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पीटर सिद्धांत
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पीटर सिद्धांत प्रबंधन और संगठनात्मक व्यवहार से संबंधित एक प्रसिद्ध अवधारणा है। इस सिद्धांत के अनुसार, "किसी भी पदानुक्रमित संगठन में, प्रत्येक कर्मचारी अपनी 'अक्षमता के स्तर' तक पदोन्नत होने की प्रवृत्ति रखता है।" सरल शब्दों में, यदि कोई व्यक्ति अपनी वर्तमान भूमिका में बेहतरीन काम करता है, तो उसे इनाम के तौर पर ऊंचे पद पर प्रमोट कर दिया जाता है। यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक कि वह व्यक्ति एक ऐसे पद पर नहीं पहुँच जाता जहाँ वह उस काम को करने के योग्य नहीं रहता। इस स्तर पर पहुँचने के बाद उसकी पदोन्नति रुक जाती है और वह अपने करियर के अंत तक उसी अक्षम स्थिति में बना रहता है।Peter Laurence J. Hull Raymond The Peter Principle: Why Things Always Go Wrong https://archive.org/details/bwb_P9-BJT-642 William Morrow and Company 1969 0-688-27544-3 25-26
उत्पत्ति और इतिहास
इस सिद्धांत को सबसे पहले कनाडाई शिक्षक और समाजशास्त्री डॉ. लॉरेंस जे. पीटर तथा रेमंड हल ने अपनी 1969 की बहुचर्चित पुस्तक द पीटर प्रिंसिपल में प्रस्तुत किया था। यह पुस्तक मूल रूप से एक व्यंग्य के रूप में लिखी गई थी, जो बड़े निगमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमियों और लालफीताशाही को उजागर करती थी। हालाँकि, यह विचार इतना सटीक और व्यावहारिक साबित हुआ कि इसे जल्द ही प्रबंधन विज्ञान में एक गंभीर और शोधपरक विषय मान लिया गया।Lazear Edward P. 2004-02-01 The Peter Principle: A Theory of Decline Journal of Political Economy 112 S1 S141–S163 10.1086/379943 0022-3808
कार्यप्रणाली और तंत्र
पीटर सिद्धांत के काम करने का मुख्य कारण यह है कि अधिकांश संस्थाओं में पदोन्नति का आधार व्यक्ति का उसके वर्तमान पद पर किया गया प्रदर्शन होता है, न कि उस नए पद के लिए उसकी वास्तविक योग्यता।
उदाहरण के लिए, एक बेहतरीन सॉफ्टवेयर इंजीनियर को उसकी तकनीकी दक्षता के कारण 'प्रोजेक्ट मैनेजर' बना दिया जाता है। लेकिन मैनेजर के पद के लिए तकनीकी ज्ञान से कहीं अधिक नेतृत्व, टीम प्रबंधन और संचार कौशल की आवश्यकता होती है। यदि उस इंजीनियर में प्रबंधन के ये गुण नहीं हैं, तो वह एक उत्कृष्ट इंजीनियर से एक अक्षम मैनेजर बन जाएगा। क्योंकि वह अब इस नए पद पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, इसलिए उसे आगे प्रमोट नहीं किया जाएगा और वह उसी पद पर फँस जाएगा।Benson Alan Li Danielle Shue Kelly Promotions and the Peter Principle The Quarterly Journal of Economics 134 4 2085–2134 2019-11-01 10.1093/qje/qjz022
संगठनों पर प्रभाव
पीटर सिद्धांत का एक स्वाभाविक और चिंताजनक निष्कर्ष यह है कि समय के साथ, किसी भी संगठन के अधिकांश महत्वपूर्ण पद ऐसे लोगों द्वारा भर दिए जाते हैं जो अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं। लॉरेंस पीटर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि, "संगठन का वास्तविक काम उन कर्मचारियों द्वारा किया जाता है जो अभी तक अपनी अक्षमता के स्तर तक नहीं पहुँचे हैं।"
अक्षम अधिकारी अक्सर अपनी कमियों को छिपाने के लिए अनावश्यक नियम बनाते हैं, बैठकों का दिखावा करते हैं या अपने से अधिक योग्य अधीनस्थों की प्रगति में बाधा डालते हैं। इससे पूरी संस्था की उत्पादकता में भारी गिरावट आती है।
समाधान
प्रबंधन विशेषज्ञों ने पीटर सिद्धांत के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए कई रणनीतियाँ सुझाई हैं:
वेतन वृद्धि बनाम पदोन्नति: कई कंपनियाँ अब उत्कृष्ट कर्मचारियों को प्रबंधन में धकेलने के बजाय उनके तकनीकी या मूल काम में ही वेतन वृद्धि देकर पुरस्कृत करती हैं।
अप और आउट नीति: यदि कोई कर्मचारी प्रमोट होने के बाद अपनी नई भूमिका में असफल रहता है, तो उसे कंपनी से निकाल दिया जाता है या बिना किसी अपमान के वापस उसके पुराने पद पर भेज दिया जाता है।
उचित प्रशिक्षण: पदोन्नति देने से पहले उम्मीदवार को नई भूमिका के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाता है और यह परखा जाता है कि क्या वह वास्तव में उस नए पद के कौशल रखता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Investopedia: What Is the Peter Principle?
Harvard Business Review: Research on the Peter Principle
श्रेणी:संगठनात्मक व्यवहार
श्रेणी:मनोविज्ञान