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ब्राचा फुल्ड
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ब्राचा फुल्ड ברכה פולד פלוגה ח א - מן השורה. ברכה פולד-156434.jpg 250px पल्माख सैन्य प्रशिक्षण के दौरान ब्राचा फुल्ड बारबरा फुल्ड (Barbara Fuld) 26 दिसंबर 1927 बर्लिन, जर्मनी 26 मार्च 1946 (आयु 18 वर्ष) तेल अवीव, अनिवार्य फिलिस्तीन जर्मन, यहूदी सैन्य कमांडर (पल्माख) यहूदी ब्रिटिश सेना के खिलाफ संघर्ष में मारी गई पहली महिला पल्माख लड़ाकू
ब्राचा फुल्ड (अंग्रेज़ी: Bracha Fuld; हिब्रू: ברכה פולד; 26 दिसंबर 1927 – 26 मार्च 1946) एक यहूदी प्रतिरोध लड़ाकू थीं। उन्होंने ब्रिटिश अनिवार्य फिलिस्तीन (Mandatory Palestine) के दौरान यहूदी भूमिगत सैन्य संगठन 'पल्माख' (Palmach) में एक दस्ते के कमांडर के रूप में कार्य किया। वे ब्रिटिश सेना के साथ हुए एक सीधे सैन्य संघर्ष में जान गंवाने वाली पहली महिला पल्माख लड़ाकू थीं। उनका जीवन और मृत्यु यहूदी आप्रवासन संघर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।https://jwa.org/encyclopedia/article/palmah Palmah Jewish Women's Archive en 2026-03-20
प्रारंभिक जीवन और जर्मनी से पलायन
ब्राचा फुल्ड का जन्म 26 दिसंबर 1927 को बर्लिन, जर्मनी में हुआ था। जन्म के समय उनका नाम बारबरा फुल्ड था। उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था। उनके पिता, लोथर फुल्ड, ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना में सेवा दी थी। 1930 के दशक में जर्मनी में नाज़ी शासन के उदय के बाद, यहूदियों के खिलाफ राज्य-प्रायोजित भेदभाव और हिंसा शुरू हो गई।
नवंबर 1938 में हुई 'क्रिस्टलनाख्ट' (Kristallnacht) नामक हिंसक घटना के दौरान, पूरे जर्मनी में यहूदियों की संपत्तियों को निशाना बनाया गया। इस घटना में लोथर फुल्ड का व्यापार पूरी तरह से नष्ट हो गया, जिसके अवसाद में आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली। इस त्रासदी के बाद, 1939 में बारबरा और उनकी माँ नाज़ी जर्मनी से भागकर अनिवार्य फिलिस्तीन (वर्तमान इज़राइल) आ गईं। फिलिस्तीन पहुँचने के बाद, बारबरा ने अपना नाम हिब्रू भाषा के अनुरूप बदलकर 'ब्राचा' कर लिया। उनके परिवार के कई अन्य सदस्य जर्मनी में ही रह गए थे, जो बाद में होलोकॉस्ट (Holocaust) का शिकार हुए।
पल्माख में शामिल होना और सैन्य भूमिका
फिलिस्तीन में बसने के बाद, ब्राचा ने स्थानीय यहूदी सामुदायिक कार्यों और युवा आंदोलनों में हिस्सा लेना शुरू किया। इसी समय के दौरान, ब्रिटिश सरकार ने '1939 का श्वेत पत्र' (White Paper of 1939) जारी किया था, जिसने फिलिस्तीन में यहूदी आप्रवासन (Immigration) को गंभीर रूप से सीमित कर दिया था। इस नीति के कारण होलोकॉस्ट से बचकर भाग रहे यहूदी शरणार्थियों के लिए फिलिस्तीन में प्रवेश करना अवैध हो गया था। इस नीति के विरोध में, 'हगानाह' (Haganah) नामक यहूदी अर्धसैनिक संगठन ने यूरोप से शरणार्थियों को गुप्त रूप से फिलिस्तीन लाने के लिए 'अलिया बेट' (Aliyah Bet) नामक अवैध आप्रवासन अभियान शुरू किया।
इन परिस्थितियों के बीच, 16 वर्ष की आयु में ब्राचा फुल्ड हगानाह की सशस्त्र इकाई 'पल्माख' में शामिल हो गईं। पल्माख में उन्होंने सैन्य रणनीति, हथियारों के उपयोग और नेतृत्व का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपनी क्षमताओं के कारण, 18 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते उन्हें एक दस्ते का कमांडर (Squad Commander) नियुक्त कर दिया गया। उन्हें मुख्य रूप से सैन्य टुकड़ियों के नेतृत्व और गुप्त अभियानों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।Cook Bernard A. Women and war : a historical encyclopedia from antiquity to the present 1 2006 ABC-CLIO Santa Barbara, Calif. 211 1851097708 70680524
'विंगेट नाइट' अभियान और संघर्ष
मार्च 1946 में, 'ओर्डे विंगेट' (Orde Wingate) नामक एक गुप्त जहाज इटली से होलोकॉस्ट के यहूदी शरणार्थियों को लेकर तेल अवीव के तट की ओर आ रहा था। ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को इस जहाज की जानकारी मिल गई थी और उन्होंने शरणार्थियों को तट पर उतरने से रोकने के लिए भारी पुलिस और सैन्य बल तैनात कर दिया।Mann Nir 2011-03-27 Wingate Night, Revisited Haaretz https://www.haaretz.com/2011-03-27/ty-article/wingate-night-revisited/0000017f-db0a-df9c-a17f-ff1ad6940000 2017-11-25
24 मार्च 1946 की रात को (जिसे ऐतिहासिक रूप से 'विंगेट नाइट' कहा जाता है), पल्माख ने शरणार्थियों को सुरक्षित रूप से तट पर उतारने के लिए एक सशस्त्र अभियान की योजना बनाई। ब्राचा फुल्ड को एक सैन्य दस्ते का कमांडर बनाया गया। उनके दस्ते का मुख्य उद्देश्य तेल अवीव के पास सरोना (Sarona) नामक स्थान पर ब्रिटिश बलों को उलझाए रखना और उन्हें तट की ओर बढ़ने से रोकना था। इस अभियान के दौरान, फुल्ड के दस्ते का सामना हथियारों से लैस ब्रिटिश बख्तरबंद वाहनों (Armored vehicles) से हुआ, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी शुरू हो गई।
मृत्यु और परिणाम
सरोना में हुई इस भीषण गोलाबारी के दौरान, ब्राचा फुल्ड गंभीर रूप से घायल हो गईं। ब्रिटिश सैनिकों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए अस्पताल ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों और ऐतिहासिक रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों को कोई भी सैन्य जानकारी देने से इनकार कर दिया। 26 मार्च 1946 को, 18 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई।http://www.izkor.mod.gov.il/HalalKorot.aspx?id=91716 נזכור את כולם www.izkor.mod.gov.il 2026-03-20 21 जुलाई 2011 https://web.archive.org/web/20110721143307/http://www.izkor.mod.gov.il/HalalKorot.aspx?id=91716 dead
विरासत
ब्राचा फुल्ड की मृत्यु ने तत्कालीन यहूदी समुदाय में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की। वे ब्रिटिश सेना के खिलाफ संघर्ष में जान गंवाने वाली पहली महिला लड़ाकू थीं, इसलिए उन्हें यहूदी प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में पहचाना गया।
उनके सम्मान में तेल अवीव शहर की एक प्रमुख सड़क का नाम बदलकर 'ब्राचा फुल्ड स्ट्रीट' (Bracha Fuld Street) रखा गया। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय यहूदी शरणार्थियों को गुप्त रूप से फिलिस्तीन लाने वाले एक अन्य जहाज का नाम भी उनके नाम पर 'एसएस ब्राचा फुल्ड' (SS Bracha Fuld) रखा गया था। इस जहाज को बाद में ब्रिटिश नौसेना द्वारा रोक लिया गया था, लेकिन यह घटना आप्रवासन के संघर्ष में उनके नाम की प्रासंगिकता को दर्शाती है।https://honorisraelsfallen.com/ Fuld, Bracha Honor Israel's Fallen en-US 2026-03-20
संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विकिडाटा पर ब्राचा फुल्ड
श्रेणी:1927 में जन्मे लोग
श्रेणी:1946 में निधन
श्रेणी:जर्मन मूल के यहूदी
श्रेणी:इज़राइली सैन्य कर्मी
श्रेणी:महिला सैन्य अधिकारी