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चीन-भारतीय सीमा विवाद
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चीन-भारतीय सीमा विवाद 20 अक्टूबर 1962 – वर्तमान
(10 20 1962) वास्तविक नियंत्रण रेखा चल रहा है China India
thumb|चीन और भारत के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (सीआईए द्वारा बनाया गया नक्शा)
भारत-चीन सीमा विवाद, एशिया की दो प्रमुख शक्तियों—भारत और चीन—के बीच स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों की संप्रभुता को लेकर चला आ रहा एक जटिल और दीर्घकालिक क्षेत्रीय विवाद है। यह विवाद मुख्यतः दो बड़े क्षेत्रों तथा कई छोटे-छोटे भूभागों से संबंधित है, जिनकी सीमाएँ ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हो सकीं।
इस विवाद की जड़ें औपनिवेशिक काल में किए गए सीमा-निर्धारण प्रयासों में निहित हैं, विशेषकर पूर्वी क्षेत्र में खींची गई मैकमहोन रेखा से उत्पन्न हुआ है। यह रेखा सन् 1914 में शिमला सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश शासित भारत और तिब्बत के बीच निर्धारित की गई थी, किंतु चीन ने इसे कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। यही असहमति आज तक पूर्वी क्षेत्र में तनाव का प्रमुख कारण बनी हुई है।
पश्चिमी क्षेत्र में विवाद का केंद्र अक्साई चिन है, जो ऐतिहासिक रूप से जम्मू और कश्मीर (रियासत) का भाग माना जाता रहा है। हालांकि, 1962 का भारत-चीन युद्ध के बाद से इस क्षेत्र पर चीन का प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो गया है। इस युद्ध ने दोनों देशों के संबंधों में गहरी दूरी पैदा कर दी और सीमा प्रश्न को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
चूँकि दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर कोई पूर्णतः पारस्परिक और औपचारिक रूप से मान्य समझौता नहीं हो पाया है, इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में समय-समय पर तनाव, सैन्य आमने-सामने की स्थितियाँ और छिटपुट झड़पें देखने को मिलती रहती हैं।
भारत–चीन सीमा विवाद के दो प्रमुख केंद्र हैं, जिनकी भौगोलिक, ऐतिहासिक और सामरिक विशेषताएँ इसे और अधिक जटिल बनाती हैं। पहला क्षेत्र अक्साई चिन है, जो वर्तमान में चीन के प्रशासनिक नियंत्रण में है, किंतु भारत इस पर अपना दावा करता है। यह क्षेत्र मुख्यतः ऊँचाई पर स्थित निर्जन और बंजर भूभाग है, हालांकि इसके सीमांत भागों में कुछ महत्त्वपूर्ण चारागाह भी पाए जाते हैं।आकाश हसन हन्ना एलिस-पीटरसन https://www.theguardian.com/world/2020/jul/03/our-pastures-have-been-taken-india-china-himalayan-land-grab 'Our pastures have been taken': Indians rue China's Himalayan land grab https://web.archive.org/web/20221217102639/https://www.theguardian.com/world/2020/jul/03/our-pastures-have-been-taken-india-china-himalayan-land-grab 17 दिसंबर 2022 द गार्जियन 3 जुलाई 2020 सामरिक दृष्टि से इसका महत्त्व अत्यधिक है, क्योंकि यह कश्मीर, तिब्बत और शिंजियांग के संगम क्षेत्र में स्थित है, और यहीं से होकर चीन का शिनजियांग–तिब्बत राजमार्ग गुजरता है, जो उसकी आंतरिक संपर्क व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दूसरा प्रमुख विवादित क्षेत्र मैकमहोन रेखा के दक्षिण में स्थित है, जिसे पूर्व में उत्तर-पूर्वी सीमांत एजेंसी (नेफ़ा) कहा जाता था और आज यह अरुणाचल प्रदेश के रूप में जाना जाता है। इस क्षेत्र का प्रशासन भारत के पास है, जबकि चीन इस पर अपना दावा करता है। मैकमोहन रेखा का निर्धारण सन् 1914 में शिमला सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच हुआ था, किंतु चीन ने इस समझौते को कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी।Hoffmann 1990 19 उसका तर्क है कि उस समय तिब्बत एक स्वतंत्र और संप्रभु इकाई नहीं था, अतः उसके द्वारा किए गए किसी भी सीमा-समझौते को वैध नहीं माना जा सकता।
1962 का भारत-चीन युद्ध दोनों प्रमुख विवादित क्षेत्रों—अक्साई चिन और मैकमोहन रेखा—में लड़ा गया था, जिसने भारत और चीन के संबंधों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। इस संघर्ष के दौरान चीनी सैनिकों ने पश्चिम में लद्दाख क्षेत्र में भारतीय चौकियों पर आक्रमण किया, जबकि पूर्व में मैकमोहन रेखा को पार कर सैन्य कार्रवाई की। इसके बावजूद, जहाँ सिक्किम क्षेत्र में सीमा अपेक्षाकृत स्पष्ट और सहमति-आधारित थी, वहीं सन् 1967 में वहाँ भी एक संक्षिप्त किन्तु तीव्र सीमा संघर्ष देखने को मिला।
बाद के दशकों में, दोनों देशों के बीच तनाव समय-समय पर उभरता रहा, किंतु कई अवसरों पर संभावित टकराव को कूटनीतिक प्रयासों से टाल दिया गया। उदाहरणस्वरूप, सन् 1987 और 2013 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उत्पन्न तनावपूर्ण स्थितियों को सफलतापूर्वक कम किया गया। सन् 2017 में भूटान और चीन के बीच सीमा क्षेत्र में उत्पन्न विवाद—जिसे सामान्यतः डोकलाम संकट के रूप में जाना जाता है—में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए और कुछ घायल भी हुए, किंतु अंततः इस स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित कर लिया गया।रामचंद्रन सुधा 15 जुलाई 2020 Beijing Asserts a More Aggressive Posture in Its Border Dispute with India https://jamestown.org/program/beijing-asserts-a-more-aggressive-posture-in-its-border-dispute-with-india/ 17 जुलाई 2020 जेम्सटाउन फाउंडेशन 17 जुलाई 2020 https://web.archive.org/web/20200717001654/https://jamestown.org/program/beijing-asserts-a-more-aggressive-posture-in-its-border-dispute-with-india/ live
हाल के वर्षों में सन् 2020 विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब कई स्थानों पर झड़पें हुईं और जून 2020 में यह संघर्ष गंभीर रूप लेता हुआ दर्जनों सैनिकों की मृत्यु का कारण बना, जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक बार फिर तीव्र तनाव उत्पन्न हुआ।गोल्डमैन रसेल India–China Border Dispute: A Conflict Explained https://www.nytimes.com/2020/06/17/world/asia/india-china-border-clashes.html 27 जून 2020 द न्यूयॉर्क टाइम्स 17 जून 2020 26 जून 2020 https://web.archive.org/web/20200626233609/https://www.nytimes.com/2020/06/17/world/asia/india-china-border-clashes.html live
इन जटिलताओं के बीच, सीमा विवाद के अंतिम समाधान की दिशा में कई कूटनीतिक पहलें भी की गई हैं। सन् 1993 और 1996 में महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनमें “विश्वास-निर्माण उपायों” तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा के सिद्धांत को स्थापित किया गया, ताकि सीमा पर स्थिरता बनाए रखी जा सके। इसके अतिरिक्त, विवाद के समाधान हेतु विभिन्न संस्थागत तंत्र भी विकसित किए गए, जैसे सीमा प्रश्न पर संयुक्त कार्य समूह (JWG), जिसे राजनयिक और सैन्य विशेषज्ञ समूहों का सहयोग प्राप्त था। सन् 2003 में “विशेष प्रतिनिधि” तंत्र की स्थापना की गई,शंकर महेश https://books.google.com/books?id=3_t0DwAAQBAJ The China-India Rivalry in the Globalization Era 2018-09-03 जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी प्रेस 978-1-62616-600-4 पॉल टी. वी. 40–41 2: Territory and the China-India Competition 19 मार्च 2021 13 अगस्त 2024 https://web.archive.org/web/20240813235327/https://books.google.com/books?id=3_t0DwAAQBAJ live
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सन्दर्भ