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सरिय्या अली इब्न अबी तालिब (फ़िदक)
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सरिय्या हज़रत अली इब्न अबी तालिब रज़ि० फदक दिसंबर, 627AD, 6AH, 8th महीना, 6AH *बनू बक्र जनजाति के सदस्य भाग गए
मुसलमान माले ग़नीमत के रूप में 500 ऊंट और 2000 बकरियों को पकड़ते हैं The sealed nectar: biography of the Noble Prophet https://books.google.com/books?id=r_80rJHIaOMC&pg=PA395 Saifur Rahman Al Mubarakpuri 2005 Darussalam Publications 978-9960-89955-8 395 (online)Mufti M. Mukarram Ahmed https://books.google.com/books?id=lb-mAXOrxyIC&pg=PA229 Encyclopaedia of Islam Anmol Publications 205 81-261-2339-7 228–229 अली इब्न अबी तालिब वुबर बिन अलीम 200 अनजान अनजान 1 कब्जा कर लियाSa'd Ibn https://books.google.com/books?ei=AUL5Tf7sN8jIsgaVreXVDw&ct=result&id=_vnXAAAAMAAJ&dq Kitab al-tabaqat al-kabir,By Ibn Sa'd,Volume 2 1967 Pakistan Historical Society B0007JAWMK 110 SARIYYAH OF 'ALI IBN ABl TALIB AGAINST BANU SA'D IBN BAKR AT FADAK मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
सरिय्या हज़रत अली इब्न अबी तालिब रज़ि० या फ़िदक का अभियान (अंग्रेज़ी: Expedition of Ali ibn Abi Talib (Fadak) इस्लामी सैन्य अभियान था, दिसंबर, 627AD, 6AH, इस्लामिक कैलेंडर के 8वें महीने में हुआ इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद के आदेश पर साथी अली इब्न अबी तालिब को दो सौ (सहाबा) देकर एक प्लाटून के कमांडर के रूप में फदक नामक स्थान पर बनी साद बिन बकर जनजाति के ठिकाने की ओर भेजा गया था। मुहम्मद को कुछ खुफिया जानकारी मिली थी कि बनू बकर ने खैबर के यहूदियों का समर्थन करने के लिए रैंकों को इकट्ठा किया था।
अभियान (फदक)
इस्लाम के विद्वान सफिउर्रहमान मुबारकपुरी के अनुसार
यह सरिय्या शअबान 06 हिजरी में हजरत अली रजि० के नेतृत्व में भेजी गयी। इस की वजह यह हुई 'के अल्लाह क रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मालूम हुआ कि बनू साद की एक-टुकड़ी यहूदियों को कुमुक (मदद) पहुंचाना चाहती है, इसलिए आप ने हजरत अली रजि० को दो सौ आदमी देकर रवाना फरमाया। ये लोग रात में सफर करते और दिन में छिपे रहते थे। आख़िर एक जासूस पकड़ में आया और उस ने माना कि उन लोगों ने ख़ैबर को खजूरों के बदले सहायता जुटाने की पेशकश की है। जासूस ने यह भी बतलाया कि बनू साद मे किस जगह जत्थाबंदी की है। चुनांचे हज़रत अली रजि० ने उन फ छापा मार कर पांच सौ ऊंट और दो हजार बकरियों पर कब्जा कः लिया। अलबत्ता बनू साद अपनी औरतों और बच्चों समेत भाग निकले उन का सरदार वुबर बिन अलीम था। सफिउर्रहमान मुबारकपुरी पुस्तक अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ) सरिय्या दयारे बनी साद, इलाका फ़िदक https://archive.org/details/offlinedeeniapp_20210707_1905/Ar%20Raheequl%20Makhtoom%20Seerate%20Nabi/page/n653/mode/2up 13 दिसम्बर 2022 ६७४
सराया और ग़ज़वात
अंगूठाकार|
अरबी शब्द ग़ज़वा Ghazwa https://en.wiktionary.org/wiki/ghazwa इस्लाम के पैग़ंबर के उन अभियानों को कहते हैं जिन मुहिम या लड़ाईयों में उन्होंने शरीक होकर नेतृत्व किया,इसका बहुवचन है गज़वात, जिन मुहिम में किसी सहाबा को ज़िम्मेदार बनाकर भेजा और स्वयं नेतृत्व करते रहे उन अभियानों को सरियाह(सरिय्या) या सिरया कहते हैं, इसका बहुवचन सराया है।siryah https://en.wiktionary.org/wiki/siryah#English
ग़ज़वात और सराया की तफसील, पुस्तक: मर्दाने अरब, पृष्ट ६२] https://archive.org/details/mardane-arab-hindi-volume-no.-1/page/n32/mode/1up
इन्हें भी देखें
सरिय्या खालिद बिन वलीद (दूमतुल जन्दल)
ख़ालिद बिन वलीद
मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
मुहम्मद के अभियानों की सूची
ग़ज़वा ए दूमतुल जन्दल
सन्दर्भ
श्रेणी:मुहम्मद
श्रेणी:इस्लाम
श्रेणी:इस्लाम का इतिहास
श्रेणी:अरब इतिहास
श्रेणी:मुस्लिम विजय
बाहरी कड़ियाँ
Ar Raheeq Al Makhtum – The Sealed Nectar ( Biography Of The Noble Prophet)
अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ), पैगंबर की जीवनी (प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित पुस्तक), हिंदी (Pdf)