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लेबनान का गृहयुद्ध
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लेबनानी गृहयुद्ध (ar الحرب الأهلية اللبنانية) बहुआयामी समर थी, जो हुआ थी १९७५ से १९९० तक। यह का अंजाम थी, १.५ लाख मौतेंhttp://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknown और थी पलायन लगभग १० लाख लोगा के लेबनान तो।Byman, Daniel, and Kenneth Michael Pollack.
धार्मिक विविधता लेबनानी लोगा की वड़ी कारक थी समर लिए।; लेबनानी ईसाईयों और लेबनानी सुन्नी मुसलमानों बहुमत थी तटीय शहरों में; लेबनानी शिया मुसलमानों मुख्य रूप से थे दक्षिण लेबनान और बेक़आ वादी में पूर्व में; और द्रूस और ईसाईयों देश पहाड़ी के क्षेत्रों में। उस वक्त में, लेबनानी सरकार थी, कुलीनों मैरोनाइतों के समुदाय में के प्रभाव के नीचे।Islam and Assisted Reproductive Technologies Ihorn Marcia C. Tremayne Soraya 2012 238https://news.bbc.co.uk/2/hi/middle_east/6932786.stm Who are the Maronites? 6 August 2007 BBC News – Middle East जोड़ना राजनीति और धर्म बीच में प्रबलित थी फ्रेंच अधिदेश में, १९२० से १९४३, और देश का संसदीय तरजीह लेबनानी ईसाईयों लिए। लेकिन लेबनानी मुसलमान वड़े अल्पंसंख्यक थी और तांता फिलिस्तनीओं की—पहला १९४९ में और फिर १९६७ में— योगदान किया लेबनान की जनसांख्यिकीय का बदलाव, की ओर अंतिम मुसलमान बहुमत। लेबनान के ईसाईयों प्रभुत्व सरकार कोले थी बढ़ती विपक्ष मुसलमानों, पैन-अरबवादीओं, और वामपंथी को। शीतयुद्ध ने ज़ोर किया विखंडनीय प्रभाव देश के, जोड़ी थी तो जेरी राजनीतिक ध्रुवीकरण, जो पहले हुआ १९५८ लेबनानी संकट को। ईसाईयों के ओर लेया पक्षिमी विश्व जब, मुसलमानों, पैन-अरबवादी, और वामपंथी ने ओर लेया सोवियत-संरेखित अरब देशों।https://news.bbc.co.uk/2/hi/middle_east/6932786.stm Who are the Maronites? 6 August 2007 BBC News – Middle East
लड़ाई लेबनानी ईसाई मिलिशियों और फिलिस्तीन विद्रोहियों, मुख्य रूप से फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन, शुरू हुआ थी १९७५ में और बनाया गठबंधन फिलिस्तीनों और लेबनानी मुसलमानों, पैन-अरबवादीओं और वामपंथी। Halliday, 2005: 117 समर गहरा गहरा हुआ, जब विदेश शक्तियों, मुख्य रूप से, सीरिया, इज़राइलऔर ईरान शामिल हुआ और सहायता या साथ लड़े, विभिन्न गुटों के साथ। समर में, यह गठबंधनों बदलाव होये तेज़ी और अप्रत्याशित रूप से। जब बहुत लड़ाईओं हुआ विरोध धार्मिका और विचारधारा गुटों बीच में, बहुत समर थी कोयी धार्मिक समुदायों बीच में, मुख्य रूप से ज्साईयों और शिया बीच में। शांति स्थापना सेनों, जैसे बहुराष्ट्रीय सेना लेबनान में और संयुक्त राष्ट्र सेना लेबनान मे, तैनात थी लेबनान उस वक्त में।
१९८९ में, तैफ समझौता चिह्नित किया शुरू अंत का लड़ाई, जब समिति, जो नियुक्त थी अरब लीग द्वारा, शुरू किया तैयार किया समाधानों समर लिए। मार्च १९९१ में, संसद लेबनान की ने पारित किया आम माफ़ी कानून, जिस ने क्षमा किया सारे राजनीति अपराधों जो बढ़ावा थी, कानून के अधिनियमन के वक्त के पहला।http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknown मई १९९१ में, सारे सशस्त्र गुटों जो प्रचालन करदे थी लेबनान में, भंग थी, के सिवा हिज़बुल्लाह, एक ईरान समर्थित शिया इस्लामियत मिलिशिया। यद्यपि लेबनानी सशस्त्र सेना धीरे से फिर से बनानया थे, जैसा लेबनान का कला गैर-सांप्रदायिक सशस्त्र संस्था, समर के बाद, संधीय सरकार रेयी थी असमर्थ चनौती करन हिज़बुल्लाह का सशस्त्र ताकत। धार्मिक तनाव्, मुख्य रूप से शियों और सुन्नीओं बीच में, प्रेसिस्ट करन सारे लेबनान में तब से, औपचारिक अंत युद्ध का, १९९० में।Lebanonː Current Issues and Background https://archive.org/details/isbn_1590338715 Rolland John C. 2003 978-1590338711 144
उस्मानी और यूरोपीय शासन
१८६०, एक गृहयुद्ध द्रूस और मैरोनाइटों हुआ थी उस्मानी मुतसरिफेट माउंट लेबनान का। यह युद्ध का अंजाम थी हत्याकांड लगभग दस हज़ारा ईसाईयों और छह हज़ारा द्रसों की।
बाएँ|अंगूठाकार|मुतासरीफ अवधि के दौरान माउंट लेबनान में सैनिक
प्रथम विश्व युद्ध मुश्किम थी लेबनानी लिए। अधिकांश अरबों लड़ाई किया उस्मानी सेना में, ख़िलाफ़ ब्रीटैश और फ्रेंच आक्रमणकारियों।http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknownhttp://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknownhttp://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknownhttp://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknown
साथ हराना और विघटन उस्मानी साम्राज्य (१९०८-१९२२), फ्रेंच आक्रमणकारियों निय्ंत्र लेया क्षेत्र क्या कहा फ्रेंच अधिदेश सीरिया और लेबनाण लिए, नीचे राष्ट्र संघ। फ्रेंच ने बनाया राज्य ग्रटर लेबनान का, जैसे सुरक्षित ठिकाना मैरोनाइटों लिए, लेकिन शामिल किया वड़ा मुसलमान जनसंख्या, उस के बॉर्डरों में।http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknown
१९२६, लेबनान घोषित थी गणतंत्र, और एक संविधान अपनाया थी। लेकिन संविधान निलंबित थी, १९३२ में। विभिन्न गुटों वांछित करदे थीम, सीरिया के साथ एकता, या स्वतंत्रता फ्रेंच को।http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknown १९३६ में, मैरोनाइट फलंग पार्टी, जो स्थापित किया पियर गेमायल।http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf .IMPLEMENTATION OF GENERAL ASSEMBLY RESOLUTION 60/251 OF 15 MARCH 2006 ENTITLED HUMAN RIGHTS COUNCIL U.N Human Rights Council 23 November 2026 18 13 दिसंबर 2025 15 जनवरी 2007 https://web.archive.org/web/20070115172923/http://www.ohchr.org/english/bodies/hrcouncil/docs/specialsession/A.HRC.3.2.pdf bot: unknown
लेबनान की स्वतंत्रता
द्बितीय विश्वयुद्ध और १४९०'ओं में, वड़ा बदलाव इया थी लेबनान और मध्य पूर्व को। स्वतंत्रता लेबनान लिए, फ्रांस ने वादा किया, जो मिल गया थी २२ नवंबर १९४३ में। आज़ाद फ्रैंच सैनिकों, जो ने लेबनान को आक्रमण किया, १९४१ में, बेरूत में बाहर कदन विची फ्रैंच सेनों को, बाहर गये लेबनान तु, १९४६ में। लेबनान और अर्थव्यवस्था पर, शक्ति मिली मैरोनाइटों को। एक संस्द बनी थी, कहां दोने मुसलमान और ईसाईयों कोले कोटा निर्धारित सीटें को। अनुरूप के साथ, प्रधान मैरोनाइट होना थीम प्रधान मंतरी सुन्नी मुसलमान और वक्ता संसद का शिया मुसलमान।
१९४७ में, संयक्त राष्ट्र का योजना फिलिस्तीन के विभाजन लिए, का अंजाम थी, गृहयुद्ध फिलिस्तीन में, और अंत अधिदेश फिलिस्तीन का, और इज़राइल की स्वतंत्रता का धोषणापत्र, १४ मई १९४८ में। चल रहे गृहयुद्ध बन गया थी राज्य समर, इज़राइल और अरब राज्य बीच में, १९४८ अरब-इज़राइल युद्ध। इस का अंजाम थी, फिलिस्तीनी शरणार्थियों लेबनान के सीमा पर जाना, लेबनान में।
अंगूठाकार|1958 के लेबनान संकट के दौरान बेरूत के बाहर एक फॉक्सहोल में अमेरिकी मरीन बैठा है।
जुलाई १९५७ मे, गृह्युद्ध लेबनान को धमकी किया, जो जे हुआ थी मैरोनाइट ईसाईयों और मुसलमानों बीच में। राष्ट्रपति केमिली चामून कोशिश किया थी तोड़न बोलबाला लेबनानी राजनीति के, जो राजनीति राजवंशों कोले थी लेबनान में। यह राजवंशों ने बनाए रखी किया थी उस के चुनावी का निवेदन, उस ना इयी किया थी, उपयोग किया, उस के क्लाइंट-संरक्ष्क संबंधों बनोन, उस का के स्थानीय समुदायों के साथ। यद्यपि केमिली चामून ने सफल कया थी , प्रायोजक करन विकल्प उम्मीदवारों, १९५७ चुनाव मॅं, यह का अंजाम थी परंपरागत राजवंशों हार गयए थी, यह राजवंशों ने युद्ध किया चामुन के ख़िलाफ़, के रूप युद्ध पाशों का।
१९५६ में, तनाव मिस्र के साथ आगे वढ़ाएं, जब गुट निरपेक्ष प्रधान केमिली चामून ने नहीं तोड़े, कूटनीतिक संबंधों पक्षिमी देशों के साथ, जो ने मिस्र को, स्वेज़ संकट, गुस्सा बनया थी मिस्र का राष्ट्रपति जमाल अब्देल नासेर। यह थी शीतयुद्ध बीच में और चामुन बहुत कहा पया उस समर्थक पश्चिमी, यद्यपि उस ने हस्ताक्ष्ररित थी, कई व्यापार सौदा सोवियत संघ के साथ। नासेर ने हल्ला किया चामुन क्योकि उस की संदिग्ध सहायता अमेरिका नेतृत्व बग़दाद संधि। नासेर को लगदा थी समर्थक पश्चिमी बग़दाद संघि, धमकी थी अरब राष्ट्रवाद लिए।
राष्ट्रपति चामुन देखे थी क्षेत्रीय संघि सनिश्चित करन सुरक्षा विदेश सेनों के ख़िलाफ़्; लेबनान इतिहास में छोती अंगरग सेना, जो काभी कभी असरदार नहीं थी लेबनान की सार्वभौम को रक्षा करन, और यह करके बाद के साला में, फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के छोपेमार गुट् लिए, आसान लगया थी उना को प्रवेश करन लेबनान और बैरकों बनोन, जो वी कब्जा करन बैरकों, जो बॉर्ड्र इज़राइल के साथ, १९६८ के शुरूआत से। शुरूआत के झापों में, लेबनान की सेना ने नियंत्रण बैरकों लिए हारे, फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन को और हारे बाहुत सैनिकों। राष्ट्रपति चामुन जागरूक थी, देश की भेद्यता वारे जान था ही, बाहर सेनों को।
उस का लेबनानी पैन-अरबवादी सुन्नी प्रधान मंत्री रशीद करामी नासेर को सहायता किया थी, १९५६ और १९५८ में। लेबनानी मुसलमानों दबाव किया थी सरकार को, जोड़ना करन, नव-निमिर्त संयुक्त अरब गणतंत्र, जो बनी थी एकीकरण सीरिया और मिस्र के साथ, जब बहुमत लेबनानी और विशेष रूप से मैरोनाइतों को, और वांछित करने लेबनान को रखन एक के रूप स्वतंत्रता, एक आप के संसद के साथ। राष्ट्रपति केमिली चामुन डर दा थी, उस की सरकार की तख्तापलत वारे और पूछया थी अमेरिका की हस्तक्षेप लिए। उस वक्त में, संयुक्त राज्य शीतयुद्ध में।
चामुन ने पुछया थी सहायता लिए, उस ने कहा थी साम्यवादों उस के सरकार् को तख्तापलत करन लगे थी। चामुन सिर्फ नगी जवाब देंदा थी, विद्रोह राजनीति राजव्ंशों का, लेकिन दोनो मिस्र और सीरिया ने अवसार लेया प्रॉक्सीओं को तैनात करन लेबनान समर में। इसलिए अरब राष्ट्रवादी आंदोलन, जो जॉर्ज हबाश ने नेतृत्व किया और बाड़ बन गया थी, लोकप्रिय मोर्चा मुक्ति फिलिस्तीन लिए और गटों थी फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन का, नासेर ने तैनात किया थी, लेबनान में, उस को।
अरब राष्ट्रवादी आंदोलन गुप्त मिलिशिया था, जो फंसा थी, तख्तापलतों के कोशिशों जॉर्डन साम्राज्य और इराक़ के राष्ट्रपति के ख़िलाफ़, नासेर के बिडिंग लिए, १९५०'ओं में। फ़तह के संस्थापक सदस्यों, यासिर अराफ़ात और खलील वज़ीर, उस लेबनान् गये थी, विद्रोह को उपयोग करन, जो युद्ध फ़ोर्मेंट कर सकदे इज़ाराइल के ख़िलाफ। उस ना ने हिस्सा किया लड़ाई में।
१९५७ में, राष्ट्रपति चामुन नहीं राजी कर सकदे नहीं, फौड चेहाब, उपयोग करन सेना मुसलमान प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़, फौद डर था, जे उस बीच में के सरकार के में शामिल हुआ थी, उस की विविध सेना को विभाजिन होना थी। फलंग मिलिशिया अगया थी, राष्ट्रपति के मदद लिए, उस ना ने अंत किया सड़क अवरोध को, प्रमुख शेहरों को अपंग किया। उस का कार्रवाई करके, प्रधान मंत्री करामी को तख्तापलत किया, पद सुरैक्षित किया चार-पुरुष में (जो बनया थी विरोध प्रदर्श्ध के बाद) , पियर गेमायल लिए (उस का नेता)।
जनसांख्यिकीय तनाव
लेबनान में फिलिस्तीनी विद्रोह
१९६०'ओं में, लेबनान बितेरा शांत थी, लेकिन यह् बदल गया थी। फ़तह और होर फिलिस्तीनी मुक्ति संगठनों के गटों, जो लंबे वक्त लिए सक्रिय हुआ थी, ४ लाख फिलिस्तीनी शरणार्थियों, जो लेबनानी कैम्पों में थी। लगातार १९६०'आं में, केंद्र सश्स्त्र फिलिस्तीन गतिविधियाँ लिए जॉर्डन थी। उस मजबूर थी स्थानांरित करन, के बाद जब राजा हुसैन, जब १९७० काला सितम्बर जॉर्डन में हुआ थी। फ़तह और होर फिलिस्तीनी समूह कोशिश किया थी ताख्तापल्ट करन, पोस्ताहित किया था विभाजित जॉर्डन के सेना में, कुछ अरब राष्ट्रवादी आंदोलन ने कोशिश किया थी, नासेर के बिडिंग लिए। जॉर्डन ने जवाब देया थी, और फिलिस्तीनी सेनों को निष्कासित किया था, उस के बाद उस फिलिस्तीनी सेनो लेबनान गये थी। जब अगये थी, उस न ने "राज्य बीच में राज्य" बनया थी। यह कार्रवाई नहीं अच्छा लगया लेबनानी सरकार को, और यह हिलया थी लेबनान की सांप्रदायिक का संतुलन।
लेबनानी मुसलमानों ने फिलिस्तीनीओं को एकजुटता अभिव्यक्त किया थी, उस का मंज़िल थी, राजनीति प्रणाली को बदल करन। पहला का था प्रनाली थी सर्वसम्मति का, जो अलग संप्रदाय का। देरे सुन्नी मुसलमान उस् इच्छित करने थी, कहां उनका हिस्सा होर बड़ा बनोन। कोयी समूहों, लेबनानी राष्ट्रीय आंदोलन में, का वांछित थी, होर धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक प्रनाली बनोन लेकिन इस समूहों में, तेजी से शामिल होते थी, इस्लामियत समूहों, जो फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन ने प्रोत्साहित किया थी, होर प्रगितशीम मांगों पहला कार्यसूची के, बाहर निकाले गये थी, १९७६ जनवारी में। इस्लामिय्तों ने नहीं सहायता किया धर्मनिरपेक्ष आदेश लेबनान में और उन्हा का वांछित थी, सरकारी बनोन मुसलमानों मौलाना की।
यह घटनाएँ, मुख्य रूप से फ़तह और त्रिपोली की इस्लामिय्त आंदोलन, जो तौहिद कहा जाते थी, कार्यसूची के बदलाब में, साम्यवादों वी। यह गठबंधन, कहा गये पी वामपन्थी, लेकिन बाहुत उस के प्रतिभागियों रूढ़िवादी थी, और धार्मिकों पार्टियों, जो कोले नहीं सामान्य व्यापक वैचारिक कार्यसूची वारे। बाल्कि, उस एक साथ आये थी, देरे लघु अवधि मंज़िल थी, तख्तापलत करन देरा स्थापित राजनीति थी, उनमें व्यक्ति समूह कोले आप के व्यक्ति शिकायतों ने, उस को उत्साह किया।
यह ने अनुमत किया फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन/फ़तह को, परिवर्तन करन पश्चिमी भाग बेरूत का, इस से उनमें का गढ़। फ़तह गठित किया ८०% फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन का सदस्यपता और फ़तह के छापेमार ने सरकार किया अधिकांश संस्थान। फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन ने नियंत्रण किया केंद्र सिडियन और तायर का, १९७०'ओं के शुरुआत् में। इस ने नियंत्रण किया वड़े ताहों दक्षिण लेबनान में, जो स्वादेशी शिया जनसंख्या ने पीड़ित किया निरादर, देरा जो होता ज्ब उस जाते थी, फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के चेकप्वाइंट के पास, और अबी उस गये थी मजबूर के नाल, जब बेरूत गयें थी।
फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन किया थी, सहायता के साथ, देरे,"स्वयंसेवकों", लीबिया और अल्जीरिया तो अये थी, के पास देरे बंदरगाहों पीएलओ नियंत्रण किया, जो वी बाहुत सुन्नी लेबनानी समू
श्रेणी:इज़राइल के युद्ध