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बाई चाली सासरिए
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अंगूठाकार|बाई चाली सासरिए के अभिनेता
बाई चाली सासरिए मोहनसिंह राठोड़ भरत नाहटा (सुन्दर फ़िल्म्स) जगदीपललिता पवारनीलू वघेलाअलंकार ओ पी व्यास 1988 151 मिनट भारत राजस्थानी
बाई चाली सासरिए 1988 में प्रदर्शित राजस्थानी भाषा फ़िल्म है।Encyclopaedia of Indian cinema Ashish Rajadhyaksha and Paul Willemen Bai Chali Sasariye 446 British Film.... Institute 1994 0-85170-455-7 9780851704555 फ़िल्म १०० दिनों तक चली और राजस्थानी सिनेमा में इतिहास लिख दिया। द इंडियन एक्सप्रेस
Revival of Rajasthani films
http://www.screenindia.com/old/fullstory.php?content_id=8597
23 जुलाई 2004
8 जुलाई 2013
जून 2020 InternetArchiveBot
2004 में यह प्रतिवेदित हुआ कि इस फ़िल्म ने राजस्थानी भाषा को पुनर्जिवित करने की अभिरूचि में सहायक है,http://sify.com/movies/bollywood/fullstory.php?id=13504255 ओम पुरी -- अमरीश पुरी क्लेश आदर्श तारण 23 जून 2004 सिफी डॉट कॉम सिफ़ी 8 जुलाई 2013 https://web.archive.org/web/20040707043011/http://sify.com/movies/bollywood/fullstory.php?id=13504255 7 जुलाई 2004 dead लेकिन 2005 के एक लेख के अनुसार, जिसमें राजस्थानी फ़िल्म इंडस्ट्री के गिरते स्तर के बारे में चर्चा है में लिखा है कि राजस्थानी सिनेमा में पिछले 15 वर्षों में बाई चाली सासरिए एकमात्र सफल राजस्थानी फ़िल्म है।http://www.indiaglitz.com/channels/telugu/article/17119.html The lights dim on Rajasthan film industry Sharma Anil 1 अक्टूबर 2005 indiaglitz.com Indiaglitz 2009-07-11 https://web.archive.org/web/20121017073808/http://www.indiaglitz.com/channels/telugu/article/17119.html 17 अक्तूबर 2012 live फ़िल्म को हिन्दी पुनर्निर्माण के रूप में जुही चावला और ऋषि कपूर अभिनीत फ़िल्म में साजन का घर (1994) है। Imdb
Saajan ka ghar
http://www.imdb.com/title/tt0173156/
29 अप्रैल 1994
8 जुलाई 2013
https://web.archive.org/web/20130620154552/http://www.imdb.com/title/tt0173156/
20 जून 2013
live
इस फ़िल्म का निर्देशन भरत नाहटा ने किया है।http://www.bhaskar.com/article/c-20-55139-NOR.html हमारे पास सलमान और शाह रूख नहीं: नाहटा दैनिक भास्कर 17 जनवरी 2013 8 जुलाई 2013 रामेश्वर बोहरा
पटकथा
मूल रूप से यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जो अपने जन्म से ही विभिन्न बुरी परिस्थितियों का सामना करती है, जन्म के कुछ दिनों के बाद उसकी माँ की मृत्यु हो जाती है, इसका परिणाम यह होता है कि उसके पिता द्वारा उसे उसके परिवार के लिए अशुभ माना जाता है कि वह उसका चेहरा हमेशा के लिए नहीं रहेगा। और वह दूसरी महिला से शादी करता है और वह (सौतेली माँ) उसे प्रताड़ित करती है लेकिन उसका सौतेला भाई बहुत प्यार करने वाला और देखभाल करने वाला था। उसकी शादी एक आदमी से हुई है लेकिन उसकी सास उसे वंश के दीपक के रूप में एक बच्चा देने के लिए मजबूर करती है, वह गर्भवती हो जाती है और इस बीच उसका पति काम पर चला जाता है और आगे उसकी सास और भी अधिक प्रताड़ित करती है और उसे घर से बाहर निकाल देती है। इसके अलावा वह भोजन और पानी की तलाश में इधर-उधर घूमती है और अपने भाई से अपने दिल में मदद मांगती है। अंत में वह एक बच्चे को जन्म देती है और बच्चे को अपनी सास को सौंपती है और मर जाती है, उसके पति को इस बारे में पता चल जाता है और वह उसे अंतिम संस्कार में ले जाता है, जहाँ उसके पिता, जो अपनी बेटी के घर छोड़ने के बाद गरीबी से त्रस्त थे, अंतिम संस्कार के लिए लकडी काटते और उसी से अपना पेट भरते थे अंततः उन्हें अपने गलतियों का पश्चाताप होता है .जहाँ वह अपने कार्यों के लिए दोषी महसूस करता है और बहुत रोता है।
टिकट खिड़की
यह १९९०-२००५ के समय की सर्वाधिक सफलता प्राप्त करने वाली राजस्थानी फ़िल्म है। इसका श्री मोहनसिंह राठोड़ द्वारा निर्देशन भी सर्वश्रेष्ट रहा। यह पहली क्षेत्रीय फ़िल्म है जो भारत भर में ब्लॉकबस्टर रही। इसकी पुनर्निर्माण फ़िल्म माहेर ची सारी एक मराठी भाषा फ़िल्म है।
गाने
इस फ़िल्म के सभी गाने बहुत प्रचलित हुए थे और इसका शीर्षक गीत "बाई चाली सासरिए" लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक बालिका वधु जो कलर्स चैनल पर प्रस्तुत किया गया का शीर्षक गीत भी बना। फ़िल्म के कुछ निम्न हैं:
बाई चाली सासरिए
बना रे
भोमली आयी
हिवड़े रो हार
रुपियो तो ले म्हें
तलरिया मगरिया
वीरा रे
ये भी देखें
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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