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महेंद्रगढ़
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महेंद्रगढ़ Mahendragarh महेंद्रगढ़ India Haryana 28.28 76.15 inline, title हरियाणा में स्थिति देश राज्य हरियाणा ज़िला महेंद्रगढ़ ज़िला 29128 2011 भाषा प्रचलित हरियाणवी, हिन्दी अभिनेता
सतीश कौशिक,अक्षय कुमार जिनागल IST +5:30
महेंद्रगढ़ (Mahendragarh) भारत के हरियाणा राज्य के महेंद्रगढ़ ज़िले में स्थित एक नगर है। ज़िले का मुख्यालय नारनौल में है।"General Knowledge Haryana: Geography, History, Culture, Polity and Economy of Haryana," Team ARSu, 2018"Haryana: Past and Present https://web.archive.org/web/20170929095707/https://books.google.com/books?id=6n7vV0eiS3YC 29 सितंबर 2017," Suresh K Sharma, Mittal Publications, 2006, ISBN 9788183240468"Haryana (India, the land and the people), Suchbir Singh and D.C. Verma, National Book Trust, 2001, ISBN 9788123734859
विवरण
महेन्द्रगढ़ अपने खूबसूरत पर्यटक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। पहले यहां पर पृथ्वीराज चौहान के वंशज अंगपाल का साम्राज्य था। बाद में इस पर मराठों, झज्जार के नवाबों और ब्रिटिश शासकों ने भी शासन किया। महादेव प्रसाद भोजक ने भी शासन किया था आधुनिक महेन्द्रगढ़ की स्थापना १९४८ ई. में की गई थी। नारनौल और महेन्द्रगढ़ इसके प्रमुख शहर हैं। इसके उत्तर में भिवानी व रोहतक, पूर्व में रेवाड़ी व अल्वर, दक्षिण में सीकर व जयपुर और पश्चिम में सीकर व झंझनू स्थित है। यहां के निवासी बडे हंसमुख और मिलनसार हैं। वह अपने यहां आने वाले पर्यटकों का स्वागत बड़ी गर्मजोशी से करते हैं। पर्यटकों को यहां कहीं भी बोरियत या नीरसता का सामना नहीं करना पड़ता। वह यहां पर शानदार छुट्टियां व्यतीत कर सकते हैं।
प्रमुख आकर्षण
जल महल ( नारनौल )
महेन्द्रगढ़ जिला के नारनौल में स्थित जलमहल बहुत खूबसूरत है। महल की दीवारों पर लिखे शिलालेखों के अनुसार इसका निर्माण 1591 ई. में शाह कुली खान ने कराया था। यह महल एक तालाब के बींचोबीच बना हुआ है। लेकिन अब यह तालाब पूरी तरह से सूख चुका है। महल में पांच छोटी-छोटी दुकानों का निर्माण किया गया है। पर्यटक इन दुकानों से खूबसूरत स्मृतिकाएं खरीद सकते हैं।
चोर गुम्बद ( नारनौल )
चोर गुम्बद का निर्माण जमाल खान ने कराया था। इसे ''नारनौल का साईनबोर्ड' के नाम से भी जाना जाता है। गुम्बद के निर्माण काल का अभी तक पता नहीं चला है। लेकिन इसका वास्तु शास्त्र शाह विलायत के गुम्बद से मेल खाता है। इस गुम्बद की आर्को का निर्माण अंग्रेजी के S वर्ण के आकार में किया गया है। कहा जाता है प्राचीन समय में यह चोर-डाकुओं के छुपने की जगह थी। इसीलिए इसका नाम चोर गुम्बद पड़ गया। इसके अंदर जाना मना है
बीरबल का छाता ( नारनौल )
बीरबल का छाता पांच मंजिला इमारत है और यह बहुत खूबसूरत है। पहले इसका नाम छाता राय मुकुन्द दास था। इसका निर्माण नारनौल के दीवान राय-ए-रायन ने शाहजहां के शासन काल में कराया था। प्राचीन समय में अकबर और बीरबल यहां पर ठहरे थे। उसके बाद इसे बीरबल का छाता नाम से जाना जाने लगा। इसकी वास्तुकला बहुत खूबसूरत है। देखने में यह बहुत साधारण लगता है क्योंकि इसकी सजावट नहीं की गई है। इसमें कई सभागार, कमरों और मण्डपों का निर्माण किया गया है। कथाओं के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इसके नीचे चार सुरंगे भी बनी हुई हैं। यह सुरंगे इसको जयपुर, दिल्ली, दौसी और महेन्द्रगढ़ से जोड़ती हैं। कहा जाता है कि इसमें एक बारात रूकी थी जो कि गायब हो गई थी।
शाह विलायत का मकबरा ( नारनौल )
इब्राहिम खान के मकबर के पास ही शाह विलायत का मकबरा बना हुआ है। इसके वास्तु शास्त्र में पर्यटक तुगलक काल की छवि देख सकते हैं, जो बहुत खूबसूरत है। यह पर्यटकों को बहुत पसंद आता है। प्रसिद्ध लेखक गुलजार के अनुसार इसकी स्तंभावली और गुम्बद का निर्माण आलम खान मेवाड़ी ने किया था।
इब्राहिम खान का मकबरा ( नारनौल )
इस मकबरे का निर्माण शेर शाह सूरी ने 1538-46 ई. में अपने दादा इब्राहिम खान की याद में कराया था। शेख अहमद नियाजी ने इस मकबरे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके पास ही इनकी कब्रें भी बनी हुई हैं। मकबरा चौकोर आकार का है। यह मकबरा, चौकोर मकबरा शैली व पथान निर्माण शैली का बेहतरीन नमूना है।
नसीबपुर ( नारनौल )
नारनौल से 3 कि॰मी॰ की दूरी पर नसीबपुर स्थित है। यहां पर ब्रिटिश शासकों ने स्वतंत्रता सेनानियों का कत्ल किया था। कहा जाता है कि जिस समय यह रक्तपात हुआ उस समय यहां की धरती खून से लाल हो गई थी। उन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पर पार्क का निर्माण किया गया है। यह पार्क बहुत खूबसूरत है। पर्यटक इस पार्क में पिकनिक भी मना सकते हैं।
शाह कुली खान का मकबरा ( नारनौल )
नारनौल में स्थित शाह कुली खान का मकबरा बहुत खूबसूरत है। इसके निर्माण में सलेटी और लाल रंग के पत्थरों का प्रयोग किया गया है। यह मकबरा आठ कोणों वाला है। इसके वास्तु शास्त्र में पथान शैली का प्रयोग किया गया है। मकबर में त्रिपोलिया द्वार का निर्माण भी किया गया है। इस द्वार का निर्माण 1589 ई. में किया गया था। मकबरे के पास खूबसूरत तालाब और बगीचे भी हैं। तालाब और बगीचे का निर्माण पहले और मकबरे का निर्माण बाद में किया गया था। यह बगीचा बहुत खूबसूरत है। इसका नाम अराम-ए-कौसर है।
चामुण्डा देवी मन्दिर ( नारनौल )
राजा नौण कर्ण मां चामुण्डा देवी का भक्त था। उन्होंने ही इस मन्दिर का निर्माण कराया था। यह मन्दिर पहाड़ी की तराई में बना हुआ है। राजा नौण कर्ण के बाद इस क्षेत्र पर मुगलों ने अधिकार कर लिया।
कैलाश आश्रम मंदिर गुलावला ( महेंद्रगढ़ )
नारनौल महेंद्रगढ़ सड़क पर स्थित गॉंव गुलावला में पहाड़ी की चोटी पर बना प्राचीन हनुमान जी का मंदिर लोगों की आस्था और विश्वास केंद्र बना हुआ है। कहते हैं, इस पहाड़ी की चोटी पर पांडवों ने अपने अज्ञातवास के कुछ दिन बिताये थे और हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना करके अपनी सफलता की कामना की थी। बाबा बजरंगी की कृपा से पांडवों का अज्ञातवास निर्विघ्न पूरा हुआ। तभी से लेकर आज तक लोग बड़ी श्रद्घा और विश्र्वास के साथ यहां पहाड़ की चोटी पर स्थापित बजरंग बली जी की प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर, मन्नतें मांगते हैं।
वर्तमान में इस प्राचीन हनुमान मंदिर को कैलाश आश्रम के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र के महान संत बाबा खेतानाथ जी ने इस आश्रम को चमकाया। लोगों की श्रद्घा और आस्था का आलम इतना था कि गांव गुलावला के हर घर के सदस्य ने अपने सिर पर पत्थर, बजरी, सीमेंट, पानी और अन्य सामान रखकर एक भव्य आश्रम का निर्माण किया। यह आश्रम पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। चढ़ाई चढ़ कर जब मंदिर में पहुँचते हैं तो थकान का नामोनिशान तक नहीं रहता है। हनुमान जी की प्राचीन मूर्ति के सम्मुख बैठकर आराधना करते हैं तो ऐसा लगता है कि मानो चिरंजीवी हनुमान जी वहीं विरामान हैं। जो भी यहां आकर सच्चे दिल से मन्नत मांगता है, उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है। मंदिर में श्री श्री 1008 श्री बाबा खेतानाथ, बाबा शुक्रनाथ, बाबा सेवानाथ जी की विशाल मूर्तियॉं भी लोगों की श्रद्घा का केंद्र हैं। मंदिर की दीवारों पर भगवान शंकर, नृसिंहावतार, हनुमान जी, मां भगवती, राम-दरबार, शिव-परिवार और स्वर्ग-नरक के सुंदर चित्र बने हैं, जो मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। दीवारों पर हनुमान चालीसा, गीता सार और चौपाइयां लिखी गई हैं, जो मंदिर के वातावरण को भक्तिमय बनाती हैं।
वर्तमान में आश्रम के धूणे पर बाबा संतोषनाथ जी विराजमान हैं। उनके संचालन में प्रतिदिन मंदिर में ज्ञान की धारा बहती रहती है। यहां हर मंगलवार को कीर्तन एवं भंडारा होता है और गुरु पूर्णिमा को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। बैसाख की सप्तमी को बाबा शुक्रनाथ जी की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। सावन की शिवरात्रि को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि सावन की शिवरात्रि को ही यहां पांडवों ने हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना की थी। इसलिए इस दिन हनुमान जी यहां अवश्य पधारते हैं। हर त्योहार पर मंदिर को सजाया जाता है और भजन-कीर्तन किये जाते हैं।
हनुमान जी का मंदिर लोगों की श्रद्घा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां श्रद्घालुओं की भीड़ लगी रहती है। प्रतिदिन सुबह-शाम शंख बजाकर लोगों को आरती के लिए बुलाया जाता है।
महेंद्रगढ़ का किला ( राजा मोहिंद्र के नाम पर पड़ा )
महेंद्रगढ़ का किला अंबेडकर चौक के पास स्थित है यह अपनी शानदार नक्काशी के लिए देखा जा सकता है इसके समीप एक सुरंग ह जो बताते हैं कि नारनौल जाती थी लेकिन अभी सरकार ने उसे बंद कर दिया है | पहले किले के चारों तरफ दुश्मन से बचने के लिए गहरी खाई होती थी जो धीरे धीरे करके भर दी गई अब उस जगह पर देवीलाल पार्क बनाया जा रहा है । महादेव प्रसाद भोजक ने भी शासन किया था महादेव प्रसाद भोजक की एक सोने की मूर्ति मिली थी जो चोरी हो गई थी 193 4 मै। महादेव प्रसाद भोजक की एक हवेली है। जो नाइयों की गुवाड़ी भोजक मोहल्ला मै महेंद्रगढ़ हरियाणा मै है।महादेव प्रसाद भोजक के 6बेटे थे सत्यनरायण रामोतार लक्ष्मीनरायण रामचन्द्र प्रभातीलाल ताराचन्द्र ।
महेंद्रगढ़ की प्रसिद्ध हस्तियाँ=
रायबहादुर गूजर मल मोदी
गूजर मल मोदी (9 अगस्त 1902 - 22 जनवरी 1976) एक भारतीय उद्योगपति और परोपकारी थे, जिन्होंने अपने भाई केदार नाथ मोदी के साथ 1933 में मोदी ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ और औद्योगिक शहर मोदीनगर की सह-स्थापना की। मोदीनगर में एक चीनी मिल ने मोदी समूह समूह की शुरुआत की, जो बाद में विभिन्न क्षेत्रों में फैल गया।
जीएम मोदी ने अपने जन्मस्थान महेंद्रगढ़, पटियाला और मोदीनगर में स्कूल और कॉलेज स्थापित किए। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे स्थापित संस्थानों और मेरठ और अन्य स्थानों के विभिन्न कॉलेजों को अनुदान देकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया। उन्हें 1968 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था । वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के संस्थापक ललित मोदी के दादा हैं ।
सतीश कौशिक
सतीश कौशिक (13 अप्रैल 1956 – 9 मार्च 2023 हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता, निदेशक, निर्माता, हास्य अभिनेता, एवम पटकथा लेखक थे।
रामदेव बाबा
रामकृष्ण यादव (स्वामी रामदेव) भारतीय योग-गुरु हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जनपद स्थित अली सैयदपुर नामक गाँव में वर्ष 1965 में गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव के घर जन्मे रामदेव का वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव था। समीपवर्ती गाँव शहजादपुर के सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देव जी से वेद संस्कृत व योग की शिक्षा ली। रामकृष्ण ने युवावस्था में ही सन्यास लेने का संकल्प किया और बाबा रामदेव नाम से लोकप्रिय हो गए।
आवागमन
वायु मार्ग
वायुमार्ग से भी पर्यटक आसानी से महेन्द्रगढ़ तक पहुंच सकते हैं। पर्यटकों की सुविधा में लिए चण्डीगढ़ औद दिल्ली में हवाई अड्डे बनाए गए हैं। इन हवाई अड्डों से पर्यटक टैक्सी व बसों द्वारा आसानी से महेन्द्रगढ़ तक पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग
पर्यटक महेन्द्रगढ़ जाने के लिए दिल्ली रेलवे स्टेशन से रेल पकड़ सकते हैं। महेन्द्रगढ़ के लिए दिल्ली से कई रेल चलती हैं।
सड़क मार्ग
महेन्द्रगढ़ जाने के लिए पर्यटक दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से बस ले सकते हैं। यहां से महेन्द्रगढ़ के लिए अनेक बसें चलती हैं।
इन्हें भी देखें
महेंद्रगढ़ ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:हरियाणा के शहर
श्रेणी:महेंद्रगढ़ ज़िला
श्रेणी:महेंद्रगढ़ ज़िले के नगर
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