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छोटे साहिबज़ादे साका
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श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों की शहादत दुनिया के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटना है और हृदय को झकझोर देने वाले पाप का वृतांतhttp://archive.org/details/SakaSarhandSakaChamkaurSahib|title साका सरहंद और साका चमकौर साहिब Singh Gyani Pinderpal लाहौर बुक शॉप 2009 लुधियाना 41-49 https://archive.org/details/SakaSirhind/page/n9/mode/2up साका सरहिंद - डॉ. हरचंद सिंह सरहिंदी ट्रैक्ट नं. 528 सिख डिजिटल लाइब्रेरी सिख डिजिटल लाइब्रेरी 5,9 यह घटना एक ओर जहां मानवीय क्रूरता की वीभत्स तस्वीर पेश करती है, वहीं दूसरी
पृष्ठभूमि
अंगूठाकार|आखिर में दोनों साहिबजादों को जिंदा दीवारों में चुनवाने का ऐलान किया गया। कहते हैं दोनों साहिबजादों को जब दीवार में चुनना आरंभ किया गया तब उन्होंने ‘जपुजी साहिब’ का पाठ करना शुरू कर दिया और दीवार पूरी होने के बाद अंदर से जयकारा लगाने की आवाज़ भी आई।आखिर में दोनों साहिबजादों को जिंदा दीवारों में चुनवाने का ऐलान किया गया। कहते हैं दोनों साहिबजादों को जब दीवार में चुनना आरंभ किया गया तब उन्होंने ‘जपुजी साहिब’ का पाठ करना शुरू कर दिया और दीवार पूरी होने के बाद अंदर से जयकारा लगाने की आवाज़ भी आई।गुरुद्वारा फ़तहगढ़ साहिब जिस में ठंडे बुर्ज का इतिहास समाया है
चांदनी चौक, दिल्ली में सिख गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद, ओरजेब द्वारा हिंदू धर्म के अनुयायियों के इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन के विरोध के लिए
, उनके सपूत गुरु गोबिंद सिंह ने मजबूत सशस्त्र प्रतिरोध आंदोलन चलाया । जिसके चलते मुग़लों और पहाड़ी राजाओं की संयुक्त सेना से , आनंदपुर में , पर्वती राजाओं http://archive.org/details/SakaSirhind शाका सरहिंद - डॉ. हरचंद सिंह सरहिंदी ट्रैक्ट नं. 528 सिख डिजिटल लाइब्रेरी सिख डिजिटल लाइब्रेरी 6 पंजाबी के घेराव का टाकरा करना पड़ा।दस लाख की सेना द्वारा अपने अपने धर्म के अनुसार ली गई मन्नत के भरोसे गुरु साहिब ने आनंदपुर छोड़ने का फैसला किया। इन बेशुमार सिपाहीयों ने क़समें भुला https://www.sikhiwiki.org/index.php/Full_Zafarnama Full Zafarnama - SikhiWiki, free Sikh encyclopedia. Singh Guru Gobind www.sikhiwiki.org 2022-01-20 ਹਮ ਆਖ਼ਿਰ ਚਿਹ ਮਰਦੀ ਕੁਨਦ ਕਾਰਜ਼ਾਰ ॥ ਕਿ ਬਰ ਚਿਹਲ ਤਨ ਆਯਦਸ਼ ਬੇ ਸ਼ੁਮਾਰ ॥੪੧॥ HAM AAKHAR CHE MARDI KUNAD KAR ZAAR, KI BAR CHEHAL TAN AAI-DASH BE-SHUMAR (41) And finally what could the bravery (of my warriors) do when countless (of these Afghans) fell upon those forty men. गुरु साहिब के कारवां का पीछा किया और जवाबी कार्रवाई में सिखों की मुगल और पहाड़ी सेना के सैनिकों के साथ लड़ाई हुई।
8 पोह (21 दिसंबर) और 13 पोह (26 दिसंबर) सम्मत 1762 1705 https://archive.org/details/sri-gur-sobha/page/36/mode/2up ? q=160 श्री गुरु सोभा (कवि सेनापति द्वारा रचित) सिंह डॉ. गंडा सिंह प्रकाशन ब्यूरो पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला 2017 पटियाला को बाबा अजीत सिंह (17 वर्ष) और बाबा जुझार सिंह ( 13 साल) साका चमकौर साहिब में लड़ते हुए शहीद हुए थे और दो छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह (9 साल) और बाबा फतेह सिंह (7 साल) सरहिंद प्रांत की जेल में शहीद हुए थे। कुछ इतिहासकारों ने साका सरहंद को 13 पोह के स्थान पर 3 पोह सम्मत 1762 को घटित होने वाला लिखा है।https://sikhbookclub.com/Book/Chaar-Sahibzade1 ਚਾਰ ਸਾਹਿਬਜ਼ਾਦੇ ਪਦਮ ਪਿਆਰਾ ਸਿੰਘ ਸਿੰਘ ਬ੍ਰਦਰਜ਼ , ਬਜ਼ਾਰ ਮਾਈ ਸੇਵਾਂ, ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ 20 ਟੂਕ -ਸਤਾਰਾਂ ਸੈ ਬਾਹਠ ਪੋਹ ਤੀਜੀ ਵਾਰ ਮੰਗਲ ਥੋ।ਸਵਾ ਪਹਿਰ ਦਿਨ ਚੜ੍ਹੇ ਕਾਮ ਐਸੋ ਭਯੋ ਹੈ। ( ਗੁਰ ਪ੍ਰਣਾਲੀ - ਗੁਲਾਬ ਸਿੰਘ) 21 January 2022 sikhbookclub.comसाँचा : cite webhttps://www.thesikhencyclopedia.com/biographical/sikh-martyrs/fateh-singh-sahibzada/ FATEH SINGH, SAHIBZADA 2000-12-19 The Sikh Encyclopedia 25 December 2022http://archive.org/details/sikhreferenceboo0000dila The सिख संदर्भ पुस्तक Dilgeer Harajindar Singh 1997 Edmonton, Alb. , कनाडा : सिख एजुकेशनल ट्रस्ट फॉर सिख यूनिवर्सिटी सेंटर, डेनमार्क; अमृतसर: सिंह ब्रदर्स से उपलब्ध। 978-0-9695964-2-4 158 Internet ArchiveThe Sikh reference book https://archive.org/details/sikhreferenceboo0000dila Dilgeer Harajindar Singh Edmonton, Alb., Canada : Sikh Educational Trust for Sikh University Centre, Denmark ; Amritsar : Available from Singh Bros. 1997 978-0-9695964-2-4 158 Internet Archive
मैथिलीशरण गुप्त ने इस शहादत के माहात्म्य के बारे में लिखा है-
जिस कुल जाती देस के बचे दे सकते हों यों बलिदान। उस का वर्तमान कुझ भी हो भविष्य है महां महान। http://www.discoversikhism.com/sikh_library/gurmukhi/gurmat_parkash_201612.html ਛੋਟੇ ਸਾਹਿਬਜ਼ਾਦਿਆਂ ਦੀ ਸ਼ਹੀਦੀ Gurmat Parkash (201612) - December 2016 Discover Sikhism Bandungar Kirpal Singh www.discoversikhism.com 10-15 2022-01-20
गुरमत के अनुसार आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को स्वयं को मिटाने की आवश्यकता होती है। यह रास्ता एक महान योद्धा का काम है। सिख धर्म की नींव रखने वाले पहले सिख गुरु नानक देव जी ने सिख मार्ग पर चलने के लिए अपना शीश बलिदान देने की शर्त रखी थी। इसी तर्ज पर चलते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा की स्थापना की। खालसा एक आदर्श, पूर्ण और स्वतंत्र इंसान है जिसे गुरबाणी में सचियार, गुरुमुख और ब्रह्म ज्ञानी के रूप में वर्णित किया गया है। खालसा तन, मन, धन गुरु को समर्पित करता है, और जुल्म का विरोध करने के लिए लड़ने और मरने से नहीं हिचकिचाता - जौ ताऊ प्रेम खेलन का चाउ सिर धर तली गली मेरी आउ। इतु मार्गि पैर धारिजै सिर दीजै कान न कीजाई। (पृष्ठ 1412) अरु सिख हों अपने ही मन कौ एह लालच हो गन ताऊ उचरों। जब आव की औध निदान बने अति ही रण मैं तब जूझ मरों।जब गुरु जी ने किला छोड़ा तो दुश्मन ने सारी कसमें तोड़ दीं और उनका पीछा करना शुरू कर दिया। 21 दिसंबर 1705 को, सरसा नदी के पास, एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसके दौरान गुरु के दो छोटे बेटे और माँ गूजर कौर वहीर से अलग हो गए।
ठंडे बुरज़ का कारावास
माता गुजरीजी और दो छोटे साहिबजादों को पुराना नौकर मिला। यह उन्हें मोरिंडे के पास सहेरी गांव में उनके घर ले गया। घर जाकर नौकर का मन बेईमान हो गया। उन्होंने मोरिंडे थाने को सूचना दी और बच्चों को सौंप दिया। मोरिंदे के थानेदार ने 23 दिसंबर 1705 को मां और बच्चों को गिरफ्तार कर लिया https://archive.org/details/imperialgazettee23greauoft/page/20/mode/1up?q=Sirhind इंपीरियल गजेटियर2 ऑफ इंडिया, खंड 23, पृष्ठ 21 --इंपीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया-डिजिटल साउथ एशिया लाइब्रेरी dsal.uchicago.edu 2022-01-20 दिनांक 1762 वर्ष 1705 जॉर्जियाई और आम कैलेंडर के अनुसार बनाया गया है। सूबा सरहिंद 30.6245124 76.3863018 को सौंप दिया गया। उस रात उन्हें किले की ठंडी मीनार में रखा गया। दूसरे दिन बच्चों को सरहिन्द राज्य के न्यायालय में पेश किया गया। अदालत में बच्चों को धर्म स्वीकार करने के लिए लुभाने, डराने और धमकाने का प्रयास किया गया। उन्हें भी झूठ बोला गया कि तुम्हारे पिता को मार दिया गया है, अब तुम कहां जाओगे। बच्चों ने बहादुरी से सरहिंद राज्य में अपना धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया। वजीर खान ने काजी से राय मांगी कि इन बच्चों को क्या सजा दी जा सकती है। काजी ने कहा कि इस्लाम में बच्चों को सजा देने की इजाजत नहीं है। वजीर खान भी कुछ हद तक अपने माथे पर बच्चों की हत्या से बचना चाहता था। अब उसने नवाब मलेरकोटला से कहा कि वह चाहे तो इन बच्चों को अपनी मर्जी से सजा देकर अपने भाई से बदला ले सकता है। शेर खाँ ने आगे कहा कि मेरा भाई युद्ध में मारा गया, मैं इन शीर खोरों (दूध पीने वाले बच्चों) से कोई बदला नहीं लेना चाहता। अल्लाह यार खान जोगी के शब्दों में - "बदला ही लेना होगा तो लेंगे बाप से। महफूज रखे हम को खुदा ऐसे पाप से।http://archive.org/details/SakaSirhind Saka Sirhind - Dr. Harchand Singh Sarhindi Tract No. 528 Sikh Digital Library
मोती राम मेहरा का साहस
सरहंद के धर्मनिष्ठ मोतीराम मेहरा, कोल्ड टॉवर में शीतकालीन कारावास के दौरान वजीर खान के आदेशों की अवहेलना करते हुए http://archive.org/details /PohDiyaanRaataan पोह दिया राताँ खालसा सुरिंद्र 2004-12-15 121मोती राम मेहराजी गर्म दूध परोस कर साहिबजादों की मदद करते रहे। उन्हें कोहलू में यातना देकर मौत की सजा दी गई।
अंगूठाकार|पंजाब प्रांत में ज़िला फ़तहगढ़ साहिब पुराना नाम सरहंद
अंगूठाकार|गुरुद्वारा फ़तहगढ़ साहिब सरहंद|बाएँ
शहादत
काजी और शेर खां का ऐसा ही रवैया देखकर वजीर खां के मन में नरमी आने लगी, लेकिन दीवान सुच्चा नंद नहीं चाहते थे कि साहिबजादों को बख्शा जाए। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार उसने साहिबजादों से शैतान की तरह कुछ सवाल पूछे, जिनके जवाबों ने उन्हें बागी साबित कर दिया। उन्होंने वज़ीर खान से भी आग्रह किया कि इन बच्चों को छोड़ना बुद्धिमानी नहीं होगी। वजीर खान ने काजी से फिर पूछा। इस बार काजी ने बच्चों को मालिकों की इच्छा के अनुसार दीवारों में तराशने का आदेश दिया। दीवारों में बच्चों की पहचान की गई थी। कंधों तक पहुंचते ही दीवार गिर गई। बच्चों के फूल जैसे शरीर मूर्छित हो गए, चोट सहन न कर सके। उसके बाद 27 दिसंबर को https://www.theworldsikhnews.com/mool-nanakshahi-calendar-corrects-historians-goofs/ Nanakshahi कैलेंडर इतिहासकारों को सही करता है ' नासमझ, तारीखों को आसान बनाता है 2017-12-23 द वर्ल्ड सिख न्यूज एन-जीबी 2022-01-20 नानकशाही कैलेंडर में हमने 8 तारीखों को स्वीकार किया है पोह और 13 पोह क्रमशः बड़े और छोटे साहिबजादों की शहीदी तिथियां हैं, और ये क्रमशः 21 और 26 दिसंबर को हमेशा के लिए होंगी।बच्चों को फिर से अदालत में पेश किया गया। उन पर फिर से धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया, लेकिन साहिबजादों ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने अपने दादा की तरह शहीद होने की कसम खाई थी। भाई दुन्ना सिंह हंडुरिया जो गुरु जी से चमकौर की यात्रा समय उनके साथ था, ऐसा लिखता है- जोरावर सिंह ऐसा, क्यों भाई! आप यह क्यों करते हैं? फतेह सिंह तब कह्यो बखान, 'दस पातशाही होवह हान। http://www.discoversikhism.com/sikh_library/gurmukhi/gurmat_parkash_201612.html Gurmat Parkash (201612) - दिसंबर 2016 सिख धर्म की खोज करें www. Discoversikhism.com 13 2022-01-20अब हुक्म हुआ बच्चों को जिबाह करने का. दोनों जल्लादों ने दोनों बच्चों को अपने घुटनों के नीचे रखा और पहले उनके गले में खंजर घोंप दिया और फिर उन्हें तलवारों से उनके शरीर से अलग कर दिया। ठंडे बुर्ज में कैद माता गुजर कौर जी को जब शहाबजादों की शहादत की खबर मिली तो उन्होंने तुरंत अपने प्राण त्याग दिए। साहिबजादों की शहादत सिर्फ शहादत नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा थी। उन्हें मानसिक रूप से बहकाने का प्रयास किया गया। कई बार उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया और उन्हें यातनाएं दी गईं। उन्होंने यह सब अत्याचार कैसे सहा इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने अत्याचार से मुंह मोड़कर दस रियासतों के गौरव को बनाए रखा और असाधारण साहस का परिचय देते हुए खालसा पंथ को जीत दिलाई। गुरु जी के बच्चों को इस इरादे से मारा गया कि गुर उपदेश का दीपक इस दुनिया से बुझ जाएगा। लेकिन उन्हें इस बात का आभास नहीं था कि गुरमत की अखंड ज्योति खालसाओं के दिलों में प्रवेश कर चुकी है। साहिबजादों की शहादत के बारे में गुरु गोबिंद सिंह जी ने औरंगजेब को लिखा कि ऐसा क्या हुआ है कि मेरे चार बच्चे मारे गए, मेरा पांचवा बेटा खालसा अभी जिंदा है जो फनियार नाग है-
ਚਿਹਾ ਸ਼ੁਦ ਕਿ ਚੂੰ ਬੱਚਗਾਂ ਕੁਸ਼ਤਹ ਚਾਰ ॥ ਕਿ ਬਾਕੀ ਬਮਾਂਦਸਤ ਪੇਚੀਦਹ ਮਾਰ चिहा शुद कि चूँ बचगाँ कुश्तह चार| कि बाकी बमाँदस्त पेचिदह मार"78. जफरनामा
बाएँ|अंगूठाकार|उस स्थान पर एक सूचना बोर्ड जिस में साहिबज़ादों को ज़िंदा दिवार में गाढ़ा गया
अंगूठाकार|हवेली टोडरमल
अंतिम संस्कार
धार्मिक स्वतंत्रता के लिए गुरु तेग बहादुर की शहादत और गुरु गोबिंद सिंह के उत्पीड़न का विरोध करने के आंदोलन से प्रेरित होकर, सरहंद के एक धनी दीवान टोडर मल https://www.thesikhencyclopedia.com/biographical/hindu-bhagats-and-poets-and-punjabi-officials/todar-mall-seth/ TODAR MALL, SETH 2000-12-19 The सिख Encyclopedia en-US 2022-01-20, सोने की मुहर वाले स्तम्भ लगाने की शर्त के तहत, "दुनिया की सबसे महंगी" जमीन खरीदी, जिस पर साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया गया था। आजकल सरहंद में उस स्थान पर गुरुद्वारा ज्योति रूप 30.6428125 76.4040625 सजाया जाता है।
साहिबजादों की शहादत की कहानी जब ,राय कला द्वारा भेजे गए दूत , नूरेमाही ने गुरु गोबिंद सिंह को रायकोट और जगरावां के पास गांव लामा जट्टापुरा https://archive.org/details/sikhreferenceboo0000dila/page/196/mode/2up?q=Jatpura&view=theater The Sikh reference book Internet Archive Harajindara Siṅgha 1997 Edmonton, Alb., Canada : Sikh Educational Trust for Sikh University Centre, Denmark ; Amritsar : Available from Singh Bros. 978-0-9695964-2-4 196-197 में सुनाई तब गुरु साहिब ने घास का एक तिनका खोदा और भविष्यवाणी की कि मुग़ल राज्य की नींव नष्ट हो जाएगी। इस घटना से मुगल सल्तनत की जड़ें उखड़ गई हैं और उन्होंने अकाल पुरख के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रार्थना की कि बच्चों का उपहार, राष्ट्र और अकाल पुरख़ को समर्पित हो गया है। आजकल, वहाँ आजकल गुरुद्वारा गुरुसर पंजुआना साहिब स्थित है ।
सन्दरभ
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