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घोनिया
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घोनिया~ गांव बाड़मेर जिला मुख्यालय से 64 किलोमीटर वह चौहटन उपखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित है। इस गांव की स्थापना मां वांकल के परम पुजारी दादा भिंयड़ जी के वंशजों द्वारा की गई है। यह गांव भोपा राजपूतों की जन्म और कर्म भूमि रहा है। ऐतिहासिक कालखंड में यह गांव सहसोजी (शेराजी) की ढाणी से जाना जाता था। इस गांव में सागरूबंध तले का पानी क्षेत्र में पानी की किल्लत को बुझाता था। इस कालखंड में सराई जाती के मुसलमानो का आतंक था उसी से तंग आकर भोपा राजपूत को अपना गांव छोड़ना पड़ा कई वर्षों तक यह गांव सराई मुसलमानों का रहा भोपा राजपूत भी कई गांव में गोलवास जीवन जीते रहे। लेकिन मातृभूमि की याद किसको नहीं सताती तानो बानो की जिंदगी से कई बेहतर है मातृभूमि के लिए मर जाना यही जीवन में ठान के भोपा रतन सिंह वह काकू जैराम सिंह अपनी मातृभूमि के लिए गोगाला से भीलों को लेकर घोनिया आए और सराई मुसलमान को मार धार के भगाया नित अपनी मातृभूमि की याद को ताजा कर गांव का नाम घोनिया रखा
घोनिया गांव परमार (भोपा) राजपूतों की कर्म वह जन्म भूमि रहा इसी गांव में समय के साथ भोपो के साथ गैलडा़ राजपूत भील, मेघवाल, ब्राह्मण, सुथार, दर्जी, गोस्वामी, राणा राजपूत, भार्गव, जोगल, धांधल,केलण,राड़, आदि जातियां रहती हैं।
यहां के धार्मिक स्थल भोपा जाति की कुलदेवी विरात्रा की वांकल माताजी है। विरात्रा मां वांकल के मंदिर की नींव श्री भोपा मोहब्बत सिंह जी ने रखी थी उनका परिवार आज भी घोनिया में रहता है। मां वांकल के परम पुजारी श्री भोपा मोहब्बत सिंह जी द्वारा भाईयों के सहयोग से गांव में मां वांकल के छोटे से मंदिर का निर्माण करवाया जो आज के समय जिर्णोद्धार द्वारा होकर गांव के सहयोग से संगमरमर का मां वांकल का मन्दिर गांव का धार्मिक स्थल है।
और जोगमाया मंदिर भील समाज के द्वारा बसवोनियो की ढाणी में निर्माण करवाया वह भी जिर्णोद्धार में है। भील समाज में भक्ति में अपना जीवन समर्पित करने वाले श्री मलंग दास जी की भी छतरी जोगमाया मंदिर के पास में स्थित है।
पश्चिम में घोनिया से 6 किमी गोराणा माताजी मंदिर विरात्रा माताजी से संबंधित है।
सागरूबध कुएं में वक्त के साथ पानी कड़वा होने के कारण भोपा मोहब्बत सिंह द्वारा गांव में कुएं का निर्माण करवाया जिसमें संपूर्ण गांव ने दर्जनो सालों तक पानी पिया समय के साथ घोनिया में मीठा पानी होने के कारण वाटर पॉइंट भी मिला जिससे सैकड़ो गांव को घोनिया से पानी सप्लाई किया जाता रहा।
घोनिया गांव से जुड़े हुए प्रमुख बिन्दु 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान के सैनिक घोनिया से पश्चिम स्थित गोराणा माताजी मन्दिर तक पहुंच गए यह सूचना गांव के लोगों को मिली तब गांव के मौजुज लोग स्व.श्री लख सिंह, स्व.श्री रिडमल सिंह,स्व.श्री भोजराज सिंह, स्व.श्री नारायण सिंह, स्व.श्री कौशल सिंह,स्व श्री भार सिंह श्री भुर सिंह, स्व. इजता राम भील लोगों ने ठाकुर हेम सिंह चौहटन से संपर्क किया और आर्मी को इस बात से अवगत करवाया उस वक्त होमगार्ड के द्वारा गांव के पांच लोगों को टोपीदार बंदूके दी गई जो 1965 के अंदर ठाकुर हेमसिंह के साथ दर्जनों दिनों तक कंधे पर उठाकर चलते रहे और मातृभूमि के लिए देश के दुश्मनों को खदेड़ने में अहम भूमिका निभाई इसी लड़ाई के संदर्भ में घोनिया से दक्षिण में स्थित हाजी अलाने का तला के मुस्लिम समुदाय लोगों को पाकिस्तान आर्मी से मिले होने की सूचना मिली जो की चौहटन में स्थित आर्मी कैंप और होमगार्ड कैंप को निशाना बनाने के फिराक में थे। इस बात का पता उस वक्त के युवा स्व. लख सिंह घोनिया को चला उन्होंने अपनी सूझबूझ के साथ इंडियन आर्मी और सैकड़ो लोगों की जान ही नहीं बचाई हेम सिंह राठौर के साथ मिलकर उन मुसलमान को रंगे हाथों पकड़ के देशद्रोह के मुकदमे में दर्जनों सालों तक जेल की सलाखों के पीछे बंद करवाया पकड़ने की झड़प में पाकिस्तान के आर्मी से हथियार लेकर मुस्लिम लोगों ने ठाकुर हेमसिंह पर अटैक किया उसी वक्त ठाकुर हेम सिंह ने अपनी बंदूक से एक निशान साधा जिससे एक मुस्लिम की मौत हुई इसके बाद आर्मी ने पूरा मोर्चा संभाल लिया राठौर को कहां की यह देशद्रोही लोगों को लाइन में खड़ा करके उड़ा देते हैं लेकिन राठौर ने कहा यह अनजान अनपढ़ लोग हैं। पाकिस्तान आर्मी की साजिश के शिकार हुए हैं। उन्हें उड़ाना नहीं है इन्हें सजा जरूर दीजिए लेकिन इन्हें में मारने नहीं दूंगा यह मेरे भोले लोग हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा वह खेलकूद से संबंधित घोनिया ग्राम पंचायत में डॉक्टर IAS जोगाराम जांगिड़ की अनु कृपा से घोनियों में पीएससी हॉस्पिटल लोक कल्याण के लिए स्वास्थ्य चिकित्सा में बहुत जन कल्याण का कार्य कर रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में घोनिया ग्राम पंचायत में सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी है जो कि इस स्कूल से पढ़कर गांव से दर्जनों लोग सरकारी संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं पुलिस,आर्मी, अध्यापक, अनेकों महकमे में गांव के लोग होंगे इसी शिक्षा के मंदिर से पढ़कर आगे बढ़े हैं इसी विद्यालय की नींव को मजबूत करने के लिए गांव के भामाशाह स्व.कस्तुर सिंह जी के द्वारा दो रूम दिए गए जो आज भी शिक्षा के क्षेत्र में दिया हुआ योगदान इतिहास के रूप में याद किया जाता है।
खेल-कूद के क्षेत्र में घोनिया ग्राम पंचायत से कई युवा हैंडबॉल से नेशनल तक खेल कर आए हैं। एवं विद्यालय प्रांगण में बहुत अच्छे योगाभ्यास आधुनिक आइटम्स लगाए गए हैं। और घोनिया में स्वर्गीय भोपा मोहब्बत सिंह परिवार द्वारा स्व.मोहब्बत सिंह की स्मृति में 4 बीघा जमीन देखकर स्टेडियम की नींव तैयार कराई गई है। जो कि आने वाले वक्त में खेल कूद के क्षेत्र में इस गांव और क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
इंडियन विलेज डायरेक्ट्री में घोनीय गाँव की विस्तृत जानकारी https://web.archive.org/web/20160304202251/https://villageinfo.in/rajasthan/barmer/chohtan/ghoniya.html 4 मार्च 2016 (अँग्रेजी में)
सन्दर्भ
श्रेणी:बाड़मेर ज़िला
श्रेणी:राजस्थान के गाँव