411 REFERENCE · Wikipedia
क्षेत्रवाद
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
क्षेत्रवाद से अभिप्राय किसी देश के उस छोटे से क्षेत्र से है जो आर्थिक ,सामाजिक आदि कारणों से अपने पृथक् अस्तित्व के लिए जागृत है। http://www.academia.edu/3251177/Regionalism_in_India&source=s&q=regionalism+in+indiahttp://khabar.ndtv.com/news/india/raj-thackerays-men-attack-north-indian-parents-seeking-school-admission-361211 संग्रहीत प्रति 13 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20150913065350/http://khabar.ndtv.com/news/india/raj-thackerays-men-attack-north-indian-parents-seeking-school-admission-361211 13 सितंबर 2015 dead http://www.jagran.com/news/national-the-challenge-of-regionalism-and-casteism-11178658.html संग्रहीत प्रति 13 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20140613031959/http://www.jagran.com/news/national-the-challenge-of-regionalism-and-casteism-11178658.html 13 जून 2014 live
अपने क्षेत्र या भूगोल के प्रति अधिक प्रयत्न आर्थिक, सामाजिक व राजनितिक अधिकारों के चाह की भावना को क्षेत्रवाद के नाम से जाना जाता हैं. इस प्रकार की भावना से बाहरी बनाम भीतरी तथा अधिक संकीर्ण रूप धारण करने पर यह क्षेत्र बनाम राष्ट्र हो जाता हैं. जो किसी भी देश की एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा हो जाता हैं. भारत सहित दुनिया के कई देशों में क्षेत्रवाद की मानसिकता को लेकर वहां के निवासी स्वयं को विशिष्ट मानते हुए, अन्य राज्यों व लोगों से अधिक अधिकारों की मांग करते हैं, आन्दोलन करते हैं. तथा सरकार पर अपनी मांगे मनवाने के लिए दबाव डालते हैं. कई बार इस तरह की कोशिशों का नतीजा हिंसा के रूप में सामने आता है तथा उस गंभीर हिंसा के कारण काफी जन, धन का नुकसान भी हो जाता है जिससे देश को काफी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है
ऐतिहासिक कारण
क्षेत्रवाद की उत्पत्ति में इतिहास का दोहरा सहयोग रहता है - सकारात्मक और नकारात्मक। सकारात्मक योगदान के अन्तर्गत शिव सेना का और नकारात्मक योगदान के अन्तर्गत द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का उदाहरण दिया जा सकता है।
ऐतिहासिक विरासत
भारत प्राचीन काल से विशाल प्रादेशिक राज्यों वाला देश रहा है। प्राचीन काल में शक्तिशाली राजाओं के शक्तिहीन होने पर अधीनस्थ प्रदेशों और सामन्तों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी तथा अपना स्वतंत्र शासन स्थापित कर लिया था।
भौगोलिक एवं सांस्कृतिक कारण
प्राय: भाषा और संस्कृति भी क्षेत्रवाद की भावनाओं को उत्पन्न करने में बहुत सहयोग देते हैं। भारत के विभिन्न प्रान्तों और क्षेत्रों की अपनी-अपनी भाषा है। अपनी भाषा को वे अधिक श्रेष्ठ मानकर अन्य भाषाओं को हीन मान लेते हैं।
आर्थिक असन्तुलन
स्वाधीन भारत में देश का आर्थिक विकास कार्यक्रम कुछ इस प्रकार चला कि कुछ क्षेत्र बहुत अधिक विकसित हो गये जबकि कुछ क्षेत्र पिछड़ गये। पिछड़े क्षेत्रों में उपजा असन्तोष भी क्षेत्रवाद का कारण बना।
प्रशासनिक कारण
प्रशासनिक कारणों से भी विभिन्न राज्यों की प्रगति में अन्तर रहा है। कुछ राज्यों में प्रभावशाली औद्योगिक नीति के कारण विकास हुआ है तो कुछ राज्यों में बहुत धीमी गति से हो रहा है जो क्षेत्रवाद को बढ़ावा देता है।
क्षेत्रवाद के दुष्परिणाम
क्षेत्रवाद के दुष्परिणामस्वरूप भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक ,राजनीकिक
,मनोवैज्ञानिक
संघर्ष और तनाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है
क्षेत्रवाद के कारण कुछ स्वार्थी नेता और संगठन विकसित होने लगते हैं।
संकीर्ण क्षेत्रीयता राष्ट्र की एकता के लिए चुनौती बन जाती है।
सन्दर्भ
श्रेणी:क्षेत्रवाद
श्रेणी:भारत में क्षेत्रवाद