामान्यतः द्विभाषिकता (Bilingualism) कहा जाता है। यह माना जाता है कि दुनिया की जनसंख्या में बहुभाषी वक्ताओं की संख्या एकभाषी वक्ताओं से अधिक है। सभी यूरोपियों में से आधे से अधिक लोग दावा करते हैं कि वे अपनी मातृभाषा के अलावा कम से कम एक और भाषा बोल सकते हैं, लेकिन बहुत से लोग केवल एक ही भाषा में पढ़ते और लिखते हैं। व्यापार, वैश्वीकरण और सांस्कृतिक खुलेपन में भाग लेने के इच्छुक लोगों के लिए बहुभाषी होना लाभदायक है। इंटरनेट द्वारा उपलब्ध जानकारी तक आसान पहुँच के कारण लोगों का कई भाषाओं से संपर्क पहले की तुलना में अधिक संभव हो गया है। जो लोग कई भाषाएँ बोलते हैं उन्हें बहुभाषी (polyglots) कहा जाता है http://www.cal.org/content/download/1803/19986/file/AGlobalPerspectiveonBilingualism.pdf A Global Perspective on Bilingualism and Bilingual Education Tucker G. Richard August 1999 https://web.archive.org/web/20191215235020/http://www.cal.org/content/download/1803/19986/file/AGlobalPerspectiveonBilingualism.pdf 12 अप्रैल 2026 15 दिसंबर 2019 https://web.archive.org/web/20191215235020/http://www.cal.org/content/download/1803/19986/file/AGlobalPerspectiveonBilingualism.pdf bot: unknown
thumb|वेल्स के लघु वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे द्विभाषिकता स्कूलों में विद्यार्थियों के ग्रेड को बढ़ाती है। हिंदी उपशीर्षक।
हाॅगेन के अनुसार, ‘‘दो भाषाओं के ज्ञान की स्थिति द्विभाषिक है।’’ वैसे तो बहुत सी भाषाओं को जानने वाले को बहुभाषिक कहते हैं परंतु एक से अधिक भाषा (केवल दो) जानने वाले को द्विभाषिक के साथ-साथ बहुभाषिक भी कहते हैं।
ब्लूम फील्ड के अनुसार – ‘‘बहुभाषिकता की स्थिति तब पैदा होती है जब व्यक्ति किसी ऐसे समाज में रहता है जो उसकी मातृभाषा से अलग भाषा बोलता है और उस समाज में रहते हुए वह उस अन्य भाषा में इतना पारंगत हो जाता है कि उस भाषा का प्रयोग मातृभाषा की तरह कर सकता है।’’
कुछ विद्वानों ने इसे इस रूप में प्रस्तुत किया कि द्विभाषिकता या बहुभाषिकता व्यक्ति के बचपन से ही दो या बहुत भाषाएँ एक साथ सीखकर उसका समान रूप और सहज प्रभाव से प्रयोग करने की स्थिति को कहते हैं। परन्तु भाषावैज्ञानिक इसे अस्वीकार करते हुए तर्क देते हैं कि दो भाषाओं में मातृभाषा जैसी क्षमता एक ऐसा आदर्श है जिसे प्राप्त करना बहुत कठिन है। इस प्रकार एक से अधिक भाषाओं की जानकारी एवं प्रयोग बहुभाषिकता की स्थिति है।
अंग्रेज़ी भाषा में “multilingual” शब्द का पहला दर्ज उपयोग 1830 के दशक में हुआ था। बहुभाषिकता की घटना उतनी ही पुरानी है जितनी विभिन्न भाषाओं का अस्तित्व।https://www.oed.com/dictionary/multilingual_adj?tab=factsheet&tl=true#35428304 Multilingual,adj and meaning, etymology and more https://www.oed.com/dictionary/multilingual_adj?tab=factsheet&tl=true#35428304
आज किसी क्षेत्र में बहुभाषिकता के प्रमाण कई रूपों में मिलते हैं, जैसे द्विभाषी संकेत-पट्ट (bilingual signs), जो एक ही संदेश को एक से अधिक भाषाओं में प्रस्तुत करते हैं। ऐतिहासिक उदाहरणों में पाठ्य स्रोतों में ग्लॉस (glosses) भी शामिल हैं, जो मूल पाठ से अलग भाषा में टिप्पणियाँ प्रदान करते हैं; मैकरोनिक (macaronic) ग्रंथ, जिनमें दो या अधिक भाषाओं को मिलाकर लिखा जाता है और यह अपेक्षा की जाती है कि पाठक दोनों भाषाएँ समझता होगा; पवित्र और बोलचाल की अलग-अलग भाषाओं का अस्तित्व (जैसे चर्च लैटिन बनाम सामान्य लैटिन के रूप, और हिब्रू बनाम अरामाइक तथा अन्य यहूदी भाषाएँ); तथा भाषाई उधार (linguistic borrowings) और भाषा-संपर्क के अन्य परिणामों की अधिकता।https://onlinelibrary.wiley.com/doi/book/10.1002/9781405198431 History of Multilingualism Chappelle Carol 30 january 2013 https://onlinelibrary.wiley.com/doi/book/10.1002/9781405198431
परिभाषा
भाषा-प्रवाह (language fluency) की परिभाषा की तरह ही बहस का विषय है। भाषाई निरंतरता (linguistic continuum) के एक छोर पर बहुभाषिकता को एक से अधिक भाषाओं में पूर्ण दक्षता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इस स्थिति में वक्ता के पास उन भाषाओं का ज्ञान और नियंत्रण लगभग किसी मूल वक्ता (native speaker) के समान होता है।इसके विपरीत, दूसरे छोर पर ऐसे लोग आते हैं जो किसी दूसरी भाषा में केवल इतने वाक्य या अभिव्यक्तियाँ जानते हैं कि वे पर्यटक के रूप में सामान्य काम चला सकें। 1992 से विवियन कुक (Vivian Cook) का तर्क है कि अधिकांश बहुभाषी वक्ता इन न्यूनतम और अधिकतम परिभाषाओं के बीच कहीं स्थित होते हैं। कुक ऐसे लोगों को मल्टी-कम्पिटेंट (multi-competent) कहते हैं।https://www.researchgate.net/publication/305368839 Perceived effectiveness of language acquisition in the process of Multilingual upbringing by parents of different nationalities Paradowski and Bator Michal B. And Alessandra Research gate
इसके अतिरिक्त, यह भी तय नहीं है कि किसी अलग भाषा की पहचान कैसे की जाए। Second Language Learning and Language Teaching https://archive.org/details/secondlanguagele0000cook_f0s0 Cook Vivian 2008उदाहरण के लिए, विद्वानों के बीच अक्सर इस बात पर मतभेद होता है कि स्कॉट्स (Scots) एक स्वतंत्र भाषा है या केवल अंग्रेज़ी की एक बोली। इसी तरह, किसी भाषा की पहचान समय के साथ बदल भी सकती है, और कई बार इसके पीछे पूरी तरह राजनीतिक कारण होते हैं।उदाहरण के तौर पर, सर्बो-क्रोएशियन (Serbo-Croatian) भाषा को पूर्वी हर्जेगोविनियन बोली के आधार पर एक मानक भाषा के रूप में बनाया गया था, ताकि यह कई दक्षिण स्लाविक बोलियों के लिए एक साझा भाषा का काम कर सके। लेकिन यूगोस्लाविया के विघटन के बाद इसे अलग-अलग भाषाओं—सर्बियन, क्रोएशियन, बोस्नियन और मोंटेनेग्रिन—में विभाजित कर दिया गया। इसी प्रकार, रूसी ज़ारों के समय यूक्रेनी (Ukrainian) को रूसी भाषा की एक बोली बताकर उसकी स्वतंत्र पहचान को कम करके दिखाया गया, ताकि राष्ट्रीय भावना को हतोत्साहित किया जा सके। आज कई छोटे स्वतंत्र देशों में अंतरराष्ट्रीय संपर्क के कारण स्कूल के बच्चों को कई भाषाएँ सीखनी पड़ती हैं। उदाहरण के लिए, फिनलैंड में सभी बच्चों के लिए कम से कम तीन भाषाएँ सीखना अनिवार्य है: दो राष्ट्रीय भाषाएँ (फिनिश और स्वीडिश) तथा एक विदेशी भाषा (आमतौर पर अंग्रेज़ी)। इसके अतिरिक्त, कई फिनिश छात्र जर्मन, फ्रेंच या स्पेनिश जैसी अन्य भाषाएँ भी पढ़ते हैं।कुछ बड़े देशों में, जहाँ कई भाषाएँ बोली जाती हैं—जैसे भारत—स्कूल के बच्चों के लिए कई भाषाएँ सीखना सामान्य बात है, और यह अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि वे देश के किस क्षेत्र में रहते हैं।कई देशों में द्विभाषिकता अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कारण भी विकसित होती है। चूँकि अंग्रेज़ी एक वैश्विक संपर्क भाषा (lingua franca) बन चुकी है, इसलिए कई देशों में जहाँ केवल एक ही आधिकारिक घरेलू भाषा है, वहाँ भी बड़ी संख्या में लोग द्विभाषी बन जाते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से स्कैंडिनेविया और बेनेलक्स क्षेत्रों में देखी जाती है, साथ ही जर्मन भाषी क्षेत्रों में भी। अब यह प्रवृत्ति कुछ गैर-जर्मैनिक देशों में भी फैलने लगी है।https://en.wikipedia.org/wiki/Ems_Ukaz Ems ukaz April 2019 Wikipediahttp://foreign-language.org/ Writing With English As A Second Language 21 April 2015 Archived. Org. 12 अप्रैल 2026 21 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20150421235102/http://foreign-language.org/ deadhttps://www.thenewfederalist.eu/foreign-languages-in-finland-s-educational-system Foreign languages in Finland 's Educational System Korhonen Muusa 25 october 2006 12 अप्रैल 2026 6 अप्रैल 2023 https://web.archive.org/web/20230406192100/https://www.thenewfederalist.eu/foreign-languages-in-finland-s-educational-system bot: unknown
रिसेप्टर द्विभाषिकता
रिसेप्टिव द्विभाषी वे लोग होते हैं जो किसी दूसरी भाषा को समझ सकते हैं, लेकिन उसे बोल नहीं पाते या बोलने की उनकी क्षमता मनोवैज्ञानिक कारणों से बाधित होती है। रिसेप्टिव द्विभाषिकता अक्सर अमेरिका में रहने वाले वयस्क प्रवासियों में देखी जाती है, जो अंग्रेज़ी को अपनी मातृभाषा के रूप में नहीं बोलते, लेकिन उनके बच्चे अंग्रेज़ी को मातृभाषा की तरह बोलते हैं। ऐसा आमतौर पर इसलिए होता है क्योंकि उन बच्चों की शिक्षा अंग्रेज़ी में हुई होती है।Receptive Bilingual children 's use of language in interaction Nakamura Janice January 2019 https://www.researchgate.net/publication/349176664ऐसी स्थिति में प्रवासी माता-पिता अपनी मातृभाषा और अंग्रेज़ी दोनों समझ सकते हैं, लेकिन वे अपने बच्चों से केवल अपनी मातृभाषा में ही बात करते हैं। यदि उनके बच्चे भी रिसेप्टिव द्विभाषी हों लेकिन बोलने के स्तर पर केवल अंग्रेज़ी-एकभाषी हों, तो बातचीत के दौरान माता-पिता अपनी मातृभाषा बोलेंगे और बच्चे अंग्रेज़ी में जवाब देंगे।यदि बच्चे उत्पादक (productively) द्विभाषी हों, तो वे माता-पिता की मातृभाषा में, अंग्रेज़ी में, या दोनों भाषाओं के मिश्रण में उत्तर दे सकते हैं। वे भाषा का चुनाव बातचीत की सामग्री, संदर्भ, भावनात्मक तीव्रता, तथा इस बात पर निर्भर करते हुए बदल सकते हैं कि वहाँ किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति है या नहीं जो किसी एक भाषा को समझता हो।तीसरा विकल्प कोड-स्विचिंग (Code-switching) की घटना को दर्शाता है, जिसमें उत्पादक द्विभाषी व्यक्ति बातचीत के दौरान एक भाषा से दूसरी भाषा में बदलता रहता है।रिसेप्टिव द्विभाषी लोग, विशेषकर बच्चे, अक्सर जल्दी ही बोलने में प्रवाह (oral fluency) हासिल कर लेते हैं यदि वे ऐसे वातावरण में पर्याप्त समय बिताएँ जहाँ उन्हें उस भाषा को बोलने की आवश्यकता हो जिसे वे पहले केवल समझते थे।जब तक दोनों पीढ़ियाँ बोलने में पूर्ण प्रवाह हासिल नहीं कर लेतीं, तब तक द्विभाषिकता की सभी परिभाषाएँ पूरे परिवार को सही ढंग से वर्णित नहीं कर पातीं। फिर भी, परिवार की विभिन्न पीढ़ियों के बीच भाषाई अंतर आमतौर पर परिवार के कामकाज या आपसी संबंधों में बहुत कम या कोई बाधा नहीं पैदा करता।
किसी एक भाषा में किसी अन्य भाषा के वक्ता द्वारा प्रदर्शित रिसेप्टिव द्विभाषिकता, या उसी भाषा के अधिकांश वक्ताओं द्वारा प्रदर्शित स्थिति, परस्पर बोधगम्यता (mutual intelligibility) के समान नहीं होती। परस्पर बोधगम्यता दो भाषाओं का गुण है, जो उनके शब्दावली और व्याकरण में उच्च समानता के कारण उत्पन्न होती है (जैसे नॉर्वेजियन और स्वीडिश)। इसके विपरीत, रिसेप्टिव द्विभाषिकता किसी व्यक्ति या व्यक्तियों का गुण है और यह उनके जीवन-अनुभव, पारिवारिक परिवेश, शिक्षा और सांस्कृतिक वातावरण में भाषाओं की उपस्थिति जैसे व्यक्तिगत या सामूहिक कारकों से निर्धारित होती है।http://www.ethnologue.com/show_language.asp?code=spa Weitzman Elaine 18 April 2010 https://web.archive.org/web/20100418134038/http://www.ethnologue.com/show_language.asp?code=spa 12 अप्रैल 2026 18 अप्रैल 2010 https://web.archive.org/web/20100418134038/http://www.ethnologue.com/show_language.asp?code=spa bot: unknown
अधिग्रहण, बहुभाषिकता के क्षेत्र में
भाषाविद् नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky) का एक दृष्टिकोण यह है कि मनुष्यों में एक विशेष तंत्र होता है जिसे वे भाषा अर्जन उपकरण (Language Acquisition Device) कहते हैं। यह एक ऐसी प्रणाली है जो सीखने वाले को अपने आसपास के वक्ताओं द्वारा प्रयोग की जाने वाली भाषा के नियमों और अन्य विशेषताओं को सही ढंग से पुनः निर्मित करने में सक्षम बनाती है। चॉम्स्की के अनुसार यह तंत्र समय के साथ कमजोर हो जाता है और सामान्यतः किशोरावस्था (puberty) तक सक्रिय नहीं रहता। इसी कारण वे यह समझाते हैं कि कई किशोरों और वयस्कों को दूसरी भाषा (L2) के कुछ पहलुओं को सीखने में अपेक्षाकृत कम सफलता मिलती है।Bilingualism and Second - Language Learning Santrock Jhon W. 2008यदि भाषा सीखना केवल एक संज्ञानात्मक (cognitive) प्रक्रिया है, जैसा कि स्टीफन क्रैशन (Stephen Krashen) के नेतृत्व वाले विचार-समूह का मानना है, तो भाषा सीखने के इन दोनों प्रकारों के बीच केवल सापेक्ष (relative) अंतर होगा, न कि पूर्णतः भिन्न (categorical) अंतर।
रॉड एलिस (Rod Ellis) के अनुसार किए गए शोध बताते हैं कि जितनी जल्दी बच्चे दूसरी भाषा सीखना शुरू करते हैं, उच्चारण के मामले में वे उतने ही बेहतर होते हैं। इसी कारण यूरोप के स्कूलों में छात्रों को शुरुआती स्तर से ही दूसरी भाषा की कक्षाएँ दी जाती हैं, क्योंकि वहाँ कई पड़ोसी देशों की भाषाएँ अलग-अलग हैं और उनके बीच संपर्क अधिक है। आज अधिकांश यूरोपीय छात्र कम से कम दो विदेशी भाषाएँ सीखते हैं, और इस प्रक्रिया को यूरोपीय संघ (European Union) भी प्रोत्साहित करता है।http://www.euractiv.com/culture/eu-students-learn-foreign-languages-study/article-185818 Most EU students learn two foreign languages: Studies https://web.archive.org/web/20120113012757/http://www.euractiv.com/culture/eu-students-learn-foreign-languages-study/article-185818 12 अप्रैल 2026 13 जनवरी 2012 https://web.archive.org/web/20120113012757/http://www.euractiv.com/culture/eu-students-learn-foreign-languages-study/article-185818 bot: unknownएन फाथमैन (Ann Fathman) के शोध The Relationship Between Age and Second Language Productive Ability के आधार पर यह पाया गया कि उम्र के अंतर के कारण अंग्रेज़ी की रूपविज्ञान (morphology), वाक्यविन्यास (syntax) और ध्वनिविज्ञान (phonology) को सीखने की गति में अंतर होता है। लेकिन दूसरी भाषा सीखने में भाषा-अधिग्रहण का क्रम उम्र के साथ नहीं बदलता।दूसरी भाषा की कक्षा में छात्रों को अक्सर लक्ष्य भाषा (target language) में सोचने में कठिनाई होती है, क्योंकि वे अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक पैटर्न से प्रभावित होते हैं। रॉबर्ट बी. कैपलन (Robert B. Kaplan) के अनुसार दूसरी भाषा की कक्षाओं में विदेशी छात्रों के लेख कभी-कभी विषय से भटके हुए लग सकते हैं, क्योंकि वे ऐसी अलंकारिक शैली (rhetoric) और विचार-क्रम का उपयोग करते हैं जो मूल भाषा के पाठकों की अपेक्षाओं से अलग होता है।कई विदेशी छात्र भले ही वाक्य संरचना (syntactic structures) में दक्ष हो जाएँ, फिर भी वे उचित निबंध, शोधपत्र, थीसिस या शोध-प्रबंध लिखने में कठिनाई अनुभव कर सकते हैं। कैपलन ने बताया कि दूसरी भाषा सीखते समय दो महत्वपूर्ण अवधारणाएँ प्रभाव डालती हैं—तर्क (logic) और अलंकारिक शैली (rhetoric)। यहाँ तर्क का अर्थ दार्शनिक तर्क नहीं, बल्कि सामान्य सोच और अभिव्यक्ति की शैली से है, जो किसी संस्कृति से विकसित होती है और सार्वभौमिक नहीं होती। इसी तरह अलंकारिक शैली भी सार्वभौमिक नहीं होती; यह संस्कृति के अनुसार और समय के साथ बदलती रहती है।भाषा शिक्षक अलग-अलग भाषाओं के उच्चारण या व्याकरणिक संरचनाओं में अंतर का अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन वे अक्सर इस बात को लेकर कम स्पष्ट होते हैं कि विभिन्न संस्कृतियों में भाषा का उपयोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किस प्रकार किया जाता है, विशेषकर लेखन में।जो लोग कई भाषाएँ सीखते हैं, वे कभी-कभी सकारात्मक स्थानांतरण (positive transfer) का अनुभव करते हैं। इसका अर्थ है कि यदि नई भाषा का व्याकरण या शब्दावली पहले से सीखी गई भाषाओं से मिलती-जुलती हो, तो नई भाषा सीखना आसान हो जाता है। इसके विपरीत, छात्रों को नकारात्मक स्थानांतरण (negative transfer) भी हो सकता है, जिसमें पहले सीखी गई भाषा नई भाषा सीखने में बाधा उत्पन्न करती है।ट्रांसलैंग्वेजिंग (translanguaging) भी नई भाषाओं के अधिग्रहण में सहायता करता है। यह एक भाषा से दूसरी भाषा के बीच संबंध स्थापित करके नई भाषाओं के विकास में मदद करता है।
विभिन्न भाषा बोलने वालों के बीच पारस्परिक संवाद
जब दो लोग मिलते हैं, तो उनके बीच एक प्रकार की बातचीत और समन्वय की प्रक्रिया शुरू होती है। यदि वे एक-दूसरे के साथ एकता (solidarity) और सहानुभूति व्यक्त करना चाहते हैं, तो वे अपने व्यवहार में समानताओं को खोजने की कोशिश करते हैं। लेकिन यदि वक्ता सामने वाले व्यक्ति से दूरी दिखाना चाहते हैं या उसे पसंद नहीं करते, तो वे अंतर को अधिक महत्व देते हैं। यह प्रक्रिया भाषा में भी दिखाई देती है, जैसा कि कम्युनिकेशन अकोमोडेशन थ्योरी (Communication Accommodation Theory) में बताया गया है।https://en.wikipedia.org/wiki/Shana_Poplack Shana Poplack Wikipediaकुछ बहुभाषी लोग कोड-स्विचिंग (code-switching) का उपयोग करते हैं, जिसमें वे अलग-अलग भाषाओं के बीच बदलते रहते हैं। कई मामलों में कोड-स्विचिंग वक्ताओं को एक से अधिक सांस्कृतिक समूहों या वातावरणों में भाग लेने की अनुमति देता है। यह एक रणनीति के रूप में भी काम कर सकता है, खासकर तब जब किसी भाषा में पर्याप्त दक्षता न हो। ऐसी रणनीतियाँ तब आम होती हैं जब किसी एक भाषा की शब्दावली कुछ विशेष क्षेत्रों में पर्याप्त विकसित न हो, या वक्ताओं ने कुछ शब्दावली क्षेत्रों में पर्याप्त दक्षता विकसित न की हो, जैसा कि अक्सर प्रवासी भाषाओं के मामले में होता है |कोड-स्विचिंग कई रूपों में दिखाई देता है। यदि वक्ता का दोनों भाषाओं के प्रति और कोड-स्विचिंग के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है, तो एक ही वाक्य के भीतर भी कई बार भाषा परिवर्तन देखा जा सकता है। लेकिन यदि वक्ता को कोड-स्विचिंग का उपयोग करने में संकोच हो, जैसे कि कम दक्षता के कारण, तो वह जानबूझकर या अनजाने में एक भाषा के तत्वों को दूसरी भाषा के तत्वों में बदलकर अपने प्रयास को छिपाने की कोशिश कर सकता है। इसे कैल्किंग (calquing) कहा जाता है। उदाहरण के लिए, फ्रेंच में सही शब्द chantage (ब्लैकमेल) है, लेकिन कुछ लोग इसके स्थान पर courrier noir (शाब्दिक अर्थ: काला पत्र) जैसा अनुवादित शब्द प्रयोग कर सकते हैं।
कभी-कभी पिजिन (pidgin) भाषाएँ भी विकसित हो जाती हैं। पिजिन दो या अधिक भाषाओं का मिश्रण होती है, जिसकी व्याकरणिक संरचना सरल होती है, लेकिन इसे मूल भाषाओं के वक्ता समझ सकते हैं। कुछ पिजिन आगे चलकर वास्तविक क्रियोल (creole) भाषाओं में विकसित हो जाती हैं, जैसे पापियामेंटो (Papiamento) कुरासाओ में या सिंग्लिश (Singlish) सिंगापुर में। अन्य पिजिन केवल स्लैंग या जार्गन के रूप में विकसित होती हैं, जैसे हेलसिंकी स्लैंग, जो अभी भी मानक फिनिश और स्वीडिश के साथ काफी हद तक समझी जा सकती है।https://en.wikipedia.org/wiki/S2CID_(identifier) 2 november 2015 Wikipediaकुछ मामलों में भाषाओं का एक-दूसरे पर लंबे समय तक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनमें इतना परिवर्तन हो सकता है कि एक नई, गैर-क्रियोल भाषा उत्पन्न हो जाती है। उदाहरण के लिए, कई भाषाविदों का मानना है कि ऑक्सितान (Occitan) और कैटलन (Catalan) भाषाएँ उस समय विकसित हुईं जब एक ही ऑक्सितानो-रोमांस भाषा बोलने वाली जनसंख्या फ्रांस और स्पेन के राजनीतिक प्रभाव क्षेत्रों में विभाजित हो गई। इसी तरह यिद्दिश (Yiddish) भाषा मध्य उच्च जर्मन, हिब्रू और स्लाविक भाषाओं के तत्वों का जटिल मिश्रण है।द्विभाषी संवाद कभी-कभी बिना भाषाओं को बदले या मिलाए भी हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में यह सामान्य है कि लोग एक ही बातचीत में अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से स्कैंडिनेविया में देखी जाती है। स्वीडिश, नॉर्वेजियन और डेनिश भाषाओं के अधिकांश वक्ता अपनी-अपनी भाषा बोलते हुए एक-दूसरे को समझ सकते हैं, हालांकि बहुत कम लोग दोनों भाषाएँ बोलते हैं। ऐसी परिस्थितियों में लोग अक्सर अपनी भाषा को थोड़ा समायोजित कर लेते हैं, ताकि ऐसे शब्दों से बचा जा सके जो दूसरी भाषा में नहीं पाए जाते या गलत समझे जा सकते हैं।अलग-अलग भाषाओं का उपयोग करते हुए बातचीत करने को आमतौर पर नॉन-कन्वर्जेंट डिस्कोर्स (non-convergent discourse) कहा जाता है, यह शब्द डच भाषाविद् राइट्ज़े जोंकमैन (Reitze Jonkman) द्वारा प्रस्तुत किया गया था। कुछ हद तक यह स्थिति डच और अफ्रीकांस भाषाओं के बीच भी देखी जाती है, हालांकि दोनों समुदायों के बीच दैनिक संपर्क कम होने के कारण यह कम आम है।एक और उदाहरण पूर्व चेकोस्लोवाकिया का है, जहाँ दो निकट संबंधी और पारस्परिक रूप से समझी जाने वाली भाषाएँ — चेक (Czech) और स्लोवाक (Slovak) — सामान्य रूप से उपयोग में थीं। अधिकांश चेक और स्लोवाक लोग दोनों भाषाओं को समझते थे, लेकिन बोलते समय वे केवल अपनी मातृभाषा का उपयोग करते थे। उदाहरण के लिए, चेकोस्लोवाकिया में टेलीविजन पर अक्सर दो लोगों को अलग-अलग भाषाएँ बोलते हुए बातचीत करते हुए देखा जा सकता था, और फिर भी वे एक-दूसरे को बिना किसी कठिनाई के समझ लेते थे। यह प्रकार की द्विभाषिकता आज भी मौजूद है, हालांकि चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद यह कुछ हद तक कम हो गई है।
बहुभाषिकता के लाभ
अधिक संवाद कौशल
जब कोई व्यक्ति एक से अधिक भाषाएं जानता है, तो वह विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक समूहों के लोगों के साथ आसानी से बातचीत कर सकता है। इससे सामाजिक , सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
1. विभिन्न भाषाई समूहों से संपर्क की क्षमता बढ़ती है।
2. सांस्कृतिक समझ और सहानुभूति बढ़ती है।
3.गलतफ़हमियो को कम करने की क्षमता
उच्च भाषाई क्षमता
इससे व्यक्ति भाषा की संरचना शब्दावली और अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों को बेहतर ढंग से समझ पाता है।
1. शब्दावली और अभिव्यक्ति में वृद्धि
2. भाषा सीखने के क्षमता में सुधार
3. व्याकरण और भाषा सरंचना की समझ
4. प्रभावशाली लेखन और बोलने की क्षमता
उत्कृष्ट प्रबंधकारी कार्य पद्धति
प्रबंधकारी कार्य पद्धति से तात्पर्य मस्तिष्क की उन क्षमता से है जो हमें योजना बनाना ,ध्यान केंद्रित करना ,निर्णय लेना, समस्या हल करना और कार्यों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना सिखाती है। कई भाषाओं का उपयोग करने से व्यक्ति की मस्तिष्क में इन क्षमताओं का विकास होता है
ध्यान नियंत्रण
समस्या समाधान क्षमता
निर्णय लेने की क्षमता
मानसिक लचीलापन
स्मृति और कार्य प्रबंधन
अपने परिवेश के अनुरूप ढलना
जब कोई व्यक्ति एक से अधिक भाषाएं जानता है तो वह अलग-अलग सामाजिक सांस्कृतिक और भाषाई परिस्थितियों में सहजता से समायोजित हो सकता है।
1. विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों में समायोजन
2. नई संस्कृति को समझने की क्षमता
3.परिस्थिति के अनुसार भाषा का चयन
4. प्रवास या नए स्थान में आसानी
5. आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता
अधिक करियर अवसर
वैश्वीकरण के युग में विभिन्न भाषाओं का ज्ञान कई क्षेत्रों में रोजगार और पेशावर और विकास के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है, जैसे-
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और रोजगार
अनुवाद और व्याख्या
शिक्षा और शोधके क्षेत्र में अवसर
पर्यटन
प्रशासन और कूटनीति
स्मृतिलोप के आरंभ में देर होना
कई अध्ययनों में देखा गया है कि जो लोग जीवन भर दो या अधिक भाषाओं का नियमित उपयोग करते हैं, उनके मस्तिष्क में संज्ञानात्मक आरक्षित क्षमता अधिक विकसित हो सकती है।
मस्तिष्ककी सक्रियता
संज्ञानात्मक आरक्षित क्षमता
ध्यान और स्मृति का अभ्यास
स्मृति में सुधार
जब कोई व्यक्ति एक से अधिक भाषाएं सीखता और उनका प्रयोग करता है तो उसकी मस्तिष्क को लगातार नहीं जानकारी को याद रखना और उपयोग करने का अभ्यास मिलता है। इससे स्मरण शक्ति मजबूत होती है।
शब्दों और नियमों को याद रखने कीकमता
मानसिक सक्रियता
कार्यशील स्मृति
कुशल बहुकार्यात्मकता
बहुभाषी व्यक्ति अक्सर एक भाषा से दूसरी भाषा में अपने विचार जल्दी बदल सकता है। यह क्षमता उसे एक साथ कई कार्यो को संभालने और अलग-अलग परिस्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करती है।
सीखने की क्षमता में वृद्धि
अतिरिक्त भाषायें सीखने की क्षमता बढ़ जाती है।
भारत के सन्दर्भ में बहुभाषिकता
भारत में बहुभाषिकता की स्थिति नयी नहीं है। अपने सांस्कृतिक, व्यापारिक एवं सामाजिक कारणों के फलस्वरूप यहाँ बहुभाषिकता बहुत पहले से मौजूद है। भारत की संस्कृति इतनी समृद्ध है कि लोग यहाँ कहते हैं, ‘‘कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बदले बानी।’’ तकनीकी के प्रभाव के कारण शिक्षा की व्यापकता, महानगरों के उदय एवं संचार माध्यमों का विकास हो रहा है जिस कारण अधिकाधिक व्यक्ति द्विभाषी या बहुभाषी होने की स्थिति को प्राप्त कर रहे हैं। भारत इन सबसे अछूता नहीं है। बहुभाषा-भाषी राष्ट्र होने के कारण यहाँ यह स्थिति पहले से ही थी परन्तु इन सबने इसके इस स्थिति को और समृद्ध किया है। भारतीय संविधान में कई भाषाओं को मान्यता दी है। परंतु वास्तविकता यह है कि देश में सैकड़ों भाषण और बोलियां जीवित हैं। यह विविधता भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है। एक सामान्य भारतीय व्यक्ति घर में अपनी मातृभाषा का उपयोग करता है , समाज में क्षेत्रीय भाषा बोलता है, और शिक्षा प्रशासन या व्यापक संपर्क के लिए हिंदी या अंग्रेजी का उपयोग कर सकता है। इस प्रकार भारतीय जीवन में भाषाएं अलग अलग भूमिकाएं निभाती हैं और एक दूसरे के साथ निरंतर संवाद करती रहती है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुभाषिकता को महत्व दिया जाता है। भारत की भाषा नीतियां इस बात को स्वीकार करती हैं कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा के साथ साथ अन्य भाषाओं का भी ज्ञान होना चाहिए। इससे न केवल भाषा ही क्षमता बढ़ती है बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और समाजों के प्रति समझ भी विकसित होती है।
भारतीय संदर्भ में बहुभाषिकता सामाजिक सह अस्तित्व और सांस्कृतिक विविधता की अभिव्यक्ति है। अनेक भाषाओं के बीच निरंतर संपर्क और संवाद भारतीय समाज को जीवंत बनातेहैं। यही बहुभाषिकता भारत को ऐसा देश बनती है जहां विभिन्न भाषाएं और संस्कृतियां एक साथ रहते हुए भी एक साझा सांस्कृतिक पहचान का निर्माण करती हैं।
बहुभाषिकता और अनुवाद
बहुभाषिकता आज के वैश्विक समाज की एक प्रमुख विशेषता है। पहले अनुवाद को मुख्यतः एक भाषा से दूसरी भाषा में संदेश के स्थानांतरण के रूप में देखा जाता था, जहां स्रोत भाषा, लक्ष्य भाषा और एकभाषिक पाठक की धारणा प्रमुख थी। लेकिन आधुनिक समाज में भाषाएं, संस्कृतियां और लोग स्वयं बहुभाषिक होते हैं। इसलिए बहुभाषिकता अनुवाद अध्ययन (Translation Studies) के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है।Multilingualism as a challenge for translation studies Meylaerts Reine Routledge 2013
अंग्रेज़ी भाषा विश्व स्तर पर अधिक व्यापक होती जा रही है, वैसे-वैसे अधिक लोग बहुभाषी बन रहे हैं और अनुवाद एक अत्यंत महत्वपूर्ण संचार गतिविधि के रूप में सामने आ रहा है। पहले अनुवाद को मूल पाठ की एक कमजोर या निम्न स्तर की प्रतिलिपि माना जाता था, लेकिन आज इसे एक ऐसी रचनात्मक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है जो किसी दूसरी भाषा में एक नया मूल पाठ (new original) तैयार करती है।Post - colonial Translation Basnett and Trivedi Susan and Harish Routledge 1999
भारत में अनुवाद पर वर्तमान चर्चा आम तौर पर यह नहीं मानती कि अनुवाद एक बहुभाषी सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य करता है, जहाँ लोग एक साथ कई भाषाओं में सक्रिय होते हैं। इसके बजाय अनुवाद को अक्सर ऐसे उपकरण के रूप में देखा जाता है जो बहुभाषी नागरिकों के बीच नहीं ,बल्कि एकभाषी नागरिकों के बीच संचार को संभव बनाता है, जो एक ही भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक स्थान साझा करते हैं।
स्वतंत्रता के बाद भारत में अनुवाद को एक महत्वपूर्ण “राष्ट्र-निर्माण” (nation-building) की प्रक्रिया के रूप में देखा गया। इसका उद्देश्य एक नए बहुभाषी और लोकतांत्रिक गणराज्य में नागरिकों की सहभागिता को बढ़ावा देना था। लेकिन कभी-कभी यह दृष्टिकोण कुछ हद तक आदर्शवादी (utopian) भी प्रतीत होता है, क्योंकि यह भाषा की स्थिति और शक्ति में मौजूद असमानताओं—जैसे वर्ग, जाति, लिंग और धर्म—को पूरी तरह ध्यान में नहीं रखता।
गणेश देवी के अनुसार "एकभाषी यूरोपीय संस्कृतियों के लिए अनुवाद की क्रिया के प्रति अधिक सजग होना स्वाभाविक है”, जबकि भारत जैसे बहुभाषी समाज में यह स्थिति अलग है|"https://doi.org/10.1080/14781700.2021.1936149 Translation in India: Multilingual Practice and Cultural histories of tests Israel Hephizibah 21 june 2021 https://doi.org/10.1080/14781700.2021.1936149
हरीश त्रिवेदी के अनुसार “बहुभाषिकता सामान्यतः अनुवाद के लिए अनुकूल नहीं होती, क्योंकि अनुवाद की आवश्यकता मुख्यतः एकभाषी वक्ता को होती है। इसलिए उनके अनुसार, भारत में जहाँ विश्व की सबसे व्यापक भाषाई विविधता है, उसी कारण से यहाँ अनुवाद का इतिहास लगभग 'गैर-इतिहास (non-history)'जैसा प्रतीत होता है।In our own time,on own terms Trivedi Harish 2006
रीता कोठारी के अनुसार "भारत के बहुभाषी नागरिकों द्वारा विभिन्न भाषाओं के बीच लगातार आवाजाही के कारण अनुवाद भारत में एक सामान्य और दैनिक गतिविधि बन गया है, जिस पर विशेष सिद्धांत बनाने की आवश्यकता ही नहीं समझी गई।"Translation India Kothari Rita Routledge 2003
रीता कोठारी के अनुसार भारत में “बहुभाषी राष्ट्र” को कोई विरोधाभासी अवधारणा नहीं माना गया। ये ऐसे प्रतीक की खोज पर बल देती हैं,जो भाषा की बहुलतावादी अवधारणा को नष्ट न करें।
पश्चिमी आधुनिकता और राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रियाओं ने बार-बार ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक सोच को बढ़ावा दिया, जो एक सामान्य भाषा को दक्षता का प्रतीक मानती है और कई भाषाओं को विकास के लिए बोझ समझती है।
बहुभाषिक लेखक और स्व-अनुवाद - कई लेखक स्वयं अपनी रचनाओं का दूसरी भाषा में अनुवाद करते हैं। इससे लेखक और अनुवादक की पारंपरिक भूमिकाएं आपस में मिल जाती हैं। इससे ये प्रश्न उठता है कि मौलिकता और रचनात्मकता केवल लेखक की होती है या अनुवादक भी उसमें योगदान देता है। यह स्थिति अनुवाद अध्ययन के पारंपरिक सिद्धांतों को चुनौती देती हैं।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
भाषा
मातृभाषा
बाहरी कड़ियाँ
बहुभाषिकता
वैश्वीकरण और बहुभाषिकतासितंबर 2026 InternetArchiveBot
द्विभाषिकता का उत्थान और पतन (रामचन्द्र गुहा)
Common Questions about a bilingual education for young children
The benefits of multilingualism
CBC Digital Archives – The Road to Bilingualism
Encouraging Childhood Multilingualism
SLABIB: Second Language Acquisition
One Language or Two: Answers to Questions about Bilingualism in Language-Delayed Children
raising-bilingual-children.com - webpage dedicated to educating children in a multilingual environment. Information/Recommendations, Forums, Links etc.
ESRC Centre for Research on Bilingualism in Theory and Practice
Multilingial virtual keyboard
Bastardas-Boada, Albert. "World language policy in the era of globalization: Diversity and intercommunication from the perspective of 'complexity'", Noves SL. Revista de Sociolingüística 2002 (Summer).
De Mauro, Tullio "Linguistic Variety and Linguistic Minorities." Italian Cultural Studies, an Introduction. Ed. David Forgacs and Robert Lumley. New York: Oxford UP, 1996. 88-101.
बहुभाषिकता – आज की ज़रूरत
द्विभाषिकता एवं बहुभाषिकताः संदर्भ एवं प्रकृति – श्वेतांशु शेखर
श्रेणी:भाषा
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