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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गिरफ़्तारी

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thumb|ब्राज़ील के रिओ दी जानेरियो नगर में गिरफ़्तार होते हुए आदमी गिरफ़्तारी किसी व्यक्ति को उसकी अपनी स्वतंत्रता से वंचित करने की प्रक्रिया को बोलते हैं। साधारण तौर पर यह किसी अपराध की छानबीन के लिए, किसी अपराध को घटने से रोकने के लिए या किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की हानि होने से रोकने के लिए किया जाता है। मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 9 के अनुसार "किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ़्तार, नज़रबंद, या देश-निष्कसित नहीं किया जाएगा।" गिरफ्तारी से सम्बन्धित महिलाओं के अधिकार गिरफ्तारी के समय अगर कोई महिला पुलिस की दृष्टि में 'अपराधी' है और पुलिस उसे गिरफ्तार करने आती है तो वह अपने इन अधिकारों का उपयोग कर सकती हैं- उसे गिरफ्तारी का कारण बताया जाए। गिरफ्तारी के समय उसे हथकड़ी न लगाई जाए। हथकड़ी सिर्फ मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही लगाई जा सकती है। अपने वकील को बुलवा सकती है। मुफ्त कानूनी सलाह की माँग कर सकती है, अगर वह वकील रखने में असमर्थ है। गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर महिला को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है। गिरफ्तारी के समय स्त्री के किसी रिश्तेदार या मित्र को उसके साथ थाने जाने दिया जाए। अगर पुलिस महिला को गिरफ्तार करके थाने में लाती है तो महिला को निम्न अधिकार प्राप्त हैं गिरफ्तारी के बाद उसे महिलाओं के कमरे में ही रखा जाए। उसे मानवीयता के साथ रखा जाए, जोर-जबरदस्ती करना गैरकानूनी है। पुलिस द्वारा मारे-पीटे जाने या दुर्व्यवहार किए जाने पर मजिस्ट्रेट से डाक्टरी जाँच की मांग कर सकती है। महिला की डाक्टरी जाँच केवल महिला डॉक्टर ही करे। महिला अपराधियों के साथ पूछताछ के दौरान कभी-कभी छेड़छाड़ के मामले भी सामने आते हैं। इसके लिये महिला इन अधिकारों का प्रयोग कर सकती है- पूछताछ के लिए थाने में या कहीं और बुलाए जाने पर महिला इंकार कर सकती है। पूछताछ केवल महिला के घर पर तथा उसके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ही की जाए। उसके शरीर की तलाशी केवल दूसरी महिला द्वारा ही शालीन तरीके से ली जाए। अपनी तलाशी से पहले वह स्त्री, महिला पुलिसकर्मी की तलाशी ले सकती है। बिना वारंट के पुलिस कब गिरफ्तारी कर सकती है? – धारा 35 BNSS / धारा 41 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) यह आधुनिक गिरफ्तारी कानून का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। सम्बन्धित महिलाओं के अधिकारhttps://www.advocatebhuvneshgoyal.com/arrest/ Arrest in India: Law, Procedure, Safeguards and Remedies - Advocate Bhuvnesh Goyal Goyal Advocate Bhuvnesh 2025-12-05 en-US 2025-12-05 सामान्य शक्ति धारा 35 Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) के तहत पुलिस अधिकारी कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकता है। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति: पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में अपराध करता है। ऐसे व्यक्ति पर संदेह हो कि उसने संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) किया है (जैसे: धोखाधड़ी एक निश्चित राशि से अधिक, चोट पहुँचाना, चोरी, बलात्कार आदि)। वह घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) हो या उसके पास चोरी का सामान पाया जाए। आवश्यकता परीक्षण” (Necessity Test) – पुलिस को गिरफ्तारी उचित ठहरानी होगी भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार कहा है: “गिरफ्तार करने की शक्ति होना एक बात है, और उसे इस्तेमाल करने का उचित कारण होना दूसरी।” धारा 35 BNSS (पुरानी धारा 41 CrPC की तरह) अब इस सिद्धांत को कानून का हिस्सा बनाती है। पुलिस यह विचार किए बिना गिरफ्तारी नहीं कर सकती कि क्या गिरफ्तारी वास्तव में आवश्यक है। गिरफ्तारी तभी होनी चाहिए जब वह किसी कारण से आवश्यक हो, जैसे:आगे होने वाले अपराध को रोकने के लिए। आगे होने वाले अपराध को रोकने के लिए। इन्हें भी देखें संज्ञेय अपराध दंड मिरैन्डा चेतावनी जमानत बाहरी कड़ियाँ गिरफ्तारी -संवैधानिक संरक्षण एवं अन्य विधि (अभिभाषक वाणी) श्रेणी:न्याय श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना