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411 REFERENCE · Wikipedia

जम्बूद्वीप दिगम्बर जैन मन्दिर

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जनवरी २०२६Jambudweep जनवरी २०२६ जम्बूद्वीप जैन धर्म Jambudweep Rachna.jpg जम्बूद्वीप में स्थित मेरु‑पर्वत का रूपांकन India Uttar Pradesh 29 09 56.7 N 78 00 24.4 E region:IN inline,title 250 हस्तिनापुर, उत्तर प्रदेश, भारत तीर्थंकर https://www.jambudweep.org ज्ञानमति माताजी १९७२ 250जम्बूद्वीप उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर में स्थित एक दिगम्बर जैन मन्दिर है, जिसका निर्माण जैन आर्यिका ज्ञानमति द्वारा १९७२ (वीर निर्वाण संवत् २४९९) में कराया गया। जम्बूद्वीप जैन ब्रह्माण्डविज्ञान के जम्बूद्वीप का रूपांकन है। परिचय जम्बूद्वीप की स्थापना ज्ञानमती द्वारा संवत् १९७२ (वीर निर्वाण संवत् २४९९) में की गई तथा जम्बूद्वीप के प्रतिरूप का निर्माण १९८५ में पूर्ण हुआ। तीर्थ के विषय में नलिनी बलबीर ने उल्लेख किया—इस विस्तीर्ण परिसर का मुख्य आकर्षण जम्बूद्वीप है। अपनी ऊँचाई के कारण यह मौलिक निर्माण अन्य सभी भवनों पर प्रभुत्व स्थापित करता है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को शिक्षित करना है, क्योंकि यह उन्हें जैन ब्रह्माण्ड की संरचना का प्रत्यक्ष दर्शन कराता है, साथ ही यह मनोरञ्जन का भी माध्यम है। आन्तरिक सीढ़ियों द्वारा शिखर तक पहुँचा जा सकता है अथवा लवणसमुद्र के चारों ओर नौकायन किया जा सकता है।Keul 2015 83-84 नलिनी बलबीरजैन ब्रह्माण्ड‑विज्ञान के जम्बूद्वीप‑प्रतिरूप का निर्माण १९८५ में ज्ञानमती के पर्यवेक्षण में सम्पन्न हुआ। जैन ब्रह्माण्ड‑विज्ञान के वृत्ताकार ढाँचे ‘जम्बूद्वीप’ का निर्माण श्वेत तथा वर्णित संगमरमर से किया गया है। इसका व्यास लगभग ७६ मी॰ (२५० फ़ीट) है तथा इसके मध्य में स्थित ३१ मी॰ (१०१ फ़ीट) ऊँचा मेरु पर्वत हल्के पाटल संगमरमर से निर्मित है। इस मन्दिर की मूल अवधारणा यह है कि भक्तों की देवदर्शन‑यात्रा को आध्यात्मिक साहसिकता से जोड़ा जाए तथा उन्हें जैन ब्रह्माण्ड‑विज्ञान का शिक्षण प्रदान किया जाए। तीर्थ का आधिकारिक नाम दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान है और इसका मुख्य आकर्षण जम्बूद्वीप का प्रतिरूप‑निर्मित विशाल भवन है। कथा जम्बूद्वीप से सम्बन्धित कथा के अनुसार, ज्ञानमती को ध्यानावस्था में १९६५ (वीर निर्वाण संवत् २४९२) में एक दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई, जिसमें उन्होंने सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड‑संरचना का अवलोकन किया। बाद में जब उन्होंने जैन ग्रन्थों का अध्ययन किया, तो ज्ञात हुआ कि उनकी दृष्टि जैन त्रिलोक‑वर्णनों से मेल खाती है; इसी प्रेरणा से उन्होंने जम्बूद्वीप का प्रतिरूप निर्मित कर तीर्थ‑स्थल स्थापित करने का संकल्प लिया। जैन दर्शन के प्रसार हेतु जम्बूद्वीप ने २००७ (वीर निर्वाण संवत् २५३४) में अपना जालस्थल विकसित किया, जिसके माध्यम से जैन साहित्य का ऑनलाइन संकलन उपलब्ध कराया गया और दो सहस्र से अधिक ग्रन्थों का अंकीय (डिजिटल) अभिलेख रखा गया है। चित्रदीर्घा सन्दर्भ श्रेणी:जैन धर्म श्रेणी:मन्दिर श्रेणी:मन्दिर आधार श्रेणी:मंदिर श्रेणी:जैन त्योहार श्रेणी:जैन कला श्रेणी:उत्तर प्रदेश में जैन मन्दिर