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सोहराब मोदी
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सोहराब मोदी Sohrab Modi.jpg मोदी, 1931 सोहराब मोदी yes 1897 11 2 yes 1984 01 28 1897 11 02 अभिनेता, निर्माता, निर्देशक पारसी सोहराब मेरवानजी मोदी बॉम्बे, ब्रिटिश प्रेसिडेंसी, ब्रिटिश राज बॉम्बे, महाराष्ट्र, भारत मेहताब 1946 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (1980)
सोहराब मेरवानजी मोदी (2 नवंबर 1897 – 28 जनवरी 1984) भारतीय अभिनेता, फ़िल्म निर्देशक और निर्माता थे।https://books.google.com/books?id=8y8vN9A14nkC&pg=PT614 Encyclopaedia of Hindi Cinema Gulazāra Govind Nihalani Saibal Chatterjee Popular Prakashan 2003 978-81-7991-066-5 614– 16 October 2016 https://web.archive.org/web/20201011211242/https://books.google.com/books?id=8y8vN9A14nkC&pg=PT614 11 October 2020 live उनकी प्रसिद्ध फ़िल्में हैं ख़ून ना ख़ून (1935), सिकंदर (1941), पृथ्वी वल्लभ (1943), झांसी की रानी (1953), मिर्ज़ा गालिब (1954) और नौशेरवाँ-ए-आदिल (1947)।
प्रारंभिक जीवन
सोहराब मोदी का जन्म 2 नवम्बर, 1897 में बम्बई में हुआ था। सोहराब मोदी अपनी स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद वह अपने भाई केकी मोदी के साथ यात्रा प्रदर्शक का कार्य किया। सोहराब मोदी ने कुछ मूक फ़िल्मों के अनुभव के साथ एक पारसी रंगमंच से बतौर अभिनेता के रूप में शुरुआत की थी। सोहराब मोदी का बचपन रामपुर में बीता, जहां उनके पिता नवाब के यहां अधीक्षक थे। नवाब रामपुर का पुस्तकालय बहुत समृद्ध था। रामपुर में ही सोहराब मोदी ने फर्राटेदार उर्दू सीखी। अभिनय की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपने भाई रुस्तम की नाटक कंपनी सुबोध थिएट्रिकल कंपनी से मिली, जिसमें उन्होंने 1924 से काम करना शुरू कर दिया था। वहीं उन्होंने संवाद को गंभीर और सधी आवाज में बोलने की कला सीखी, जो बाद में उनकी विशेषता बन गयी। कुछ ही समय में वे नाटकों में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाने लगे। ‘हैमलेट’ और ‘द सोल ऑफ़ डाटर’ उनके लोकप्रिय नाटक थे जिनमें उन्होंने अभिनय किया। बाद में उनका परिवार रामपुर से बंबई चला आया। वहां उन्होंने परेल के न्यू हाईस्कूल से मैट्रिक पास किया। जब ये अपने प्रिंसिपल से यह पूछने गये कि भविष्य में क्या करें, तो उनके प्रिंसिपल ने कहा,-‘तुम्हारी आवाज सुन कर तो यही लगता है कि तुम्हे या तो नेता बनना चाहिए या अभिनेता।’ और सोहराब अभिनेता बन गये। उनकी आवाज की तरह बुलंद थी। अंधे तक उनकी फ़िल्मों के संवाद सुनने जाते थे।
आरम्भिक जीवन
16 वर्ष की उम्र में सोहराब मोदी ग्वालियर के टाउनहाल में फ़िल्मों का प्रदर्शन करते थे। बाद में अपने भाई रुस्तम की मदद से उन्होंने ट्रैवलिंग सिनेमा का व्यवसाय शुरू किया। फिर अपने भाई के साथ ही उन्होंने बंबई में स्टेज फ़िल्म कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी की पहली फ़िल्म 1953 में बनी ‘खून का खून’ थी, जो उनके नाटक ‘हैमलेट’ का फ़िल्मी रूपांतर थी। इसमें सायरा बानो की माँ नसीम बानो पहली बार परदे पर आयीं। ‘सैद –ए-हवस’ (1936) भी नाटक ‘किंग जान’ पर आधारित थी। सोहराब मूलतः नाटक से आये थे, यही वजह है कि उनकी पहले की फ़िल्मों में पारसी थिएटर की झलक मिलती है। ऐतिहासिक फ़िल्में बनाने में वे सबसे आगे थे।
प्रमुख फिल्में
वर्ष फ़िल्म चरित्र टिप्पणी1983 रज़िया सुल्तान वज़ीरे-ए-आज़म 1979 घर की लाज 1971 ज्वाला 1971 एक नारी एक ब्रह्मचारी 1960 काला बाज़ार 1958 यहूदी 1956 राज हठ राजा बाबू 1955 कुंदन कुंदन 1950 शीश महल
बतौर निर्देशक
वर्ष फ़िल्म टिप्पणी1956 राज हठ 1955 कुंदन 1954 मिर्ज़ा गालिब 1950 शीश महल 1949 दौलत
नामांकन और पुरस्कार
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
श्रेणी:बॉलीवुड
श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता
श्रेणी:हिन्दी अभिनेता