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सफ़िया हयात
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सफ़िया हयात Safia Hayat Punjabi and Urdu language poetess 04.jpg thumb सफ़िया हयात सफ़िया हयात सफ़िया सफ़िया y 1969 12 25 फ़ैसलाबाद, पंजाब, पाकिस्तान कवित्री , कहानीकार / अफसाना निगार ,कालमनवीस पाकिस्तानी मुस्लिम पाकिस्तानी एम ए फ़ारसी; एम् फिल ,फ़ारसी . पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर छंद मुक्त कविता ,अफसाना , अखबार कालम नवीसी नारी मुक्ति नारी मुक्ति आन्दोलन माटी के दुःख अलीना ,आयमा (बेटियां ) और अहमद (बीटा) उर्दू शायरी ;उर्दू शायरी में नारीवाद ; मौजूदा उर्दू Facebook :https://www.facebook.com/profile.php?id=100012030631639
सफ़िया हयात पाकिस्तान पंजाब की उर्दू और पंजाबी की एक लेखिका हैं जो कविता और कहानी लिखती हैं। https://www.urdupoint.com/poetry/directory/safia-hayat संग्रहीत प्रति 24 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171224213858/https://www.urdupoint.com/poetry/directory/safia-hayat 24 दिसंबर 2017 dead वह एक नारीवादी आन्दोलन से जुडी हुई लेखिका हैं जो अपनी रचनाओं के ज़रिए औरतों के हक्कों के लिए आवाज़ बुलंद करती हैं।उनकी रचनाओं में एशियन मुल्कों ,ख़ास कर पाकिसतान और भारत जैसे मुलकों में औरतों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का मार्मिक रूप से चित्रण किया होता है।
जीवन ब्यौरा
सफ़िया हयात का जन्म 25 दसंबर 1969 को फ़ैसलाबाद, पंजाब, पाकिस्तान में हुआ। उनके वालिद का नाम (महरूम )जनाब हयात अली और वालिदा मोहतरिमा सिदिकी बीबी है।सफ़िया हयात ने पंजाब विश्विध्याल्या लाहौर से फ़ारसी की तालीम हासिल की है और अब वहां से एम्.फिल. की उच्चतर विद्या प्राप्त क्र रही हैं।सफ़िया हयात पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद के अदबी लोगों में एक जानी पहिचानी शख्शीअत हैं।वह पाकिस्तान के कई समाजक संगठनों से जुड़ क्र स्त्रीओं और बच्चों की भलाई के लिए भी काम करती हैं।वह उर्दू और फ़ारसी अध्यापन का काम भी करती है।
अदबी सफ़र
सफ़िया हयात ने 1982 से लिखना शुरू किया और अब तक लिखती आ रही हैं।उसने अपनी पहली नज़म ७ कक्षा में लिखी थी। सफ़िया हयात ने अखबारों में औरतों और समाजी मसलों पर कई लेख भी लिखे हैं।इनमें से अहम अखबार हैं :
अवाम
अमन
उसाफ
रोजनामा नई बात
कहानियाँ
सफ़िया हयात की कहानियों की एक पुस्तक "माटी के दुःख ]] प्रकाशत हो चुकी है और उसकी काफी कहानियाँ अलग अलग अख़बारों में भी प्रकाशत हो चुकी हैं। https://archive.org/details/MattiKeDukhBySafiaHayatउनकी इस पुस्तक को काफी सराहना मिली है। उनकी कविताओं की एक पुस्तक जल्दी प्रकाशत होने वाली है।
नज़म
सफ़िया हयात का नज़म और ग़ज़ल में अहम योगदान है। आलोचक उनकी नजमों को विशेष ध्यान देतें है और मानते हैं कि मौजूदा लिखी जा रही उर्दू शायरी में सफ़िया हयात का खास मुकाम है उनकी चुनिन्दा नज़में पाकिस्तान और इंगलैंड के मशहूर अदबी रिसालों में प्रकाशत होई है। http://faisalabad.sujag.org/feature/literarure-female-writers-faisalabad संग्रहीत प्रति 24 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171224213643/http://faisalabad.sujag.org/feature/literarure-female-writers-faisalabad 24 दिसंबर 2017 dead सफ़िया हयात आजकल सोसल मीडिया की Facebook साईट पर सरगरम रहती हैं और वहां अपनी कवितायेँ सांझा करती रहती है जो उनकी उपर सूचना बाक्स में दी गई आई उनकी Facebook आई डी में देखी जा सकती हैं। । https://www.facebook.com/profile.php?id=100012030631639&lst=100001532557878%3A100012030631639%3A1497877640
कविता की मिसाल
कील की नोक पर नाच
वह समझता ही नहीं
कि हँसाना अब मेरी मजबूरी है
और खिलखिलाना दिखावा
वह हंसती हुई सिर्फ दिखाई देती है
जिसके पाँवों में इल्जामों के
कील ठोक दिए जाते है
जखमों के छाले रिसते हैं
और वह चलती जाती है
ठक्क ठक्क
ठक्क ठक्क
चलते चलते
पांवों में कील और गहरे ठुक जातें हैं
कील की नोक पर होता यह नाच
तमाशबीनों को खुश करता है
वह ज़खमी पैरों से नाचती रहती है
वह पूरा दिन कील की नोक पर नाचती है
और रात होते ही
उसे ताबूत में जिंदा सोना होता है
ग़ज़ल
दार गले का गहना होगा
फिर भी सच तो कहिन होगा
मेरी जिद्द के आगे दरिया
तुझको उल्टा बहना होगा
मेरे वकत में सूरज को भी
अपनी हद में रहना होगा
देखो तुमने इश्क किया है
हिज़र तुम्हें अब सहना होगा
रेडिओ
सफ़िया हयात फ़ैसलाबादके ऍफ़ एम् रेडिओ धमाल ऍफ़ एम् 94 (Dhamaal FM94) के ख़ास प्रोग्राम की संचालिका रही है जोउस दौरान बेहद्द मकबूल रहा था। https://www.facebook.com/dhamaal94/?hc_ref=PAGES_TIMELINE&fref=nf
संधर्भ
श्रेणी:उर्दू लेखिका