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छोटा नागपुर पठार
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पठार छोटा नागपुर पठार ᱪᱷᱚᱴᱟ ᱱᱟᱜᱽᱯᱩᱨ ᱫᱷᱟᱥᱱᱟ Shikharji 2004a.jpg पारसनाथ पहाड़ी (माराङ बुरु), छोटा नागपुर पठार का सबसे ऊँचा स्थान भारत {flag india} झारखंड, उड़ीसा, बिहार, पश्चिम बंगाल राँची जमशेदपुर दुर्गापुर दामोदर नदी सुवर्णरेखा नदी बराकर नदी 23 21 N 85 20 E pushpin India, Jharkhand पारसनाथ पहाड़ी (माराङ बुरु) 1350 23 57 40 N 86 08 14 E
छोटा नागपुर पठार पूर्वी भारत में स्थित एक पठार है। झारखंड राज्य का अधिकतर हिस्सा एवं पश्चिम बंगाल, बिहार व छत्तीसगढ़ के कुछ भाग इस पठार में आते हैं। इसके पूर्व में सिन्धु-गंगा का मैदान और दक्षिण में महानदी हैं। इसका कुल क्षेत्रफल 65,000 वर्ग किमी है।Chhota Nagpur Plateau https://web.archive.org/web/20090917115436/http://www.mapsofindia.com/chhattisgarh/geography/chhota-nagpur-plateau.html 17 सितंबर 2009 , mapsofindia, Accessed 2010-05-02
नामोत्पत्ति
इस पठार के नाम में 'नागपुर' शायद यहाँ पर प्राचीनकाल में राज करने वाले नागवंशी राजाओं से लिया गया है। राँची से कुछ दूरी पर स्थित 'चुटिया' नामक एक मुण्डा बहुल गाँव है, जिसमें नागवंशियों के एक पुराना दुर्ग के खँडहर मौजूद हैं।https://books.google.co.in/books?id=W0x74TZB3eoC&pg=PA54&dq=chutia+nagpur&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwiD64T5o6aAAxWeZmwGHbQeCD84ChDoAXoECAMQAw#v=onepage&q=chutia%20nagpur&f=false Chota Nagpur, a Little-known Province of the Empire Bradley-Birt Francis Bradley 1998 Asian Educational Services 978-81-206-1287-7 enSir John Houlton, Bihar, the Heart of India, pp. 127-128, Orient Longmans, 1949. इस गाँव के संस्थापक 'चुटिया हाड़ाम' नामक एक मुंडा थे,https://books.google.co.in/books?id=w5i0xZzfDnwC&pg=PA469&dq=chutia+nagpur&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwis0ZCHpKaAAxUuZmwGHVK9C_I4FBDoAXoECAYQAw#v=onepage&q=chutia%20nagpur&f=false The Indian World 1907 Cherry Press en जिनके नाम पर इसे 'चुटिया नागखंड' कहा जाता था, जो बाद में परिवर्तित होकर 'चुटिया नागपुर' और फिर 'छोटा नागपुर' बना। छोटा नागपुर को 'मुण्डाओं का प्रदेश' भी कहा जाता है।https://books.google.co.in/books?id=QA2OKK0-bdcC&pg=PA96&dq=chutia+nagpur&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwi3zLDmo6aAAxUQcWwGHczZCI4Q6AF6BAgIEAM#v=onepage&q=chutia%20nagpur&f=false The People of India Risley Herbert 1999 Asian Educational Services 978-81-206-1265-5 enhttps://books.google.co.in/books?id=ZSQUAAAAYAAJ&pg=PA181&dq=chutia+nagpur&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwiD64T5o6aAAxWeZmwGHbQeCD84ChDoAXoECAgQAw#v=onepage&q=chutia%20nagpur&f=false Census of India, 1891 Commissioner India Census 1893 Bengal Secretariat Press en
बनावट
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दामोदर नदी, छोटा नागपुर पठार से होकर बहती है
छोटा नागपुर की पत्थरीली परतों के भूवैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि इसमें अतिप्राचीन गोंडवाना महाद्वीप की चट्टानें हैं, यानि इस पठार का विकास बहुत ही पुराना है। यह दक्कन पठार का पूर्वोत्तरी खंड था जो दक्कन तख़्ते के साथ-साथ गोंडवाना के खंडित होने पर आज से लगभग 12 करोड़ साल पहले अलग होकर 5 करोड़ वर्षों तक उत्तर दिशा में चलता रहा और फिर यूरेशिया से जा टकराया।Chhota-Nagpur dry deciduous forests https://web.archive.org/web/20121006141124/http://www.eoearth.org/article/Chhota-Nagpur_dry_deciduous_forests 6 अक्तूबर 2012 , The Encyclopaedia of Earth, Accessed 2010-05-02
अन्य विवरण
इस पठारी क्षेत्र में कोयला का अकूत भंडार है जिससे दामोदर घाटी में बसे उद्योगों के उर्जा संबंधी आवश्यकतायें पूरी होती हैं। छोटानागपुर का पठार तीन छोटे छोटे पठारों से मिलकर बना है जिनमे राँची का पठार, हजारीबाग का पठार और कोडरमा का पठार शामिल है। राँची पठार सबसे बड़ा पठार है जिसकी औसत ऊँचाई 700 मीटर है। पूरे छोटानागपुर पठार का क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलो मीटर है।
पठार का ज्यादातर हिस्सा घने जंगलों से आच्छादित है जिनमें साल के वृक्षों की प्रमुखता है और इस क्षेत्र में वन क्षेत्र का प्रतिशत देश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा है। बाघ, एशियाई हाथी, चार सींग वाला मृग (टेट्रासेरस क्वाड्रिकोर्निस), काला हिरण (एंटीलोप सर्विकाप्रा), चिंकारा (गज़ेला बेनेटी), जंगली सोनकुत्ता (कुओन अल्पिनस) और स्लॉथ भालू (मेलर्सस उर्सिनस) यहां पाए जाने वाले कुछ जानवर हैं, जबकि पक्षियों में खतरे में पड़े खरमोर (यूपोडोटिस इंडिका), भारतीय ग्रे हॉर्नबिल और अन्य हॉर्नबिल शामिल हैं। इस पठार पर हाथी और बाघ के संरक्षण के लिये बनाये गये कई प्रमुख अभयारण्य स्थित हैं।
झारखंड छोटानागपुर के पठार पर अवस्थित होने के कारण इसे छोटानागपुर प्रदेश भी कहा जाता है। प्राकृतिक दृष्टि से यह राज्य दो भाग छोटानागपुर और संताल परगना में बंटा है। यह राज्य आदिवासी बहुल है। यह मूलत: एक वन प्रदेश है, प्रचुर मात्रा में खनिज भंडार भी है। इस कारण इस प्रदेश को खनिजों का प्रदेश भी कहते हैं।https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/ranchi/jharkhand-foundation-day-dream-seen-in-1930-fulfilled-in-years-2000-know-how-jharkhand-got-its-name-smj छोटानागपुर के पठार पर अवस्थित है राज्य 1 नवंबर 2022 प्रभात खबर 5 दिसंबर 2023
संरक्षित क्षेत्र
पारिस्थितिकी क्षेत्र का लगभग 6 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित क्षेत्रों के भीतर है, जिसमें 1997 में 6,720 वर्ग किलोमीटर (2,590 वर्ग मील) शामिल है। सबसे बड़े पलामू व्याघ्र आरक्षित वन और संजय राष्ट्रीय उद्यान हैं।Wikramanayake, Eric; Eric Dinerstein; Colby J. Loucks; et al. (2002). Terrestrial Ecoregions of the Indo-Pacific: a Conservation Assessment. Island Press; Washington, DC. pp. 321-322
भीमबाँध वन्यजीव अभयारण्य, बिहार (680 वर्ग किमी)
दलमा वन्यजीव अभयारण्य, झारखण्ड (630 वर्ग किमी)
गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, बिहार (110 वर्ग किमी)
हज़ारीबाग वन्यजीव अभयारण्य, झारखण्ड (450 वर्ग किमी)
कोडरमा वन्यजीव अभयारण्य, झारखण्ड (180 वर्ग किमी)
लावालोंग वन्यजीव अभयारण्य, झारखण्ड (410 वर्ग किमी)
पलामू व्याघ्र आरक्षित वन, झारखण्ड (1,330 वर्ग किमी)
रमनाबागान वन्यजीव अभयारण्य, पश्चिम बंगाल (150 वर्ग किमी)
संजय राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश (1,020 वर्ग किमी, जिसका एक हिस्सा नर्मदा घाटी शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्र में है)
सेमरसोत वन्यजीव अभयारण्य, छत्तीसगढ़ (470 वर्ग किमी)
सिमलिपाल राष्ट्रीय अभ्यारण्य, ओडिशा (420 वर्ग किमी)
सप्तशज्या वन्यजीव अभयारण्य, ओडिशा (20 वर्ग किमी)
तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य, छत्तीसगढ़ (600 वर्ग किमी)
तोपचांची वन्यजीव अभयारण्य, झारखण्ड (40 वर्ग किमी)
खनिज स्रोत
छोटा नागपुर पठार अभ्रक, बॉक्साइट, तांबा, चूना पत्थर, लौह अयस्क और कोयला जैसे खनिज संसाधनों का भंडार है। दामोदर घाटी कोयले से समृद्ध है और इसे देश में कोकिंग कोयले का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 2,883 वर्ग किलोमीटर (1,113 वर्ग मील) में फैले केंद्रीय घाटी में विशाल कोयला भंडार पाए जाते हैं। घाटी में महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र हैं: झरिया, रानीगंज, पश्चिम बोकारो, पूर्वी बोकारो, रामगढ़, दक्षिण कर्णपुरा और उत्तरी कर्णपुरा।http://envfor.nic.in/divisions/cltech/Damodar/2.4.htm New Page 1 2011-08-15 web.archive.org 2023-07-24 15 अगस्त 2011 https://web.archive.org/web/20110815182912/http://envfor.nic.in/divisions/cltech/Damodar/2.4.htm bot: unknown
इन्हें भी देखें
पठार
सिन्धु-गंगा का मैदान
सन्दर्भ
श्रेणी:भारत के पठार
श्रेणी:झारखंड