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411 समाचार
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देवनारायण

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Shri Devnarayan Bhagwan the imperialGurjar.jpg देवनारायण देव तलवार, भाला महाराजा सवाई भोज गुर्जर माता गुर्जरी साडू पीपल दे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा माघ मास की छठ-सातम की रात देवनारायण का अवतरणश्री देवनारायण जन्मस्थली मालासेरी डूंगरी https://www.devmalaseri.com/ Devmalaseri Temple 16 सितंबर 2026 https://web.archive.org/web/20260609180555/http://devmalaseri.com/ 9 जून 2026 dead; भादवी छठ को लीलाधर घोड़े का अवतरणभादवी छठ "लीलाधर घोड़े का अवतरण दिवस" https://www.prashasaksamiti.com/2023/09/blog-post_200.html प्रशासक समिति 21 सितंबर 2023 16 सितंबर 2026; भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को देवनारायण का देवलोक गमनराजस्थान के लोकदेवता : देवनारायण जी https://hindi.rajras.in/rajasthan/vyakti/lokdevta/devnarayan-ji/ RajRAS 16 सितंबर 2026 देवनारायण जी राजस्थान के एक लोक देवता,Bhagavatīlāla Rājapurohita Mālavī, saṃskr̥ti aura sāhitya https://books.google.com/books?id=FlduAAAAMAAJ 2004 ĀDivisionāsī Loka Kalā Akādamī, Madhyapradeśa Saṃskr̥ti Parishad देवनारायण गुर्जर जाति के थे। गुर्जरों के प्रभाव से देवनारायणजी की मान्यता अन्य जातियों में प्रचलित हुई।https://books.google.co.in/books?id=jJNwHFZyl6wC&pg=PA163&dq=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjDhqOp6qTuAhWDgUsFHRJ4DxkQ6AEwAXoECAEQAg#v=onepage&q&f=false Nectar Gaze and Poison Breath: An Analysis and Translation of the Rajasthani Oral Narrative of Devn-ar-aya.n Malik Aditya 2005-02-24 Oxford University Press 978-0-19-803420-9 enJain Jyotindra Picture Showmen: Insights Into the Narrative Tradition in Indian Art 1998 Marg Publications 978-81-85026-39-8 https://www.google.co.in/books/edition/Picture_Showmen/nxLaAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=devnarayan+gurjar&dq=devnarayan+gurjar&printsec=frontcover 20 जनवरी 2021 en शासक और महान योद्धा थे।https://books.google.co.in/books?id=jJNwHFZyl6wC&pg=PA163&dq=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjDhqOp6qTuAhWDgUsFHRJ4DxkQ6AEwAXoECAEQAg#v=onepage&q=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4&f=false Nectar Gaze and Poison Breath: An Analysis and Translation of the Rajasthani Oral Narrative of Devn-ar-aya.n Malik Aditya 2005-02-24 Oxford University Press 978-0-19-803420-9 enhttps://books.google.co.in/books?id=3TluAAAAMAAJ&q=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4&dq=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjDhqOp6qTuAhWDgUsFHRJ4DxkQ6AEwAHoECAIQAg मेवाड़ का सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास 2006 प्रताप शोध प्रतिष्ठान, भूपाल नोबल्स संस्थाल, विद्या प्रचारिणी सभा hihttp://www.theindianportrait.com/artwork/maharaja-bisal-dev-warrior-king-of-ajmer/ इनकी पूजा मुख्यतः राजस्थान, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश में होती है। इनका भव्य मंदिर आसीन्द में है। राजस्थान, में 27 जनवरी 2023 को अशोक गहलोत ने देव नारायण जयंती को राजकीय अवकाश घोषित किया। https://m.timesofindia.com/city/jaipur/holiday-declared-for-devnarayan-jayanti-in-rajasthan/articleshow/97388224.cms अवतार उनका जन्म एक लोकप्रिय मंडलजी गुर्जर के परिवार में हुआ था। जिन्होंने मेवाड़ में भीलवाड़ा जिले के पास प्रसिद्ध मंडल झील की स्थापना की थी। मंडलजी, अजमेर के राजा बिसाल देव गुर्जर (विशाल देव चौहान) केे भाई थे, जिन्होंने ने संभवत: 8 वीं शताब्दी में अजमेर पर शासन किया था और साथ ही अरब घुसपैठ का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया और तोमर वंश के शासकों को दिल्ली पर नियंत्रण पाने में मदद की।https://books.google.com/books?id=UyI6QWfi7oMC&pg=PA103 Shree Devnarayan warrior of chauhan vansh (Page 94-95 ) oxford university press श्री देवनारायण जी Page.282http://www.theindianportrait.com/artwork/maharaja-bisal-dev-warrior-king-of-ajmer/श्री देवनारायण जी का मूल स्थान वर्तमान में अजमेर के निकट नाग पहाड़ था।https://www.indianculture.gov.in/node/2686421 |title=Devnarayan belongs to Gujjar community}} राजस्थान में प्रचलित लोक कथाओं के माध्यम से शौर्य पुरूष देवनारायण के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से जानकारी मिलती है। देवनारायण की फड़ के अनुसार माण्डलजी के हरिरामजी गुर्जर, हरिरामजी के बाघजी और बाघजी के 24 पुत्र हुए जो बगड़ावत कहलाये ।The Encyclopaedia Of Indian Literature (Volume One (A To Devo), Volume 1 Amaresh Datta Sahitya Akademi 2006 8126018038, 978-81-260-1803-1 322 https://books.google.com/books?id=ObFCT5_taSgC&pg=PA322&dq Being the son of Baghji Bagrao, they were collectively known as bagaravat. इन्हीं में से बड़े भाई राजा सवाई भोज गुर्जर और माता साडू गुर्जरी (सेढू) खटाणा के पुत्र के रूप में वि . सं . 968 ( 911 ई.) में माघ शुक्ला सप्तमी को आलौकिक पुरूष देवनारायण का जन्म मालासेरी में हुआ । बगडावत भारत राणी जयमती (जैमति) को लेकर राण के राजा दुर्जनसाल से बगड़ावतों का युद्ध हुआ। युद्ध से पूर्व बगडावतों तथा दुर्जनसाल की मित्रता थी तथा वे धर्म के भाई थे। ये युद्ध खारी नदी के किनारे हुआ था। बगड़ावतों ने अपना वचन रखते हुए राणी जैमति को सिर दान में दिये थे। बगड़ावतों के वीरगति प्राप्त होने के बाद देवनारायण का अवतार हुआ तथा उन्होंने राजा दुर्जनसाल का वध किया। देवनारायण की ३ रानियां थीं- पीपलदे परमार (धारा के राजा की बेटी), नागकन्या तथा दैत्यकन्या। परिचय देवनारायण पराक्रमी योद्धा थे जिन्होंने अत्याचारी शासकों के विरूद्ध कई संघर्ष एवं युद्ध किये । वे शासक भी रहे । उन्होंने अनेक सिद्धियाँ प्राप्त की। चमत्कारों के आधार पर धीरे-धीरे वे देव स्वरूप बनते गये एवं अपने इष्टदेव के रूप में पूजे जाने लगे। देवनारायण को विष्णु के अवतार के रूप में गुर्जर समाज द्वारा राजस्थान व दक्षिण-पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपने लोकदेवता के रूप में पूजा की जाती है।Bhagavatīlāla Rājapurohita Mālavī, saṃskr̥ti aura sāhitya https://books.google.com/books?id=FlduAAAAMAAJ 2004 ĀDivisionāsī Loka Kalā Akādamī, Madhyapradeśa Saṃskr̥ti Parishad देवनारायणजी देवनारायण गुर्जर जाति के थे। गुर्जरों के प्रभाव से देवनारायणजी की मान्यता अन्य जातियों में प्रचलित हुई। उन्होंने लोगों के दुःख व कष्टों का निवारण किया । देवनारायण महागाथा में बगडावतों और राण भिणाय के शासक के बीच युद्ध का रोचक वर्णन है । देवनारायणजी का अन्तिम समय ब्यावर तहसील के मसूदा से 6 कि . मी . दूरी पर स्थित देहमाली ( देमाली ) स्थान पर गुजरा । भाद्रपद शुक्ला सप्तमी को उनका वहीं देहावसान हुआ । देवनारायण से पीपलदे द्वारा सन्तान विहीन छोड़कर न जाने के आग्रह पर बैकुण्ठ जाने पूर्व पीपलदे से एक पुत्र बीला व पुत्री बीली उत्पन्न हुई । उनका पुत्र ही उनका प्रथम पुजारी हुआ । कृष्ण की तरह देवनारायण भी गायों के रक्षक थे । उन्होंने बगड़ावतों की पांच गायें खोजी , जिनमें सामान्य गायों से अलग विशिष्ट लक्षण थे । देवनारायण प्रातःकाल उठते ही सरेमाता गाय के दर्शन करते थे । यह गाय बगड़ावतों के गुरू रूपनाथ ने सवाई भोज को दी थी । देवनारायण के पास 98000 पशु धन था । जब देवनारायण की गायें राण भिणाय का राणा घेर कर ले जाता तो देवनारायण गायों की रक्षार्थ राणा से युद्ध करते हैं और गायों को छुड़ाकर लाते थे । देवनारायण की सेना में ग्वाले अधिक थे । 1444 ग्वालों का होना बताया गया है , जिनका काम गायों को चराना और गायों की रक्षा करना था । देवनारायण ने अपने अनुयायियों को गायों की रक्षा का संदेश दिया । इन्होंने जीवन में बुराइयों से लड़कर अच्छाइयों को जन्म दिया । आतंकवाद से संघर्ष कर सच्चाई की रक्षा की एवं शान्ति स्थापित की । हर असहाय की सहायता की । राजस्थान में जगह-जगह इनके अनुयायियों ने देवालय अलग-अलग स्थानों पर बनवाये हैं जिनको देवरा भी कहा जाता है । ये देवरे अजमेर, चित्तौड़ , भीलवाड़ा , व टोंक में काफी संख्या में है । देवनारायण का प्रमुख मन्दिर भीलवाड़ा जिले में आसीन्द कस्बे के निकट खारी नदी के तट पर महाराजा सवाई भोज में है । देवनारायण का एक प्रमुख देवालय निवाई तहसील के जोधपुरिया गाँव में वनस्थली से 9 कि . मी . दूरी पर है । सम्पूर्ण भारत में गुर्जर समाज का यह सर्वाधिक पौराणिक तीर्थ स्थल है। देवनारायण की पूजा भोपाओं द्वारा की जाती है । ये भोपा विभिन्न स्थानों पर जाकर लपेटे हुये कपड़े पर देवनारायण जी की चित्रित कथा के माध्यम से देवनारायण की गाथा गा कर सुनाते हैं । देवनारायण की फड़ देवनारायण की फड़ देवनारायण की फड़ में 335 गीत हैं । जिनका लगभग 1200 पृष्ठों में संग्रह किया गया है एवं लगभग 15000 पंक्तियाँ हैं । ये गीत परम्परागत भोपाओं को कण्ठस्थ रहते हैं । देवनारायण की फड़ राजस्थान की फड़ों में सर्वाधिक लोकप्रिय एवं सबसे बड़ी है । देवनारायण के अन्य नाम ११वीं कला का असवार लीला घोडा का असवार त्रिलोकी का नाथ देवजी देव महाराज देव धणी साडू माता का लाल उधा जी जय देवनारायण राजा सवाई भोज गुर्जर का लाल मान्यता 2 सितंबर 1992 और 3 सितंबर 2011 को मूल्यवर्ग 5 के भारत पोस्ट द्वारा स्मारक डाक टिकट जारी किया गये थे।http://postagestamps.gov.in/Stamps_List.aspx Stamp issued by govt in 1992. 8 दिसंबर 2020 21 जनवरी 2021 https://web.archive.org/web/20210121210123/http://postagestamps.gov.in/Stamps_List.aspx deadhttp://postagestamps.gov.in/Stamps2011.aspx Stamp issued by govt. 8 दिसंबर 2020 22 जून 2018 https://web.archive.org/web/20180622004856/http://postagestamps.gov.in/Stamps2011.aspx dead सन्दर्भ श्रेणी:राजस्थान के लोकदेवता श्रेणी:राजस्थान की संस्कृति