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ईसाई धर्म में पवित्रीकरण
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ईसाई धर्म में पवित्रीकरण (Consecration in Christianity) का अर्थ है किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु को सामान्य या सांसारिक उपयोग से अलग करके ईश्वर की सेवा और पवित्र उद्देश्यों के लिए पूर्ण रूप से समर्पित करना। 'पवित्रीकरण' शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'कंसक्रेशियो' से हुई है, जिसका अर्थ है 'पवित्र बनाना'। ईसाई धर्मशास्त्र और उपासना पद्धति में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसका उपयोग विभिन्न धार्मिक संस्कारों और अनुष्ठानों में किया जाता है।Cross F. L. Livingstone E. A. The Oxford Dictionary of the Christian Church https://archive.org/details/oxforddictionary0000unse_f0e0 Oxford University Press 2005 978-0192802903 397-398
बाइबिल और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पवित्रीकरण की जड़ें 'पुराने नियम' में गहरी हैं, जहाँ ईश्वर ने मूसा को निर्देश दिया था कि वह वेदी, तंबू और पुजारियों का अभिषेक करे ताकि वे केवल ईश्वरीय कार्यों के लिए आरक्षित रहें। 'नए नियम' में, यीशु मसीह ने स्वयं को मानवता के उद्धार के लिए समर्पित किया। इसी वैचारिक नींव पर ईसाई चर्च ने सदियों से व्यक्तियों और वस्तुओं को पवित्र करने की परंपरा विकसित की।Grenz Stanley J. Theology for the Community of God https://archive.org/details/theologyforcommu0000gren_i9j9 Wm. B. Eerdmans Publishing 2000 978-0802847553 512-514
यूकेरिस्ट (प्रभु भोज) का पवित्रीकरण
ईसाई धर्म में पवित्रीकरण का सबसे प्रमुख और केंद्रीय रूप यूकेरिस्ट या 'प्रभु भोज' के दौरान देखने को मिलता है। कैथोलिक, पूर्वी ऑर्थोडॉक्स और एंग्लिकन परंपराओं में, जब कोई पादरी रोटी और दाखरस पर ईसा मसीह के शब्द ("यह मेरा शरीर है... यह मेरा रक्त है") दोहराता है, तो इसे 'पवित्रीकरण' कहा जाता है।
कैथोलिक धर्मशास्त्र के अनुसार, इस पवित्रीकरण के क्षण में रोटी और दाखरस का आंतरिक मूलतत्व ईसा मसीह के वास्तविक शरीर और रक्त में बदल जाता है। इस रहस्यमय वैचारिक परिवर्तन को तत्त्वांतरण कहा जाता है। हालाँकि, अधिकांश प्रोटेस्टेंट संप्रदाय इस तत्त्वांतरण को नहीं मानते; उनके लिए यह पवित्रीकरण केवल ईसा मसीह के बलिदान की एक प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक स्मृति है।https://www.vatican.va/archive/ENG0015/__P3W.HTM Catechism of the Catholic Church - The sacrament of the Eucharist Vatican.va 21 जून 2026
व्यक्तियों का पवित्रीकरण
व्यक्तियों के संदर्भ में, पवित्रीकरण का अर्थ है जीवन भर के लिए स्वयं को ईश्वर की सेवा में सौंप देना। इसके मुख्य रूप निम्नलिखित हैं:
बिशप का अभिषेक: जब किसी पादरी को उच्च पद (बिशप) पर नियुक्त किया जाता है, तो उस धार्मिक संस्कार को 'बिशप का पवित्रीकरण' कहा जाता है। यह चर्च के पदानुक्रम में सबसे पवित्र अनुष्ठानों में से एक है।
धार्मिक जीवन: जब नन और भिक्षु (Monks) गरीबी, शुद्धता (ब्रह्मचर्य) और आज्ञाकारिता की प्रतिज्ञा लेते हैं, तो इसे 'पवित्र जीवन' कहा जाता है।Schmemann Alexander For the Life of the World: Sacraments and Orthodoxy St Vladimir's Seminary Press 1973 978-0913836088 42-45
स्थानों और वस्तुओं का पवित्रीकरण
ईसाई परंपरा में केवल मनुष्यों का ही नहीं, बल्कि निर्जीव वस्तुओं और स्थानों का भी पवित्रीकरण किया जाता है। जब किसी नए चर्च भवन का निर्माण होता है, तो उसके उद्घाटन पर एक विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जाता है जिसे 'चर्च का पवित्रीकरण' कहते हैं। इसके बाद उस भवन का उपयोग किसी भी धर्मनिरपेक्ष या सांसारिक कार्य के लिए नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार, वेदी, बपतिस्मा का जल, और धार्मिक बर्तनों (जैसे चेलिस) का भी उपयोग से पूर्व पवित्र अभिषेक किया जाता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
कैथोलिक विश्वकोश (1913) - पवित्रीकरण का इतिहास और महत्व