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मैथिली भाषा

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मैथिली 𑒧𑒻𑒟𑒱𑒪𑒲 • मैथिली भारत तथा नेपाल भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची, बिहार भारत के बिहार और झारखंड तथा नेपाल के तराई क्षेत्र 75 मिलियन (लगभग 7.5 करोड)https://www.microsoft.com/en-us/translator/blog/2023/04/18/announcing-four-new-languages-konkani-maithili-sindhi-and-sinhala/ Announcing four new languages: Konkani, Maithili, Sindhi and Sinhala Microsoft Microsoft.com Indo-European हिन्द-ईरानी हिन्द-आर्य पूर्वी समूह देवनागरीतिरहुता केन्द्रीय (सोतीपुरा) देहाती पूर्वी कुर्था जोलाहा किसान दक्षिणी नेपाली ठेटिया पश्चिमी अंगिका (दक्षिणी मैथिली) बज्जिका (पश्चिमी मैथिली) mai mai mait1250 Maithili center Maithili in Devanagari and Tirhuta.png 250 2 100 3 मैथिली शब्द देवनागरी और तिरहुता लिपियों में लिखा हुआ thumb|मैथिली क्षेत्र को दर्शाता मानचित्र मैथिली भारत के बिहार और झारखंड राज्यों और नेपाल के तराई क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है। यह हिन्द आर्य परिवार की सदस्य तथा मागधी परिवारमेथिली-साहित्य via Internet Archive वेजनाथ सिंह विनोद की भाषा है। इसका प्रमुख स्रोत संस्कृत भाषा है जिसके शब्द "तत्सम" वा "तद्भव" रूप में मैथिली में प्रयुक्त होते हैं। यह भाषा बोलने और सुनने में बहुत ही मोहक लगती है। मैथिली भारत में मुख्य रूप से दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, शिवहर, भागलपुर, मधेपुरा, अररिया, सुपौल, वैशाली, सहरसा, रांची, बोकारो, जमशेदपुर, धनबाद और देवघर जिलों में बोली जाती है| नेपाल के आठ जिलों धनुषा, सिराहा, सुनसरी, सर्लाही, सप्तरी, महोत्तरी, मोरंग और रौतहट में यह बोली जाती है। Lewis, M. P. (ed.) (2009). Maithili Ethnologue: Languages of the World. Sixteenth edition. Dallas, Texas: SIL International. बँगला, असमिया और ओड़िया के साथ साथ इसकी उत्पत्ति मागधी प्राकृत से हुई है। कुछ अंशों में ये नेपाली, बंगाली और कुछ अंशों में हिंदी से मिलती जुलती है। वर्ष २००३ में मैथिली भाषा को भारतीय संविधान की ८वीं अनुसूची में सम्मिलित किया गया। तात्कालिन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मैथिली भाषा को ८वीं अनुसूची में सम्मिलित करने की घोषणा सुपौल जिला के निर्मलीमे किए थे। सन २००७ में नेपाल के अन्तरिम संविधान में इसे प्रादेशिक राजभाषा और क्षेत्रीय नेपाली भाषा के रूप में स्थान दिया गया है।Government of Nepal (2007). Interim Constitution of Nepal 2007. https://web.archive.org/web/20090715105244/http://www.worldstatesmen.org/Nepal_Interim_Constitution2007.pdf 15 जुलाई 2009 भारत के झारखंड राज्य में इसे द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है|https://m.jagran.com/jharkhand/ranchi-second-official-language-of-bhojpuri-maithili-magahi-and-angika-18725982.html संग्रहीत प्रति 9 दिसंबर 2018 https://web.archive.org/web/20181209123944/https://m.jagran.com/jharkhand/ranchi-second-official-language-of-bhojpuri-maithili-magahi-and-angika-18725982.html 9 दिसंबर 2018 live लिपि पहले इसे मिथिलाक्षर तथा कैथी लिपि"Language, Religion and Politics in North India" https://web.archive.org/web/20171011125135/https://books.google.co.uk/books?id=SylBHS8IJAUC&pg=PA67&dq=maithili+language+kaithi+script&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjU956xuoPTAhXJCsAKHa19AIoQ6AEIGjAA#v=onepage&q=maithili%20language%20kaithi%20script&f=false 11 अक्तूबर 2017 . p. 67. Retrieved 1 April 2017. में लिखा जाता था जो बांग्ला और असमिया लिपियों से मिलती थी पर कालान्तर में देवनागरी का प्रयोग होने लगा।Yadava, Y. P. (2013). Linguistic context and language endangerment in Nepal। Nepalese Linguistics 28 https://web.archive.org/web/20160303231341/http://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/journals/nepling/pdf/Nep_Ling_28.pdf 3 मार्च 2016 : 262–274. मिथिलाक्षर को तिरहुता या वैदेही लिपी के नाम से भी जाना जाता है।बौद्धों के प्राचीन ग्रंथ 'ललित- विस्तर' में इसका नाम “वैदेही" मिलता है |मेथिली-साहित्य via Internet Archive वेजनाथ सिंह विनोद लिपि शास्त्र के विद्वानों के अनुसार 'मैथिली लिपि' का विकास 'गुप्त लिपि' से माना जाता है। 'नागरी लिपि' का उत्तर पूर्वी भारत से प्रचार होने से बहुत पहले ही इस लिपि का विकास हो चुका था और इसी कारण से देवनागरी का प्रभाव इस लिपि पर नहीं दीख पड़ता। इस लिपि में लिखित पुस्तकों का पता जापान तथा चीन देश में भी मिलता है ।मेथिली-साहित्य via Internet Archive वेजनाथ सिंह विनोद यह असमिया, बाङ्ला व ओड़िया लिपियों की जननी है। ओड़िया लिपी बाद में द्रविड़ भाषाओं के सम्पर्क के कारण परिवर्तित हुई। विकास प्राचीन मैथिली के विकास का शुरूआती दौर प्राकृत और अपभ्रंश के विकास से जोड़ा जाता है। लगभग ७०० इस्वी के आसपास इसमें रचनाएं की जाने लगी। विद्यापति मैथिली के आदिकवि तथा सर्वाधिक ज्ञाता कवि हैं। विद्यापति ने मैथिली के अतिरिक्त संस्कृत तथा अवहट्ट में भी रचनाएं लिखीं। ये वह दो प्रमुख भाषाएं हैं जहाँ से मैथिली का विकास हुआ। भारत की लगभग 5.6 प्रतिशत आबादी लगभग 7-8 करोड़ लोग मैथिली को मातृ-भाषा के रूप में प्रयोग करते हैं और इसके प्रयोगकर्ता भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों सहित विश्व के कई देशों में फैले हैं। मैथिली विश्व की सर्वाधिक समृद्ध, शालीन और मिठास पूर्ण भाषाओं में से एक मानी जाती है। मैथिली भारत में एक राजभाषा के रूप में सम्मानित है। मैथिली की अपनी लिपि है जो एक समृद्ध भाषा की प्रथम पहचान है। नेपाल हो या भारत कही भी सरकार के द्वारा मैथिली भाषा के विकास हेतु कोई खास कदम नहीं उठाया गया है। अब जा कर गैर सरकारी संस्था और मीडिया द्वारा मैथिली के विकास का थोड़ा प्रयास हो रहा है। अभी १५/२० रेडियो स्टेशन ऐसे है जिसमें मैथिली भाषा में कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है। समाचार हो या नाटक कला और अन्तरवार्ता भी मैथिली हो रहा है। किसी किसी रेडिओ में तो ५०% से अधिक कार्यक्रम मैथिली में हो रहा है। ये पिछले २/३ वर्षो से विकास हो रहा है ये सिलसिला जारी है। टीवी में भी अब मैथिली में खबर दिखाती है। नेपाल में कुछ चैनल है जैसे नेपाल 1, सागरमाथा चैनल, तराई टीवी और मकालू टीवी है। साहित्य मैथिली साहित्य मैथिली साहित्य का अपना समृद्ध इतिहास रहा है और चौदहवीं तथा पंद्रहवीं शताब्दी के कवि विद्यापति को मैथिली साहित्य में सबसे ऊँचा दर्जा प्राप्त है। विद्यापति के बाद के काल में गोविन्द दास, चन्दा झा, मनबोध, पंडित सीताराम झा, जीवनाथ झा (जीवन झा) प्रमुख साहित्यकार माने जाते हैं। स्थिति भारत की साहित्य अकादमी द्वारा मैथिली को साहित्यिक भाषा का दर्जा पंडित नेहरू के समय १९६५ से हासिल है। २२ दिसंबर २००३ को भारत सरकार द्वारा मैथिली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल किया गया है और नेपाल सरकार द्वारा मैथिली को नेपाल में दूसरे स्थान में रखा गया है। इन्हें भी देखें जुरशीतल मैथिली साहित्य मिथिलाक्षर कैथी सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ mai मैथिली कविता कोश कतेक रास बात : मैथिली भाषा केँ वेबसाईट पर आनबाक एकटा उत्तम प्रयास कल्याणी कोश (मैथिली-मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश) autocollapse श्रेणी:बिहार की भाषाएँ श्रेणी:झारखंड की भाषाएँ श्रेणी:हिन्दी की बोलियाँ श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषाएँ श्रेणी:भारत की भाषाएँ श्रेणी:नेपाल की भाषाएँ श्रेणी:पूर्वी हिन्द-आर्य भाषाएँ