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जगन्नाथ प्रसाद 'मिलिन्द'
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जगन्नाथ प्रसाद 'मिलिन्द' (1907-1986) हिन्दी के कवि एवं नाटककार थे।
जगन्नाथप्रसाद 'मिलिंद' का जन्म ग्वालियर के मुरार में हुआ था। उच्च शिक्षा काशी में हुई। आप हिंदी, उर्दू, बंगला, मराठी, गुजराती, संस्कृत और अंग्रेजी के ज्ञाता थे। इन्होंने शांति निकेतन तथा महिला आश्रम, वर्धा में अध्यापन किया एवं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन तथा राजनीति में भाग लिया।
श्री जगन्नाथ प्रसाद "मिलिंद" ने राष्ट्र के यौवन को बलि-पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी-
तुम नहीं डराये जा सकते शस्त्रों से, अत्याचारों से।
तुम नहीं सुलाये जा सकते थपकी से, प्यार-दुलारों से॥
कृतियाँ
उनके 6 नाटक (मुख्य 'प्रतापप्रतिज्ञा'), 2 खंड-काव्य, अनेक समीक्षा ग्रंथ तथा 8 काव्य-संग्रह प्रकाशित हैं, जिनमें 'अंतिमा', 'पूर्णा', 'बलिपथ के गीत', 'नवयुग के गान' और 'मुक्ति के स्वर' मुख्य हैं।
जीवन संगीत
नवयुवक का ज्ञान
बलिपथ के गीत
भूमि की अनुभूति
पंखुरियाँ
सम्मान एवं पुरस्कार
इन्हें 'साहित्य-वाचस्पति' तथा 'भारत-भाषा-भूषण' की उपाधि और अनेक साहित्य संस्थानों में सम्मान प्राप्त हुआ।
बाहरी कड़ियाँ
जगन्नाथ प्रसाद 'मिलिन्द' (कविता कोष)
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