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क्रीटेशस-पैलियोजीन विलुप्ति घटना
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240px|thumb|एक क्षुद्रग्रह के पृथ्वी पर प्रहार का काल्पनिक चित्रण
240px|thumb|अमेरिका में मिला यह पत्थर के-टी सीमा साफ़ दर्शाता है - बीच की पतली परत में पत्थर के ऊपरी व निचले हिस्सों से १००० गुना अधिक मात्रा में इरिडियम है
क्रीटेशस-पैलियोजीन विलुप्ति घटना (Cretaceous–Paleogene extinction event), जिसे क्रीटेशस-टरश्यरी विलुप्ति (Cretaceous–Tertiary extinction) भी कहते हैं, आज से लगभग ६.६ करोड़ साल पूर्व गुज़रा वह घटनाक्रम है जिसमें बहुत तेज़ी से पृथ्वी की तीन-चौथाई वनस्पति व जानवर जातियाँ हमेशा के लिये विलुप्त हो गई। सूक्ष्म रूप से इसे "के-टी विलुप्ति" (K–T extinction) या "के-पीजी विलुप्ति" (K–Pg extinction) भी कहा जाता है। इस घटना के साथ पृथ्वी के प्राकृतिक इतिहास के मध्यजीवी महाकल्प (Mesozoic Era, मीसोज़ोइक महाकल्प) का चाकमय कल्प (Cretaceous Period, क्रीटेशस काल) नामक अंतिम चरण ख़त्म हुआ और नूतनजीव महाकल्प (Cenozoic Era, सीनोज़ोइक महाकल्प) आरम्भ हुआ, जो कि आज तक जारी है।http://www.stratigraphy.org/index.php/ics-chart-timescale International Chronostratigraphic Chart International Commission on Stratigraphy 2015 29 April 2015 https://web.archive.org/web/20170113013553/http://www.stratigraphy.org/index.php/ics-chart-timescale 13 जनवरी 2017 liveRenne Paul R. Deino Alan L. Hilgen Frederik J. Kuiper Klaudia F. Mark Darren F. Mitchell William S. Morgan Leah E. Mundil Roland Smit Jan Time Scales of Critical Events Around the Cretaceous-Paleogene Boundary Science 7 February 2013 339 6120 684–687 10.1126/science.1230492 23393261 http://www.sciencemag.org/content/339/6120/684 2013Sci...339..684R 10 जुलाई 2015 https://web.archive.org/web/20150924163538/http://www.sciencemag.org/content/339/6120/684 24 सितंबर 2015 liveFortey R Life: A Natural History of the First Four Billion Years of Life on Earth Vintage 1999 238–260 978-0-375-70261-7
प्रस्तावित कारण
दुनिया-भर में समुद्र और धरती पर मिलने वाले पत्थरों में एक पतली लेकिन स्पष्ट परत दिखती है जिसे के-पीजी या के-टी सीमा कहा जाता है। इस परत में इरिडियम नामक धातु की अधिक मात्रा (संकेंद्रण, कॉन्सनट्रेशन) है, हालांकि यह धातु पृथ्वी की ऊपरी सतहों में तो कम संकेंद्रण में और क्षुद्रग्रहों (ऐस्टरायडों) में अधिक संकेंद्रण में मिलती है। इस से कुछ वैज्ञानिकों ने यह विचार रखा कि सम्भव है कि लगभग ६.६ करोड़ साल पूर्व एक बड़ा क्षुद्रग्रह या धूमकेतु पृथ्वी से आ टकराया हो और इस प्रहार से पैदा हुई परिस्थितियों ने ही क्रीटेशस-पैलियोजीन विलुप्ति को अंजाम दिया हो। उनकी सोच थी कि इस वस्तु के पृथ्वी पर प्रहार के असर तो बुरे थे ही लेकिन उसके तुरंत उपरांत वायु में इतनी धूल व मलबा उछल गया जो वर्षों तक सूरज की किरणों को ज़मीन तक पहुँचने से रोकता रहा। पूरे ग्रह पर अत्यधिक ठंड हो गई और प्रकाश के आभाव से पहले वनस्पति और फिर उन पर निर्भर प्राणी मरने लगे। जब यह प्रहार प्रस्ताव सबसे पहले रखा गया तो इसकी खिल्ली उड़ाई गई लेकिन धीरे-धीरे इसको बल देने वाले सबूत मिलने लगे। १९९० के दशक में मेक्सिको की खाड़ी में चिकशुलूब क्रेटर मिला, जो लगभग १८० किमी चौड़ा था और स्थानीय राख-पत्थर की जाँच से जिसकी आयु भी लगभग ६.६ करोड़ वर्ष पाई गई।Vellekoop J, Sluijs A, Smit J Rapid short-term cooling following the Chicxulub impact at the Cretaceous-Paleogene boundary Proc. Natl. Acad. Sci. U.S.A. 111 21 7537–41 May 2014 24821785 10.1073/pnas.1319253111 and others 1 2014PNAS..111.7537V Smit Schouten Weijers Sinninghe Damste Brinkhuis Hildebrand A. R. Penfield G. T. 2 Kring David A. Pilkington Mark Camargo Z. Antonio Jacobsen Stein B. Boynton William V. 1991 Chicxulub crater: a possible Cretaceous/Tertiary boundary impact crater on the Yucatán peninsula, Mexico https://archive.org/details/sim_geology_1991-09_19_9/page/867 Geology 19 9 867–871 10.1130/0091-7613(1991)019<0867:ccapct>2.3.co;2 1991Geo....19..867H वर्तमान काल में आम वैज्ञानिक-मत यही है कि क्रीटेशस-पैलियोजीन विलुप्ति का कारण एक क्षुद्रग्रह प्रहार ही था और पत्थरों मे दिखने वाली के-टी सीमा उसी धटना की निशानी है।
इन्हें भी देखें
पृथ्वी-समीप वस्तु
क्षुद्रग्रह
प्रहार क्रेटर
सन्दर्भ
2
श्रेणी:विलुप्ति घटनाएँ
श्रेणी:के-टी सीमा
श्रेणी:डायनासोर
श्रेणी:जलवायु इतिहास
श्रेणी:सम्भावित प्रहार घटनाएँ
श्रेणी:पेलियोजीन कल्प
श्रेणी:चाकमय कल्प