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बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

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सितंबर 2024 सितंबर 2024 बगलामुखी मंदिर File:Bagulamki.jpg महाभारत काल त्रिशक्ति बगलामुखी देवी हिन्दू मन्दिर वास्तु कला नलखेड़ा, आगर मालवा ज़िला, मध्य प्रदेश 23.8415706 76.2337537 inline माता बगलामुखी का यह मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे में लखुन्दर नदी के किनारे स्थित है। यह मन्दिर तीन मुखों वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी को समर्पित है।।अरिहंत विशेषज्ञ 2021 Humara Madhya Pradesh Hindi https://www.google.co.th/books/edition/Hamara_Madhya_Pradesh/tNBSEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0,+%E0%A4%A8%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE&pg=PA83&printsec=frontcover अरिहंत पब्लिकेशन इंडिया लिमिटेड 9789325296183 मान्यता है कि द्वापर युग से चला आ रहा यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक भी है। इस मन्दिर में विभिन्न राज्यों से तथा स्थानीय लोग भी एवं शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं इन्ही में एक है सिद्ध योगी श्री श्री 1008 स्वामी सांदीपेन्द्र जी महाराज! यहाँ बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती की मूर्तियां भी स्थापित हैं।https://www.patrika.com/ujjain-news/baglamukhi-mata-mandir-nalkheda-1250753/ बगलामुखी मन्दिर में दूर होते हैं नेताओं के संकट २५ मार्च २०१६ सक्सेना, ललित 9 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180409110011/https://www.patrika.com/ujjain-news/baglamukhi-mata-mandir-nalkheda-1250753/ 9 अप्रैल 2018 live कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय के उद्देश्य सेhttps://www.patrika.com/agar-malwa-news/baglamukhi-mandir-nalkheda-temple-known-for-tantra-sadhna-1411626/ तन्त्र का स्थान है नलखेड़ा, विराजित हैं माँ बगलामुखी जैन, राजीव 9 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180409171459/https://www.patrika.com/agar-malwa-news/baglamukhi-mandir-nalkheda-temple-known-for-tantra-sadhna-1411626/ 9 अप्रैल 2018 live भगवान कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने की थी।http://spiritualsys.com/157/ बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा ओंकार कुमार २२ फ़रवरी २०१५ 9 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180409171607/http://spiritualsys.com/157/ 9 अप्रैल 2018 dead मान्यता यह भी है कि यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है।http://hindi.webdunia.com/article/religious-journey-articles/माँ-बगलामुखी-का-प्राचीन-मंदिर-108110100059_1.htm माँ बगलामुखी का प्राचीन मंदिर अनिरुद्ध जोशी 'शतायु' वेब दुनिया 15 जून 2020 https://web.archive.org/web/20190424021748/http://hindi.webdunia.com/article/religious-journey-articles/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-108110100059_1.htm 24 अप्रैल 2019 dead प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख है जिनमें से एक है बगलामुखी। माँ भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। यह मन्दिर उन्हीं से एक बताया जाता है इतिहास मंदिर के बाहर सोलह खंभों वाला एक सभामंडप है जो आज से लगभग २५२ वर्षों से संवत १८१५ में पंडित ईबुजी दक्षिणी कारीगर श्रीतुलाराम ने बनवाया था। इसी सभामंडप में एक कछुआ भी स्थित है जो देवी की मूर्ति की ओर मुख करता हुआ है। किंवदंती है कि यहां पुरातन काल से देवी को बलि चढ़ाई जाती थी। मंदिर के सामने लगभग ८० फीट ऊँची एक दीप मालिका बनी हुई है, जिसका निर्माण राजा विक्रमादित्य द्वारा ही करवाया गया था। प्रांगण में ही एक दक्षिणमुखी हनुमान का मंदिर, एक उत्तरमुखी गोपाल मंदिर तथा पूर्वर्मुखी भैरवजी का मंदिर भी स्थित है। मुख्य द्वार सिंहमुखी है। इस मंदिर में लोग अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु एवं विभिन्न क्षेत्रों में विजय प्राप्त करने के लिए यज्ञ, हवन या पूजन-पाठ कराते हैं। यह मंदिर श्मशान क्षेत्र में स्थित है। बगलामुखी माता तंत्र की देवी हैं, अतः यहाँ पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है। इस मंदिर की मान्यता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यहाँ की मूर्ति स्वयंभू और जागृत है। मंदिर में बहुत से वृक्ष हैं, जिनमें बिल्वपत्र, चंपा, सफेद आँकड़ा, आँवला, नीम एवं पीपल के वृक्ष एक साथ स्थित हैं। इसके आसपास सुंदर और हरा-भरा बगीचा भी बना हुआ है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ भक्तों का ताँता लगा रहता है। मंदिर श्मशान क्षेत्र में होने के कारण वर्षभर यहाँ तंत्र हवन हेतु लाखों की संख्या में लोग आते हैं। मंदिर के पीछे लखुन्दर नदी (जिसका पुराना नाम लक्ष्मणा था) के तट पर संत व मुनियो की कई समाधियाँ जीर्ण अवस्था में स्थित है, जो आज भी इस मंदिर में संत मुनियों का रहने का प्रमाण है। आवागमन सड़क मार्ग द्वारा इंदौर से लगभग १६५ किमी की दूरी पर स्थित नलखेड़ा पहुँचने के लिए देवास या उज्जैन के रास्ते से जाने के लिए बस और टैक्सी उपलब्ध हैं। वायु मार्ग से पहुंचने हेतु नलखेड़ा के निकटतम इंदौर का विमानक्षेत्र है। रेल मार्ग द्वारा इंदौर से ३० किमी पर स्थित देवास या लगभग ६० किमी मक्सी पहुँचकर भी आगर मालवा जिले के कस्बे नलखेड़ा पहुँच सकते हैं। सन्दर्भ इन्हें भी देखें बाहरी कड़ियाँ Bagalamukhi बगलामुखी मंदिर sri sri 1008 paramhans swami sandipendra ji maharaj nalkheda baglamukhi mandir श्रेणी:मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल श्रेणी:मध्य प्रदेश के हिन्दू मंदिर श्रेणी:बगलामुखी मन्दिर श्रेणी:देवी मन्दिर