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कपास
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thumb|200px|कपास चुनती हुई स्त्री
thumb|300px|मशीन से संस्कारित करने के पहले हाथ से बीज निकालते हुए (२०१०)
thumb|300px|विश्व के कपास उत्पादक क्षेत्र
कपास एक नकदी फसल हैं। यह खरीफ फसल है। इसका मूल स्थान भारत है। यह मालवेसी कुल का सदस्य है। संसार में इसकी 2 किस्म पाई जाती है। प्रथम को देशी कपास (गासिपियाम अर्बोरियाम)एवं (गा; हरबेरियम) के नाम से जाना तथा दूसरे को अमेरिकन कपास (गा, हिर्सूटम)एवम् (बरवेडेंस)के नाम से जाता है। इससे रुई तैयार की जाती हैं, जिसे सफेद सोना कहा जाता हैं| कपास के पौधे बहुवर्षीय, झड़ीनुमा वृक्ष जैसे होते है। जिनकी लंबाई 2-7 फीट होती है। पुष्प, सफेद अथवा हल्के पीले रंग के होते है। कपास के फल बाल्स (balls) कहलाते है, जो चिकने व हरे पीले रंग के होते हैं इनके ऊपर ब्रैक्टियोल्स कांटो जैसी रचना होती है। फल के अन्दर बीज व कपास होती है। कपास की फसल उत्पादन के लिये काली मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। भारत में सबसे ज्यादा कपास उत्पादन गुजरात राज्य में होता है।
कपास से निर्मित वस्त्र सूती वस्त्र कहलाते है। कपास मे मुख्य रूप से सेल्यूलोस होता है।कपास के प्रकार -'''
लम्बे रेशे वाली कपास.
मध्य रेशे वाली कपास.
छोटे रेशे वाली कपास.
कपासी एक गांठ का वजन 170 किलोग्राम
केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान नागपुर महाराष्ट्र
कपास विश्लेषण प्रयोगशाला मटुंगा महाराष्ट्र
कपास का रेशा लेंट कहलाता है
कपास का छोटा रे फज कहलाता है
कपास के बीजों में जहरीला पन गोशी पॉल के कारण होता है
कपास उत्पादन के लिए भौगोलिक कारक और जलवायु की दशाएं
तापमान - 21 से 27 सें. ग्रे.
वर्षा -50 से 75 सें. मी.(उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के अनुसार)
मिट्टी - काली व रेतीली मिट्टी व कुछ अशं गोबर व नमक
भारत मे कपास मुख्यत रूप से महाराष्ट्र मे बोई जाती है।
मध्यप्रदेश के पश्चिम निमाड़ क्षेत्र में भी कपास की खेती की जाती है
कपास उत्पादन का विश्व वितरण
संयुक्त राज्य अमेरिका
चीन
भारत (भारत की लगभग 9.4 मिलियन हेक्टेयर की भूमि पर कपास की खेती की जाती हैं। इसके प्रत्येक हेक्टेयर क्षेत्र में 2 मिलियन टन कपास के डंठल अपशिष्ट के रूप में विद्यमान रहते हैं। कपास का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जो ये दर्शाता है की भारतीयों का कपास से सूति वस्र बानाने का ज्ञान प्राचीन काल से ही है।
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