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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

विजयेन्द्र स्नातक

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डॉ विजयेन्द्र स्नातक (1914 - 1998), हिन्दी साहित्यकार एवं आलोचक थे। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष भी रहे। डॉक्टर स्नातक हिंदी के मूर्द्धन्य विद्वान थे। उन्होंने कुल २६ पुस्तकों की रचना की। उनकी ख्याति 'राधावल्लभ सम्प्रदाय : सिद्धांत और साहित्य' नामक ग्रंथ से बहुत हुई। यह उनका शोध प्रबन्ध था जिसके लिए हिंदी के अन्यतम आलोचक डॉक्टर हज़ारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा 'न भूतो न भविष्यति'। उनकी अन्य उल्लेखनीय पुस्तकों में 'चिंतन के क्षण'(निबंध संग्रह), 'विचार के क्षण'(निबंध संग्रह ) 'विमर्श के क्षण'(निबंध संग्रह), 'अनुभूति के क्षण', सूरदास, 'चैतन्य महाप्रभु ', 'राष्ट्रभाषा हिंदी' , 'स्मृतिशेष मेरे समकालीन' , 'संस्कृति एवं साहित्य के प्रहरी' , 'द्विवेदियुगींन हिंदी नवरत्न' , 'साहित्य और जीवन ' , 'समीक्षात्मक निबंध ' , 'चिट्ठी पत्री' , कबीर आदि। डॉक्टर विजयेंद्र स्नातक ने ८५० से अधिक शोध ग्रंथों का परीक्षण किया जो हिंदी में सर्वाधिक है। डॉ॰ विजयेन्द्र स्नातक ने तुलसीदास की जन्मभूमि के निराकरण में सोरों पक्ष को मान्यता दी। डॉक्टर स्नातक को 'मंगलाप्रसाद पारितोषिक , उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का शिखर सम्मान' , हिंदी अकादमी दिल्ली का शिखर सम्मान, प्रकाशवीर शास्त्री सम्मान, हिंदी साहित्य सम्मेलन और नगरी प्राचारिणी सम्मान आदि प्राप्त हुए। उन्हें 'भारतीय मनीषा के प्रतीक पुरुष' कहा गया। उनकी रचनाएँ अनेक शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में निर्धारित हैं। डॉक्टर स्नातक में रचनाकर्म पर शोध हुए हैं। वे अनेक सरकारी और ग़ैर सरकारी हिंदी संस्थाओं के अध्यक्ष भी रहे। श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार