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411 REFERENCE · Wikipedia

पुनर्जागरण दर्शन

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पुनर्जागरण दर्शन, यूरोप में 1400-1600 के बीच की अवधि के विचारों को संदर्भित करता है। यह मध्ययुगीन दर्शन और आधुनिक दर्शन के साथ अतिव्यापन करता है। पुनर्जागरण दर्शन चौदहवीं और पंद्रहवीं शताब्दियों में थॉमस एक्विनास, ओकहम के विलियम और पादुआ के मार्सिलियस जैसे प्रसिद्ध दार्शनिकों से प्रभावित था। जिसकी शुरुआत पारंपरिक रूप से रेने डेसकार्टेस के 1637 में प्रकाशित आधुनिक पद्धति पर विवेचन से मानी जाती है। इसने मध्य युगीन और आधुनिक दर्शन के बीच एक सेतु का कार्य किया। == दर्शन की संरचना == बारहवीं और तेरहवीं सदी में अरस्तू के लेखन के पुनर्प्राप्ति के बाद, यह स्पष्ट हुआ कि तर्क के अलावा, उनके कार्यों में प्राकृतिक दर्शन, नैतिक दर्शन और तत्वमीमांसा से संबंधित कई अन्य महत्वपूर्ण पहलू थे। इन क्षेत्रों ने उभरते विश्वविद्यालयों के दर्शन पाठ्यक्रम के लिए एक ठोस संरचना प्रदान की, जिससे उनके विचारों का व्यापक प्रभाव पड़ा। == दर्शन के स्त्रोत == स्रोतों के संदर्भ में, पुनर्जागरण दर्शन में विचारों की निरंतरता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। यद्यपि अरस्तू को निर्विवाद अधिकारी नहीं माना गया, उनके विचार अक्सर बहस और चर्चा का केंद्र बने रहे। मध्ययुगीन व्याख्यानों में उनके भौतिकी को पढ़ाया जाता था, नैतिक दर्शन में उनकी निकोमैकीय नैतिकता और राजनीति पर चर्चा होती थी, और तत्वमीमांसा को उनके तत्वमीमांसा के माध्यम से समझा जाता था। पुनर्जागरण काल में अरस्तू के कार्य दर्शन के लिए आधारभूत बने रहे। इस अवधि में उनके ग्रंथों का लैटिन और स्थानीय भाषाओं में अनुवाद, टिप्पणियों और व्याख्याओं का व्यापक प्रसार हुआ। सुधार आंदोलन के बाद भी अरस्तू की निकोमैकीय नैतिकता सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक धर्मानुयायी विश्वविद्यालयों में नैतिकता का मुख्य आधार बनी रही। 1682 से पहले निकोमैचेन नीतिशास्त्र पर 50 से अधिक धर्मानुयायी टिप्पणियां प्रकाशित हुईं। अरस्तू के कार्यों ने पुनर्जागरण दर्शन में विचारों की गहराई और व्यापकता को बनाए रखा, जो इसकी एक प्रमुख विशेषता बनी। == संदर्भ ==