Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

मकरन्दसारिणी

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

दाएँ|अंगूठाकार|400x400पिक्सेल| मकरन्दसारिणी की पाण्डुलिपि का पहला पृष्ठ मकरन्दसारिणी संस्कृत में रचित एक खगोलीय तालिका ग्रन्थ है जिसके रचयिता भारतीय खगोलशास्त्री-गणितज्ञ मकरन्द हैं। वे वाराणसी के निवासी थे। संस्कृत खगोलीय साहित्य में ऐसे तालिका ग्रंथों को 'सारिणी' या 'कोष्ठक' कहा जाता है। 'सारिणी' शब्द का अर्थ 'सार प्रस्तुत करने वाली' है। यह ग्रन्थ संस्कृत में रचित सबसे लोकप्रिय ग्रंथों में से एक है।Sanskrit Astronomical Tables Clemency Montelle and Kim Plofker Springer 978-3-319-97036-3 2018 महत्वपूर्ण विशेषताएं मकरन्दसारिणी, सौरपक्ष का अनुसरण करती है। यह मध्यरात्रि-युग प्रणाली है जो आठवीं शताब्दी के आसपास के सूर्यसिद्धांत में सन्निहित है।Sanskrit Astronomical Tables Clemency Montelle and Kim Plofker Springer 978-3-319-97036-3 2018Clemency Montelle and Kim Plofker. Sanskrit Astronomical Tables. 2018: Springer. ISBN 978-3-319-97036-3.{{cite book}}: CS1 maint: location (link) Category:CS1 maint: location यह मौलिक मापदंडों के मूल्यों के चयन में परिलक्षित होता है, जैसे खगोलीय पिंडों के क्रांति-संख्याओं के मूल्य और परिणामी माध्य वेग। 'मकरंदसारिणी' की एक और अनूठी विशेषता इसकी विभिन्न तालिकाओं के लिए वनस्पति-विषयक संस्कृत तकनीकी शब्दों का उपयोग है। उदाहरण के लिये, माध्य स्थिति में वृद्धि का मान दर्शाने वाली तालिका को वाटिका (=उद्यान) कहा गया है। इसी परकार एक अन्य तालिका का नाम गुच्च है। वल्ली (बेल) और सौरभम् (सुगंध) नामक तालिकाएँ भी हैं। अधिकांश अन्य सारिणियों या कोष्ठकों तुलना में, मकरन्दसारिणी में तालिकाओं के अलावा श्लोक नहीं हैं, केवल मंगलाचरण का शोक को छोड़कर। विषयवस्तु अन्य बातों के अलावा, इस ग्रन्थ में निम्नलिखित से संबंधित तालिकाएँ हैंः तिथि और योग के अंतिम क्षण सूर्य, चंद्र, और पाँच ताराग्रहों (मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, और शनि ) के माध्य देशांतर प्रत्येक आकाशीय पिण्ड का मण्डफल ( पिण्ड के केंद्र का समीकरण) पाँच ग्रहों के संयोजन का समीकरण, सूर्य के राशियों एवं नक्षत्रों में प्रवेश के क्षण सूर्य की क्रान्ति चन्द्रमा का सार और विक्षेप सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण की गणना के लिये सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी के भूच्छाया और भूर्भा का बिम्ब (कोणीय व्यास) । भाष्य मकरन्दसारिणी पर बहुत सी टीकाएं रची गयीं। इन टीकाओं में इन सारणियों के उपयोग उदाहरण सहित समझाये गये हैं। इन टीकाओं में से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं-Sanskrit Astronomical Tables Clemency Montelle and Kim Plofker Springer 978-3-319-97036-3 2018Clemency Montelle and Kim Plofker. Sanskrit Astronomical Tables. 2018: Springer. ISBN 978-3-319-97036-3.{{cite book}}: CS1 maint: location (link) Category:CS1 maint: location ढुण्ढिराज (1590) कृत मकरन्दपञ्चाङ्गोपपत्ति दिवाकर (जन्म 1606) कृत मकरन्दविवरण हरिकर्ण (1610) की मकरन्दपद्धतिकारिका पुरुषोत्तम भट्ट (1610) कृत अभिनवतामरस विश्वनाथ (1612/1630) कृत मकरंदोदाहरण मोरेश्वर (1622 ईस्वी) कृत मकरंदटिप्पण क्षेमंकर मिश्र (1632) की सुबोधिका कृपाराम मिश्र (1815) कृत मकरंदकारिका नीलाम्बर झा (जन्म 18 जुलाई 1823) कृत वासना जीवनाथ झा (1846/1900) कृत उदाहरण इन्हें भी देखें महादेवी (ज्योतिषशास्त्र पुस्तक) राजमर्गांक (ज्योतिषशास्त्र पुस्तक) पठनीय Clemency Montelle and Kim Plofker Sanskrit Astronomical Tables 2018 Springer 978-3-319-97036-3 https://archive.org/details/sources-and-studies-in-the-history-of-mathematics-and-physical-sciences-clemency/mode/2up 20 December 2023 David Pingree Sanskrit Astronomical Tables In England 1973 The Kuppuswami Sastri Research Institute Madras (Chennai) https://archive.org/details/sanskritastronomicaltablesinenglandmanuscriptsdavidpingree_409_s/mode/2up?view=theater 20 December 2023 Vishnunath Makaranda Sarini 1923 https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.405753/mode/2up 20 December 2023 (Name of publisher not mentioned. Digitized from Digital Library of India.) संदर्भ श्रेणी:भारतीय खगोलिकी