Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

महाड़ सत्याग्रह

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

मई 2019 thumb|कांस्य मूर्ति में आंबेडकर द्वारा महाड आंदोलन का चित्रण thumb|Flyer published before Mahad Satyagraha in 1927 महाड़ का सत्याग्रह (अन्य नाम: चवदार तालाब सत्याग्रह व महाड का मुक्तिसंग्राम) भीमराव आंबेडकर की अगुवाई में 20 मार्च 1927 को महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के महाड स्थान पर दलितों को सार्वजनिक चवदार तालाब से पानी पीने और इस्तेमाल करने का अधिकार दिलाने के लिए किया गया एक प्रभावी सत्याग्रह था।http://pib.nic.in/archieve/lreleng/lyr2003/rmar2003/20032003/r200320038.html March 20 observed as social empowerment day to commemorate Mahad Satyagrah by Dr. Ambedkar Press Information Bureau 20 March 2003 31 March 2014 इस दिन को भारत में सामाजिक सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।http://pib.nic.in/archieve/lreleng/lyr2003/rmar2003/20032003/r200320038.html March 20 observed as social empowerment day to commemorate Mahad Satyagrah by Dr. Ambedkar Press Information Bureau 20 March 2003 31 March 2014 इस सत्याग्रह में हजारों की संख्या में दलित लोग सम्मिलित हुए थे, सभी लोग महाड के चवदार तालाब पहुँचे और आंबेडकर ने प्रथम अपने दोनों हाथों से उस तालाब पानी पिया, फिर हजारों सत्याग्रहियों उनका अनुकरण किया। यह आंबेडकर का पहला सत्याग्रह था। सवर्ण हिंदुओं द्वारा अछूतों को तालाब का पानी पाने के अधिकार नकारा गया था, जबकि सवर्ण हिंदू दलितों को हिंदू धर्म का हिस्सा मानते थे। सभी हिंदू जाति समूहों एवं अन्य धर्म के लोग मुस्लिम, ईसाई तक भी उस ताबाल का पानी पी सकते थे। ऐसी असमानता के विरोध में आंबेडकर ने क्रान्ति के पहली शुरूवात की। डाक्टर आंबेडकर के साथ इस आन्दोलन में उनके तीन कुत्ते भी साथ थे इस आन्दोलन में हिन्दूऔ ने दलित लोगो का बहुत खून बहाया इस आन्दोलन में देश के सभी जगह से दलित एकत्रित हुए थे पृष्ठभूमि हिन्दू जाति प्रथा में दलितों (जिन लोगो को दबाया गया हो समाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से) को समाज से पृथक करके रखा जाता था। उन लोगों को सार्वजनिक नदी, तालाब और सड़कें इस्तेमाल करने की मनाही थी। अगस्त 1923 को बॉम्बे लेजिस्लेटिव कौंसिल के द्वारा एक प्रस्ताव लाया गया, कि वो सभी जगह जिनका निर्माण और देखरेख सरकार करती है, ऐसी जगहों का इस्तमाल हर कोई कर सकता है।Sangharakshita Ambedkar and Buddhism http://books.google.com/books?id=e-b2EzNRxQIC&pg=PA53 1 January 2006 Motilal Banarsidass Publishe 978-81-208-3023-3 53–55 जनवरी 1924 में, महाड जोकि बॉम्बे कार्यक्षेत्र का हिस्सा था। उस अधिनियम को नगर निगम परिषद के द्वारा लागू किया गया। लेकिन सवर्णवादी हिन्दुओं के विरोध के कारण इसे अमल में नहीं लाया जा सका। इन्हें भी देखिए सामजिक सशक्तिकरण दिवस कालाराम मन्दिर सत्याग्रह सन्दर्भ श्रेणी:महाराष्ट्र का इतिहास श्रेणी:भीमराव आंबेडकर श्रेणी:भीमराव आम्बेडकर द्वारा चलाए गए आन्दोलन श्रेणी:रायगढ़ ज़िला, महाराष्ट्र