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देशबंधु गुप्ता
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देशबंधु गुप्त Deshbandhu Gupta 2010 stamp of India.jpg देशबन्धु गुप्त की स्मृति में भारत सरकार ने एक डाक-टिकट जारी किया। पंजाब प्रान्त की विधानसभा के सदस्य 1937 1945 दक्षिण-पूर्वी टाउन भारत की संविधान सभा के सदस्य 9 दिसम्बर 1946 24 जनवरी 1950 yes 1901 6 14 रति राम गुप्त पानीपत, हरियाणा yes 1951 11 21 1901 06 14 कोलकाता भारतीय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सोना देवी 9 सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली Freedom fighter politician journalist प्रेस की स्वतन्त्रता के समर्थक, पंजाब से हरियाणा को अलग करने के आन्दोलन में भाग ल्लिया।
लाला देशबंधु गुप्ता भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं पत्रकार थे। उन्होंने लाला लाजपत राय के समाचार पत्र वंदेमातरम में संपादक के रूप में सहयोग दिया। गुप्ता ने बाल गंगाधर तिलक के लेखों से प्रभावित होकर अपना जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के लिए समर्पित किया। साइमन कमीशन के दिल्ली पहुंचने पर उसका विरोध किया। वे अनेक बार जेल भी गए। लालाजी संविधान सभा के विशिष्ट सदस्य थे। देश के विभाजन के समय लाला जी ने दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में साम्प्रदायिक सदभाव बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देशबन्धु गुप्त का जन्म पानीपत में हुआ था। इनका मूल नाम रति राम गुप्त था। इनके पिता शादी राम गुप्त एक याचिका लेखक और वैदिक विद्वान थे। रति राम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पानीपत के एक मदरसे में पूरी की। इसके बाद इन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रखी।
ये हरियाणा के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत करने वाले पहले व्यक्ति थे। रति राम गुप्ता के कार्यों से प्रभावित होकर स्वामी श्रद्धानन्द और महात्मा गांधी ने इन्हें ‘देशबंधु’ की उपाधि दी जो सामान्य रूप से इनका प्रयुक्त नाम बन गया। इन्होंने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान इन्होंने अपना समर्थन प्रदर्शित करना जारी रखा। इन्होंने 1921 में दिल्ली कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में कार्य किया इसके बाद 1925 में दिल्ली नगर समिति के लिए चुने गए फिर 1947 में दिल्ली कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और भारत के संविधान सभा के लिए चुने गए।
एक प्रसिद्ध पत्रकार और संविधान सभा के सदस्य दोनों के रूप में इन्हें भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का दृढ़ता से समर्थन करने के लिए जाना जाता है। इन्होंने लाला लाजपत राय के अखबार ‘वंदे मातरम’ के संपादक के रूप में कार्य किया। इसके बाद स्वामी श्रद्धानंद के सहयोग से इन्होंने 'दैनिक तेज' अख़बार की स्थापना की जो उर्दू में ‘रोज़ाना तेज’ के नाम से प्रकाशित होता था।
कोलकाता हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना में 21 नवम्बर 1951 को इनका देहान्त हो गया।
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय पत्रकार
श्रेणी:स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी