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ब्राह्मणबाड़िया
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बांग्लादेश के ब्राह्मणबाड़िया शहर ब्राह्मणबाड़िया उपज़िला ब्राह्मणबाड़िय़ा सदर उपज़िला ब्राह्मणबारिया ज़िले ब्राह्मनबरिआ जिला
ब्राह्मणबाड़िया (bn ব্রাহ্মণবাড়িয়া) बांग्लादेश का एक शहर है और ब्राह्मणबाड़िया सदर उपज़िला के साथ-साथ ब्राह्मणबाड़िया ज़िले की राजधानी है।http://tools.wmflabs.org/wikivoyage/w/poimap2.php?lat=23.969&lon=91.103&zoom=13/ Wikivoyage Map Data OpenStreetMap 11 July 2011http://www.lged.gov.bd/ViewMap2.aspx?DistrictID=14#/ Government Official Name Local government in Bangladesh https://web.archive.org/web/20180612142218/http://www.lged.gov.bd/ViewMap2.aspx?DistrictID=14#/ 12 June 2018 17 December 2014 यह पूर्वी बांग्लादेश में कुमिल्ला के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर है और 1868 में स्थापित, बांग्लादेश की सबसे पुरानी नगर पालिकाओं में से एक है।http://geonames.nga.mil/ggmagaz/ NGA GeoNames Database National Geospatial-Intelligence Agency 14 July 2008https://oldweb.lged.gov.bd/DistrictLGED.aspx?DistrictID=14 About B.BARIA Local government in Bangladesh 30 April 2022मई 2026 InternetArchiveBot ब्राह्मणबाड़िया को 1984 में ज़िला मुख्यालय घोषित किया गया था। 2022 में इसके नगरपालिका क्षेत्र की आबादी 265,000 है। यह बांग्लादेश का 14वां सबसे बड़ा शहर है। बांग्लादेश का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र तितास गैस क्षेत्र ब्राह्मणबाड़िया में स्थित है।
व्युत्पत्ति
ब्राह्मणबाड़िया का नाम कैसे पड़ा, इसे लेकर विभिन्न मत हैं। कहा जाता है कि सेन राजवंश के दौरान, ब्राह्मणों की कमी के कारण पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में समस्याएँ आ रही थीं। इसलिए, राजा लक्ष्मण सेन ने आदिसुर के शासनकाल में कान्यकुब्ज से कुछ ब्राह्मण परिवारों को इस क्षेत्र में लाए। इनमें से कुछ परिवारों ने इस स्थान पर अपने घर बनाए। इस प्रकार, वहाँ ब्राह्मणों के घरों के कारण इस जगह का नाम ब्राह्मणबाड़िया पड़ा, क्योंकि "बाड़ि" (बंगाली में: বাড়ি) का अर्थ निवास या घर होता है। यह शब्द मागधी प्राकृत '𑀯𑀸𑀟𑀺𑀆' (वाडिआ) से लिया गया है, जो मूल रूप से संस्कृत शब्द 'वाटिका' (vāṭikā) से उत्पन्न हुआ है।https://www.brahmanbaria.gov.bd/bn/site/page/KIIM-%E0%A6%8F%E0%A6%95-%E0%A6%A8%E0%A6%9C%E0%A6%B0%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%B9%E0%A7%8D%E0%A6%AE%E0%A6%A3%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A7%9C%E0%A6%BF%E0%A7%9F%E0%A6%BE এক নজরে ব্রাহ্মণবাড়িয়া (Brahmanbaria at a glance) brahmanbaria.gov.bd 2024-09-02
इतिहास
बाएँ|अंगूठाकार|314x314पिक्सेल|पूर्वी पाकिस्तान की रक्षा के लिए 1967 से 1971 तक पाकिस्तानी पूर्वी कमान की योजना (सामान्य रूपरेखा — कुछ इकाइयों के स्थान नहीं दर्शाए गए हैं)
बांग्लादेश की मुक्ति के लिए 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध के दौरान, जब पाकिस्तानी सेना के योजनाकारों ने अनुमान लगाया कि भारत अपना मुख्य आक्रमण आखाउड़ा–ब्राह्मणबाड़िया अक्ष पर पूर्व की दिशा में करेगा, तब इस क्षेत्र की रक्षा के लिए उनके पास कोई ब्रिगेड उपलब्ध नहीं थी। इसलिए पाकिस्तानी सेना ने अपनी 27वीं ब्रिगेड को मयमनसिंह से आखाउड़ा स्थानांतरित किया, जबकि 27वीं ब्रिगेड की दो बटालियनें मयमनसिंह में ही रखकर 93वीं ब्रिगेड का गठन किया गया ताकि मयमनसिंह की रक्षा की जा सके। पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने 16 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना और भारत के स्थानीय सहयोगी मुक्तिवाहिनी के सामने बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर दिया। इस दिन और घटना को बांग्लादेश में ‘बिजॉय दिबॉश’ (बंगाली: বিজয় দিবস) तथा भारत में ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।http://liberationwarmuseum.org/about-us About us Liberation War Museum https://web.archive.org/web/20111108013543/http://www.liberationwarmuseum.org/about-us 8 November 2011 21 November 2011
सन्दर्भ