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411 समाचार
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मैथिल ब्राह्मण

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मैथिल ब्राह्मणों का नाम मिथिला के नाम पर पड़ा है। मिथिला के ब्राह्मणो को मैथिल ब्राह्मण कहा जाता है। मिथिला प्राचीन काल में भारत का एक राज्य था। मिथिला वर्तमान में एक सांस्कृतिक क्षेत्र है जिसमे बिहार के तिरहुत, दरभंगा, मुंगेर, कोसी, पूर्णिया और भागलपुर प्रमंडल तथा झारखंड के संथाल परगना प्रमंडलhttps://books.google.co.in/books?id=O49ZDwAAQBAJ&pg=RA1-PR20&f=false Sushasan Ke Aaine Mein Naya Bihar Pankaj Kumar Jha 2010 Prabhat Prakashan Bihar (India) 9 दिसंबर 2018 https://web.archive.org/web/20190328031449/https://books.google.co.in/books?id=O49ZDwAAQBAJ&pg=RA1-PR20&f=false 28 मार्च 2019 liveके साथ-साथ नेपाल के प्रदेश संख्या २, प्रदेश संख्या १ के कुछ जिले और प्रदेश संख्या ३ का चितवन जिला भी शामिल हैं। जनकपुर , दरभंगा और मधुबनी मैथिल ब्राह्मणो का प्रमुख सांस्कृतिक केंन्द्र है। मैथिल ब्राह्मण बिहार , नेपाल , झारखण्ड प्रदेश के देवघर व देवघर के आस-पास के क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय ब्रज क्षेत्र आगरा, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा के आस-पास के क्षेत्रों में अधिक हैं। मैथिल ब्राह्मण पंच गौड़ ब्राह्मणों में से एक हैं। पंच गौड़ ब्राह्मणों के अंतर्गत मैथिल ब्राह्मण , कान्यकुब्ज ब्राह्मण , सारस्वत ब्राह्मण , गौड़ ब्राह्मण , उत्कल ब्राह्मण हैंhttps://books.google.com/books?id=g6FsB3psOTIC&pg=PA651 The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z James G. Lochtefeld Rosen 2002 9780823931804 490–491 10 दिसंबर 2018 https://web.archive.org/web/20160508193344/https://books.google.com/books?id=g6FsB3psOTIC&pg=PA651 8 मई 2016 live https://books.google.com/books?id=lXyWE6KbG8oC&pg=PA168 Caste in Life: Experiencing Inequalities D. Shyam Babu and Ravindra S. Khare Pearson Education India 2011 9788131754399 168 https://www.cambridge.org/core/journals/modern-asian-studies/article/raja-and-rank-in-north-bihar/506B67D93D2D5F4E014A4D4A7F696797# संग्रहीत प्रति 31 दिसंबर 2018 https://web.archive.org/web/20190101002709/https://www.cambridge.org/core/journals/modern-asian-studies/article/raja-and-rank-in-north-bihar/506B67D93D2D5F4E014A4D4A7F696797 1 जनवरी 2019 live | इतिहास मिथिला क्षेत्र के कुछ राजवंश परिवार, जैसे ओइनवार वंश, दरभंगा राज ( खण्डवाल ) मैथिल ब्राह्मण थें और मैथिल संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध थे।https://books.google.com/books?id=bu61AAAAIAAJ&q=oinwars+maithil+brahmin&dq=oinwars+maithil+brahmin&hl=en&sa=X&redir_esc=y Civilizational Regions of Mithila & Mahakoshal 64 1960 और 1970 के दशक में बिहार में मैथिल ब्राह्मण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गए। पं. बिनोदानंद झा और ललित नारायण मिश्र समुदाय के प्रमुख राजनीतिक नेताओं के रूप में उभरे। डॉ. जगन्नाथ मिश्र के मुख्यमंत्री के समय कई मैथिल ब्राह्मणों ने बिहार में महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर विचार किया।Verma Ravindra Kumar Caste and Bihar Politics Economic and Political Weekly May 1991 26 18 1142–4 https://www.jstor.org/discover/10.2307/41498247?uid=3738256&uid=2134&uid=2&uid=70&uid=4&sid=21101829478883 28 March 2013 Sameeksha Trust धार्मिक परम्पराएँ मैथिल ब्राह्मण मुख्य रूप से शाक्त हैं, हालांकि वैष्णव और शैव भी हैं।Makhan Jha Anthropology of Ancient Hindu Kingdoms: A Study in Civilizational Perspective https://books.google.com/books?id=A0i94Z5C8HMC&pg=PA38 1997 M.D. Publications Pvt. Ltd. 978-81-7533-034-4 38– 2 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20160522081841/https://books.google.com/books?id=A0i94Z5C8HMC&pg=PA38 22 मई 2016 live मैथिल ब्राह्मण जो शाक्त हैं, भगवती (शक्ति) की पूजा करते हैं।Religious Life of the Brahman: A Case Study of Maithil Brahmans https://books.google.co.in/books?id=f3LXAAAAMAAJ Asim Maitra Inter-India Publications 1986 54 2 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20180717124801/https://books.google.co.in/books?id=f3LXAAAAMAAJ 17 जुलाई 2018 live विभाग वैदिक संहिता के अनुसार, मैथिल ब्राह्मणों को छान्दोग्य(सामवेद) और वाजसनेयी(यजुर्वेद) में विभाजित किया गया है और प्रत्येक समूह सख्ती से अतिरंजित है। उन्हें आगे भी चार मुख्य श्रेणियों श्रोत्रिय, योग्य, पंजी और जयवार द्वारा वर्गीकृत किया गया है https://books.google.com/?id=A0i94Z5C8HMC&pg=PA32&dq=hierarchy+maithil+brahmins#v=onepage&q=hierarchy%20maithil%20brahmins&f=false Anthropology of Ancient Hindu Kingdoms: A Study in Civilizational Perspective 6 April 2017 32 9788175330344 Jha Makhan 1997 । उल्लेखनीय व्यक्ति वाचस्पति मिश्र - दार्शनिक, भामती मण्डन मिश्र - दार्शनिक, पूर्व मीमांसा के आचार्य उदयनाचार्य - न्यायशास्त्र के आचार्य गंगेश उपाध्याय - न्यायशास्त्र के आचार्य, नव्य-न्याय के प्रणेता वर्धमान उपाध्याय - न्यायशास्त्र के आचार्य गोनू झा (भरवाड़ा) स्वर्गीय गोनू झा 13वीं सदी में दरभंगा महाराज शिव सिंह के समकालीन थे, वे हाजिर जवाबी, महान कर्मकांडी, धृष्ट  शिरोमणि महामहोपाध्याय के नामों से पूरे विश्व में प्रख्यात है, इनकी रोचक कहानियां आज भी मिथिलांचल में बड़े हर्ष के साथ सुनाई जाती है। जिर जवाबी महाराजाधिराज रामेश्वर सिंह ठाकुर - दरभंगा महाराज , महान तन्त्राचार्य अयाची मिश्र - प्रसिद्ध नैयायिक शंकर मिश्र - कवि, न्याय व वैशेषिक दर्शन के आचार्य पार्थसारथि मिश्र - मीमांसा दर्शन के आचार्य विद्यापति - महान मैथिली कवि नरेन्द्र झा - भारतीय अभिनेता उदित नारायण - पार्श्व गायक मैथिली ठाकुर - पार्श्व गायिका बिनोदानंद झा - पूर्व मुख्यमंत्री बिहार चतुरानन मिश्र- पूर्व कृषि मंत्री, भारत सरकार जगन्नाथ मिश्र - पूर्व मुख्यमंत्री बिहार ललित नारायण मिश्र - पूर्व रेलमंत्री, भारत सरकार नागार्जुन - वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र, हिंदी एवं मैथिली कवि प्रभात झा- राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा, पूर्व राज्यसभा सांसद मध्यप्रदेश डॉ सुभद्र झा - भाषावैज्ञानिक, Formation of Maithili Language, Songs of Vidyapati प्रवास जीवन, नातिक पत्रक उत्तर जैसे कई कालजयी ग्रन्थों के रचयिता,अनुवादक,मैथिली साहित्यकार, बिहार के विश्वविद्यालय के पहले D Litt, कई भाषाओं के ज्ञाता, मैथिली और संस्कृत के विद्वान सर डॉ गंगानाथ झा - संस्कृत और मैथिली के विद्वान,मीमांसा पर कालजयी शोध, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 1923 से 1932 तक तीन बार कुलपति,अनुवादक, कई ग्रंथों के रचयिता डॉ अमरनाथ झा - अंग्रेजी और मैथिली के विद्वान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 1938 से 1947 तक तीन बार कुलपति, उत्तर प्रदेश और बिहार लोक सेवा आयोग के अध्य्क्ष डॉ आदित्यनाथ झा - ICS, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, वाराणसेय संस्कृत विश्विद्यालय(वर्तमान सपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय) के प्रथम कुलपति, दिल्ली के प्रथम उपराज्यपाल, अंग्रेजी और संस्कृत के विद्वान डॉ लक्ष्मी कान्त झा - ICS, रिज़र्व बैंक के गवर्नर, जम्मू कश्मीर के गवर्नर,Economic Administration Reforms Commission के चेयरमैन, अमेरिका में भारत के राजदूत पंडित गंगाधर पाठक जी श्री राम जन्म भूमि शिलापूजन मुख्य आचार्य यजमान श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री भारत सरकार https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/mathura/here-is-what-ram-mandir-bhumi-pujan-pandit-demanded-from-pm-narendra-modi/articleshow/77398635.cms राम मंदिर का भूमि पूजन कराने वाले पंडित ने यजमान पीएम मोदी से मांगी दक्षिणा Navbharat Times hi 2025-12-31 ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण वे ब्राह्मण हैं जो गयासुद्दीन तुग़लक़ से लेकर अकबर के शासन काल तक तिरहुत (मिथिला) से भारत की तत्कालीन राजधानी आगरा में बसे तथा समयोपरान्त केन्द्रीय ब्रज के तीन जिलो मे औरंजेब के कुशासन से प्रताड़ित होकर बस गये। ब्रज मे पाये जाने वाले मैथिल ब्राह्मण उसी समय से ब्रज मे प्रवास कर रहे हैं। जो कि मिथिला के गणमान्य विद्वानो द्वारा शोधोपरान्त ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मणो के नाम से ज्ञात हुए। ये ब्राह्मण ब्रज क्षेत्र के आगरा, अलीगढ़, मथुरा,और हाथरस मे प्रमुख रूप से रहते हैं। यहा से भी प्रवासित होकर यह दिल्ली, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, बड़ोदा, दाहौद, लख्ननऊ, कानपुर आदि स्थानो पर रह रहे हैं। गयासुद्दीन तुगलक से लेकर अकबर के शासन काल और दारा शिकोह के समय तक मिथिला से आगरा राजधानी में राजनैतिक, धार्मिक, तांत्रिक, और साहित्यिक अनुष्ठानों हेतु पधारे इन ब्राह्मणों को औरंगज़ेब के शासन काल में प्रताड़ित होने पर आगरा छोड़कर अलीगढ, मथुरा, हाथरस और आगरा के निकटवर्ती ग्रामों में लम्बे समय तक छुपकर रहना पड़ा । ब्रज प्रदेश में रहने वाले मैथिलों का मिथिलावासी मैथिलों से आवागमन भी बंद हो गया। ऐसा १६५८ ई० से लेकर १८५७ की क्रान्ति तक चलता रहा . १८५७ ई० के बाद भारतीय समाज सुधारकों ने एक आजाद भारत का सपना देखा था। मिथिला का ब्राह्मण समाज भी आजाद भारत का सपना देखने लगा। 'स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने ठीक इसी समय जाती उत्थान की आवाज को बुलंद किया। उन्होंने जाती उत्थान के लिए सम्पूर्ण भारत में बसे मिथिला वासियों से संपर्क किया जिसका परिणाम यह हुआ की औरंगज़ेब के समय में मिथिलावासी और प्रवासी मैथिल ब्राह्मणों  के जो सम्बन्ध टूट गए थे वह फिर से चालू हो गए। उन्हीं के प्रयासों से अलीगढ़ के मैथिल ब्राह्मणों  का मिथिला जाना और मिथिलावासियों का अलीगढ़ आना संभव हुआ। इसी समय स्वामी जी ने मिथिला से लौटकर अलीगढ़ में मैथिल सिद्धांत सभा का आयोजन किया। सिद्धांत सभा के कार्यकर्ताओं और मिथिलावासी रुना झा द्वारा १८८२ से १८८६ के बीच  पत्र व्यवहार आरम्भ हुआ। पंजी व्यवस्था मैथिल ब्राह्मणो में पंजी (मिथिला) पंजी -व्यवस्था है, जो मैथिल ब्राह्मणों वंशावली लिखित रूप से रखती है। सन्दर्भ मैथिल ब्राह्मणो की पंजी व्यवस्था लेखक पं गजेन्द्र ठाकुर Christopher Alan Bayly, Rulers, Townsmen, and Bazaars: North Indian Society in the Age of British Expansion, 1770–1870, Cambridge University Press, 1983. Anand A. Yang, Bazaar India: Markets, Society, and the Colonial State in Bihar, University of California Press, 1999. "A History of brahmin calan" by Pt. Dorilal sharma shrotriya., "Hamaare Pravaas ka itihaas" by Pt. phool bihari sharma. "Vidhyapati dairy"1972 Granthalaya Prakashan Darbhanga, "Ain-a-Akbari" By Abul fazal श्रेणी:ब्राह्मण