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लोधा
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लोधा भारत में रहने वाली एक प्राचीन हिंदू जाति है। प्राचीन वर्ण व्यवस्था में इस जाति को क्षत्रीय वर्ग का माना गया है और इस जाति के लोगों को लोध के नाम से जाना जाता था।Sharma Chhotey Lal जाति अन्वेषण भाग १ Jati Anveshan Volume -i छोटेलाल शर्मा - Chhotelal Sharma Hindi PDF Download Read Online – ePustakalay 20,41,59,79,287 & 288 https://epustakalay.com/book/4708-jati-anveshan-volume-i-by-chhotelal-sharma/ hi-IN कालान्तर में इस जाति को लोध से लोधा कहा जाने लगा|Sherring M. A. Hindu tribes and castes as represented in Benares Trubner and Co, Calcutta 348,349 1872 https://archive.org/details/dli.csl.6640 Nesfield John C. Brief view on the caste system of the North-Western Provinces and Oudh, together with an examination of the names and figures shown in the census report, 1882 North-Western Provinces and Oudh Government Press, Allahabad 14 https://archive.org/details/dli.csl.5949/page/n19/mode/1up ब्रिटिशकाल में लोधा जाति के लोग संयुक्त प्रान्तों से मध्य प्रान्तों की ओर फैल गये और वहां जाकर लोधा लोगों ने अपना नाम बदल कर लोधी कर लिया लेकिन इनका वास्तविक व स्थाई नाम लोधा ही है। Russell R. V. The Tribes and Castes of the Central Provinces of India—Volume IV 112-119 https://www.gutenberg.org/files/20668/20668-h/20668-h.htm en-uk Shriwastav P.N. Madhya Pradesh District Gazetteers: Narsimhapur https://indianculture.gov.in/gazettes/madhya-pradesh-district-gazetteers-narsimhapur en वर्तमान में इस जाति को लोध, लोधा व लोधी तीनों नामों से जाना जाता है तथा इन्हें असम, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरयाना, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड व तेलंगाना आदि राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों में शामिल किया गया है। जबकी अन्य राज्यों में इन्हें सामान्य जातियों में शामिल किया गया है। National Commission for Backward Classes http://www.ncbc.nic.in/user_panel/centralliststateview.aspx www.ncbc.nic.in
उत्पत्ति
लोधा जाति की उत्पत्ती प्राचीनतम पुस्तक ऋग्वेद के मण्डल 3, सुक्त 53 एवं मंत्र 23 में प्रयुक्त शब्द ‘लोधं’ से मानी जाति है। इस मंत्र में लोधं शब्द का प्रयोग एक कुशल योद्धा के गुणों को प्रदर्शित करने हेतु विशेषण के रूप में किया गया था। Rg Veda all 10 Mandalas https://archive.org/details/RgVeda/RigVedaMandal03 कहा जाता है कि चन्द्रवंश व सूर्यवंश के संघर्ष के समय चंद्रवंशी महाराज बुध ने ऋषी मुनियों की सलाह से इसी मंत्र की मंत्रणानुसार लोध गुण युक्त वीरों की सैना तैयार कर युद्ध में विजय प्राप्त की थी। बाद में इस सैना के वीरों की पहचान लोध क्षत्रीय के रूप में की जाने लगी जो कालान्तर में लोधा क्षत्रीय कहलाये।
ब्रिटिश इतिहासकारों ने लोधा जाति की उत्तपत्ती के बारे में अलग-अलग विचार व्यक्त किये हैं।
मैथ्यू एटमोर शैरिंग महोदय ने अपनी पुस्तक ‘हिन्दू ट्राईब्ज एण्ड कास्ट्स एज रिप्रजेन्टेड इन बनारस’ में लिखा है कि ‘‘लोध जाति के लोग मूलतः लोध नामक पेड़ की छाल को बेचा करते थे जो कि रंगाई व औषधी के रूप में काम आती थी इसीलिये ये लोग लोध कहलाये।’’
जे.सी. नेसफील्ड महोदय ने अपनी पुस्तक ‘ब्रीफ व्यू ऑफ कास्ट सिस्टम’ में लिखा है कि ‘‘लोधा शब्द अंग्रेजी के Clod-Breaker शब्द से बना है। यहां Clod का अर्थ ‘लोड’ से और Breaker का अर्थ ‘हा’ से है इन्हें जोड़ कर लोधा (Lod+ha) शब्द बनता है।’’
विलियम क्रुक महोदय ने अपनी पुस्तक ‘द ट्राईब्ज एण्ड कास्ट्स ऑफ नोर्थ वेस्टर्न एण्ड अवध’ में लिखा है कि ‘‘लोधा शब्द संस्कृत के लोधरा शब्द से बना है जिसका अर्थ है ‘एक पेड़ की छाल’ जो कि रंगाई के काम आती है चुंकि ये लोग प्रारम्भ में इस पेड़ की छाल को बेच कर जीवन यापन करते थे इसलिये ये लोधा कहलाये।’’ क्रुक का दूसरा मत था कि ‘‘लोधा शब्द संस्कृत के ‘लुब्धका’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है ‘एक निर्भीक’ या ‘एक शिकारी’।’’ जैसा कि इनके लिये कहा जाता है।Crooke W. Tribes and castes of the north -western provinces and oudh vol.3 364-370 https://indianculture.gov.in/rarebooks/tribes-and-castes-north-western-provinces-and-oudh-vol3 en
आर.वी. रस्सेल महोदय ने अपनी पुस्तक ‘‘द ट्राईब्ज एण्ड कास्ट ऑफ द सेन्ट्रल प्रोविन्सेस ऑफ इण्डिया’’ में लिखा है कि ‘‘मध्यप्रान्तों में ये पंजाब के लुधियाना से आये थे इसीलिये इन्हें लोधी कहा जाने लगा। इनका स्थाई नाम लोधा है।’’ इसी पुस्तक में आगे लिखा है कि ‘‘ सागर जिले में कहा जाता है कि पहले लोधी की उत्पत्ती महादेव जी के द्वारा कुर्मी महिला के खेत में स्थित बजूके से उस खेत की सुरक्षा के लिये की गई थी।’’
ई.ए. गैट महोदय ने सन् 1901 बंगाल की जनगणना रिपोर्ट में लिखा है कि ‘‘ इस जाति की उत्पत्ती के बारे में मिदनापुर में कहा जाता है कि इन्हें पाण्डवों ने शिकार के लिये चुना था जबकि मयूरभंज में ये राजा बली के वंशज कहे जाते हैं।Gait E. A Census Of India 1901 Vol.6 (lower Provinces Of Bengal And Their Leudatoties) Pt.1 (reports) 422 https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.55930/page/n434/mode/1up रमेश चंद्र गुणार्थी महोदय अपनी पुस्तक राजस्थानी जातियों की खोज में लिखते हैं कि लोधा जाति भी यदुवंशियों की एक शाखा मानी जाती है। यह राजा भूवनपाल के द्वितीय पुत्र सामंत की नस्ल से है, जिसने सर्व प्रथम पंजाब में जाकर लुधियाना नगर बसाया था। बस यहीं से इस सामंत की संप्रदाय सेना का नाम लोधा हुआ।राजाथानी जातियों की खोज गुणार्थी रमेश चंद्र श्री सरस्वती प्रकाशन 2000 श्री सरस्वती प्रकाशन, सेंट्रल बैंक के पीछे, चूड़ी बाजार, अजमेर पेज नंबर 140,141
इतिहास
लोधा जाति का अस्तित्व पौराणिक काल से है। पुराणों में कई जातियों का उल्लेख है जिन्हें सोध, रोध, लोध, बोध कहा जाता था लोधा इन्हीं के वंशज हैं।Crooke W. Tribes and castes of the north -western provinces and oudh vol.3 364-370 https://indianculture.gov.in/rarebooks/tribes-and-castes-north-western-provinces-and-oudh-vol3 en लोधा जाति क्षत्रिय वर्ण से है। स्मृतियों व अत्र संहिता से भी इस जाति की क्षत्रियत्वता सिद्ध होती है। मुगलकाल में भी लोधा जाति का उल्लेख लोधा, लोध राजपूत के रूप में मिलता है। मुगल बादशाह अकबर के समय आगरा, कोंण्डा व अहमदाबाद की शाही फौज में लोधा लोध राजपूत घुडसवार व सैनिक काफी संख्या में थे। Jarrett (Translator) H.S. 4551 Ain I Akbari Vol 2 (1978) 193 https://archive.org/details/dli.ernet.245022/page/n19/mode/1up?q
उत्तर पश्चिमी प्रान्तों (वर्तमान उत्तरप्रदेश) में
ब्रिटिशकालीन पुस्तकों में उत्तर पश्चिमी प्रान्तों (वर्तमान उत्तरप्रदेश) में लोधा जाति को कृषक वर्ग में एक स्वतंत्र जाति माना है और प्रमुख कृषक जातियों में इसका उल्लेख किया है। लोधा जाति के बारे में लिखा गया है कि ये अच्छे फसल उगाने वाले, शांत व मेहनती हैं।Atkinson Edwin T. (Edwin Thomas) Statistical, descriptive and historical account of the North-western Provinces of India Allahabad : Printed at the North-western Provinces' Government Press 267,331,345,347 https://archive.org/details/cu31924023947736 अवध क्षेत्र में ये अतिप्राचीन काल से रह रहे हैं। लगभग 9 सौ वर्ष हुए कांथ नामक लोधा ने कांथा नामक नगर बसाया था। जो कि उन्नाव जिले के पुरवा परगने में तहसील से 9 मील व सदर स्टेशन से 18 मील की दूरी पर है। लगभग एक हजार वर्ष हुए मांखी नामक लोधा ने मांखी नगर बसाया जो तहसील हसनगंज जिला उन्नाव में है। William Charles Benett Oudh Gazetteer of the Province of Oudh... Printed at the Oudh government press [etc.] 72-75,100,111,205,426 https://archive.org/details/gazetteerprovin00oudhgoog/page/n128/mode/1up?q English सन् 1921 में हुई जनगणना के अनुसार संयुक्त प्रान्तों, ब्रिटिश टेरेटरी, अवध व आगरा डिवीजन में लोधा जाति की जनसंख्या 10,46,816 थी।Census of India, 1921United Provinces of Agra and Oudh, Volume XVI 136,206,207 https://indianculture.gov.in/census-india-1921united-provinces-agra-and-oudh-volume-xvi-0 en संयुक्त व उत्तर पश्चिमी प्रान्तों (वर्तमान उत्तरप्रदेश) के लगभग सभी जिलों में विशेषकर आगरा, एटा, इटावा, मैनपुरी, झांसी, ललितपुर, सारंगपुर, अलीगढ़, बुलन्दशहर, मेरठ, बदायूं, बिजनौर, बरेली, कानपुर,लखनऊ, गोरखपुर, फरूखबाद व फतेहपुर आदि में लोधा जाति के लोग निवास करते थे और यहां ये सिर्फ कृषक ही नहीं है बल्कि भूस्वामी भी थे इसीलिये इन्हें यहां कई जगह ‘‘मुकादम’’ जमीदार भी कहा जाता था।Atkinson Edwin T. (Edwin Thomas) Statistical, descriptive and historical account of the North-western Provinces of India Allahabad : Printed at the North-western Provinces' Government Press 45,182 https://archive.org/details/cu31924023947744/page/n58/mode/1up Statistical descriptive and historical account of the North-Western provinces of India0 [Dr.:] North-West. Provinces' Governm. Press 48,51,73 https://books.google.co.in/books?id=CBTc7SPqr2kC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false en Statistical, Descriptive and Historical Account of the North-Western Provinces of India: Agra division part 1 North-Western Provinces Government 44,46,47 https://books.google.co.in/books?id=9XhRXus-_NgC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false en
मध्य प्रान्तों (वर्तमान मध्यप्रदेश) में
संयुक्त प्रान्तों से लोधा जाति के लोग मध्य प्रान्तों (वर्तमान मध्यप्रदेश) की ओर तेजी से बढे़। ये लोग नर्बदा घाटी, बांणगंगा और छत्तीसगढ़ के खैराबाद तक फैल गये। सन् 1911 की जनगणना के समय यहां इनकी जनसंख्या लगभग 3 लाख थी। मध्यप्रान्तों के हौशंगाबाद, जबलपुर, सागर, नरसिंगपुर, भांदरा, मण्डला, छिंदवाडा, रायपुर, व दमोह आदि जिलों में लोधा अधिक संख्या में रहते थे। यहां ये अपने स्वयं की भूमि के मालिक बन गये थे और उच्च कृषक वर्ग की जातियों की तरह अपने को ‘‘ठाकुर’’ करने लगे थे। पन्ना के राजा ने इनमें से कुछ परिवारों को राजा व दीवान की उपाधियां भी प्रदान की थीं। । इतिहासकारों के अनुसार जो लोग यहां पंजाब के लुधियाना से आये थे उन्हें लोधी कहा जाने लगा इनका स्थाई नाम लोधा है।Sherring M. A. Hindu Tribes And Castes Vol. 2 102,103 https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.38500
राजपुताने (वर्तमान राजस्थान) में
राजपुताने (वर्तमान राजस्थान) में लोधा जाति प्रमुख कृषक जाति मानी जाती थी। ये लोग पूर्वी राजपुताना जिलों में अधिक भूमि पर खेती करते थे। धौलपुर में ये 45 गांवों के मालिक थे तथा 91 और गांवों की भूमि का उपयोग करते थे इस प्रकार ये सन् 1880 में 17 हजार एकड़ भूमि को जोतते थे।Sherring M. A. Hindu Tribes And Castes Vol. 3 55 https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.38501/page/n74/mode/1up सन् 1697 से पूर्व करौली राज्य के दक्षिण पश्चिम में स्थित उंटगिरी तहसील लोधा लोगों के कब्जे में थी। लोधों के बनवाये बंध व तालाब आज भी यहां मौजूद हैं। देवरावल की दक्षिणी सीमा पर लोद्र राजपूत रहते थे, उनकी राजधानी का नाम लुद्रवा था यह जैसलमेर से 10 मील दूर पश्चिम में है। Gahlot Jagdish Singh राजपूताने का इतिहास भाग 1 Rajputane ka Itihas Vol.1 जगदीश सिंह गहलोत - Jagdish Singh Gehlot Hindi PDF Download Read Online – ePustakalay 588,639 https://epustakalay.com/book/3379-rajputane-ka-itihas-vol1-by-jagdish-singh-gehlot/ hi-IN सन् 1901 की जनगणना में राजपुताना क्षेत्र में लोधा लोगों की जनसंख्या 44,943 बताई गई थी। राजपुताने के जयपुर, भरतपुर, धौलपुर, कोटा, बूंदी, टोंक, झालावाड़, सिरोही, मेवाड़, मारवाड़, प्रतापगढ़, अलवर व शाहपुरा में लोधा अधिक संख्या में रहते थे।Bannerman A. D. Census of India 1901 vol.25-A (Rajputana); pt.2 (Imperial tables) 252 https://archive.org/details/in.gov.ignca.31044/page/250/mode/1up English
गुजरात और तेलंगाना में
सन् 1901 में हुई जनगणना के अनुसार गुजरात प्रांत के अहमदाबाद, काठियावाड़, पालनपुर में कुल 1585 और बड़ौदा में 20 लोधा रहते थे। इनका संबंध पंजाब के लुधियाना प्रांत से है जो कि काफी लंबे समय से बुंदेलखंड में रह रहे थे। https://archive.org/details/dli.csl.7823 The tribes and castes of Bombay vol.II Enthoven R. E. 1922 Government Central Press, Bombay 377-381
गुजरात में लोधा जाति के लोग अपनी उत्तपत्ति भगवान राम के समय के लोध से बताते हैं जो कालांतर में लोधा हो गया। ब्रिटिश शासन के समय लोधा उत्तर प्रदेश और बिहार से यहां आ गए थे। प्रारंभ में ये सेना में सैनिक के रूप में कार्य करते थे। बाद में ये घास काटने और बेचने का काम करने लगे। ये राजकोट, अहमदाबाद और कुछ अन्य जिलों में रहते हैं। https://archive.org/details/peopleofindia0002sing People of India Singh K. S. 1992 Calcutta : Anthropological Survey of India Internet Archive 978-81-85579-09-2 761-764
तेलंगाना में लोधे एक कृषक जाति है जो सम्भवतः संयुक्त प्रान्त, मध्य प्रान्त और बुन्देलखण्ड से हैदराबाद आकर बसी है। लोधे कुर्मी जाति के समान ही मेहनती और कुशल कृषक हैं लेकिन व्यवहार में ये कुर्मियों से भिन्न हैं। लोधे कष्यप गोत्र से सम्बन्ध रखते हैं।https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.202396 The Castes And Tribes Of H E H The Nizams Dominions Volume I Syed Siraj Ul Hassan 1920 1920 400-403
बंगाल व उडीसा में
लोध, लोधा व नोध जाति एन्गुल व उड़ीसा के सहायक राज्यों की आदिवासी जाति थी। कहा जाता है कि ये लोध सिंहभूम व मयूरभंज से आये थे और इनका सम्बन्ध मयूरभंज के नोध लोगों से है। जो कि यहां की प्राचीन जातियों में से एक है। मिदनापुर में सहर व साबर जनजाति को इसका पर्याय कहा जाता है। इनका पारम्परिक व्यवसाय जंगली उत्पादों लाख, कोकून, शहद आदि को इकट्ठा करना था। सहायक राज्यों में इन्हें लोधा खेडिया यहा जाता था।Gait E. A Census Of India 1901 Vol.6 (lower Provinces Of Bengal And Their Leudatoties) Pt.1 (reports) 422 https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.55930/page/n434/mode/1up
उपजातियां व गोत्र
आमोदिया,सोराया,उमरार,अमलेडिया,दतकाया,बाटोलिया,दसाया, पथरिया, मथुरिया, संकला जरिया, करहर, बनयान, लाखिया, खारिया, खागी, पनिस, कथारिया, माहोरिया, नरवरिया,तंवर, अन्तरवेदी,Crooke W. Tribes and castes of the north -western provinces and oudh vol.3 364-370 https://indianculture.gov.in/rarebooks/tribes-and-castes-north-western-provinces-and-oudh-vol3 en Statistical, Descriptive and Historical Account of the North-Western Provinces of India: Agra division part 1 North-Western Provinces Government 44,46,47 https://books.google.co.in/books?id=9XhRXus-_NgC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false en महदेले, भदौरिया, जरिया, खाकरहा, जैसारी, ओनतो, बसयान, चांदपुरिया, दौदांसिया, गुडलेया, हरदिया, जांगरा, जंघेल, किरबनियां आदि हैं।Robertson B Census of India, 1891. Volume XI, The Central Provinces and feudatories. Part I, The report: Census Reports - 1891 173,174 https://www.jstor.org/stable/saoa.crl.25352810?seq=1#metadata_info_tab_contents English पंडित छोटेलाल महोदय ने अपनी पुस्तक ‘जाति अन्वेषण’ में लोधा जाति के 515 उपभेद होना बताया हैं।
जनसंख्या
सन् 1891 में की गई जनगणना के अनुसार भारत में लोधा जाति की कूल जनसंख्या 160,74,098 थी। जिसमें सर्वाधिक जनसंख्या उत्तर पश्चिमी प्रान्तों (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में 20,29,213, मध्यप्रान्तों (वर्तमान मध्यप्रदेश) में 2,87,241 तथा राजपुताने (वर्तमान राजस्थान) में 45,524 बताई गई है।General Report of the Census of India, 1891 His Majesty’s Stationery Office (London) 191,192 https://archive.org/details/dli.granth.109811 Gait E. A. Census of India, 1911, Vol. I; India; Part I.-Report 1913 The Superintendent Government Printing (Calcutta) 396 https://archive.org/details/dli.granth.92537
संदर्भ
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श्रेणी:जाति