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411 समाचार
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कालरात्रि

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Hindu Kalaratri.jpg ‎ कालरात्रि- नवदुर्गाओं में सप्तम् कालरात्रि कालरात्रि हिन्दू देवी सिद्धियां तलवार शिव गधा माँ दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं।https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/ 9 days, 9 avatars: Be ferocious like Goddess Kaalratri 27 सितंबर 2017 https://web.archive.org/web/20170615104643/http://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/ 15 जून 2017 dead दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन 'सहस्रार' चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी - काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री , धूम्रवर्णा कालरात्रि मां के अन्य कम प्रसिद्ध नामों में हैं | यह ध्यान रखना जरूरी है कि मां काली और कालरात्रि का उपयोग एक दूसरे के परिपूरक है, हालांकि इन दो देवीओं को कुछ लोगों द्वारा अलग-अलग सत्ताओं के रूप में माना गया है। डेविड किन्स्ले के मुताबिक, काली का उल्लेख हिंदू धर्म में लगभग ६०० ईसा के आसपास एक अलग देवी के रूप में किया गया है। कालानुक्रमिक रूप से, कालरात्रि महाभारत में वर्णित(लगभग 3200) ईसा पूर्व वर्तमान काली का ही वर्णन है |   मिश्रा, पी.के. (१९८९-०१-०१ ) संस्कृति, जनजातीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन: डॉ। एन.के. साहू स्मारक वॉल्यूम अगम कला प्रकाशन माना जाता है कि देवी के इस रूप में सभी राक्षस,भूत, प्रेत, पिशाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है, जो उनके आगमन से पलायन करते हैं | शिल्प प्रकाश में संदर्भित एक प्राचीन तांत्रिक पाठ, सौधिकागम, देवी कालरात्रि का वर्णन रात्रि के नियंत्रा रूप में किया गया है। सहस्रार चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णतः माँ कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य (सिद्धियों और निधियों विशेष रूप से ज्ञान, शक्ति और धन) का वह भागी हो जाता है। उसके समस्त पापों-विघ्नों का नाश हो जाता है और अक्षय पुण्य-लोकों की प्राप्ति होती है। श्लोक एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता | लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी || वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा | वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि || वर्णन इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें निःसृत होती रहती हैं। thumb| कालरात्रि का रक्तपान माँ की नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएँ निकलती रहती हैं । अपने पर्वत के समान दोनों स्तन से असुरोको धक्का देकर अन्त करती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गदहा) है। ये ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है। महिमा माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम 'शुभंकारी' भी है। अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। माँ कालरात्रि के स्वरूप-विग्रह को अपने हृदय में अवस्थित करके मनुष्य को एकनिष्ठ भाव से उपासना करनी चाहिए। यम, नियम, संयम का उसे पूर्ण पालन करना चाहिए। मन, वचन, काया की पवित्रता रखनी चाहिए। वे शुभंकारी देवी हैं। उनकी उपासना से होने वाले शुभों की गणना नहीं की जा सकती। हमें निरंतर उनका स्मरण, ध्यान और पूजा करना चाहिए। जय माता दी ।। नवरात्रि दिवस thumb|right|मां कालरात्रि मंदिर, नयागांव, सारण (बिहार), डुमरी बुजुर्ग गांव नवरात्रि की सप्तमी के दिन माँ कालरात्रि की आराधना का विधान है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है, तेज बढ़ता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में सातवें दिन इसका जाप करना चाहिए। मंदिर कालरात्रि मंदिर, डुमरी बुजुर्ग गांव ,नयागांव, सारण (बिहार)http://www.jagran.com/news/state-the-annual-pugnotsv-kalratri-temple-tue-text-14612396.html?src=RN_detail-page वार्षिक पूजनोत्सव को लेकर कालरात्रि मंदिर में मंगल पाठ 21 अगस्त 2017 https://web.archive.org/web/20170821171900/http://www.jagran.com/news/state-the-annual-pugnotsv-kalratri-temple-tue-text-14612396.html?src=RN_detail-page 21 अगस्त 2017 live कालरात्रि-वाराणसी मंदिर, डी 8/17, कालिक गाली, जो कि अन्नपूर्णा के समानांतर लेनिन - विश्वनाथ मंत्र माँ कालरात्रि के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कालरात्रि के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे पाप से मुक्ति प्रदान कर। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्रै नमः | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्री कालरात्रि सर्व वश्यं कुरु कुरु वीर्य देहि देहि गणैश्वर्यै नम:।https://bhagwatgeeta.co.in/kaalratri-mata-mantra/ मां कालरात्रि का मंत्र Jain Swarn 03/11/2024 Bhagwat Geeta 19/11/2024 सन्दर्भ 25em श्रेणी:नवदुर्गा