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411 समाचार
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गुप्तकाशी

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गुप्तकाशी Guptakashi Chaukhamba peak, Garhwal Himalayas, Uttarakhand.jpg गुप्तकाशी में चौखंभा पर्वत का दृश्य गुप्तकाशी India Uttarakhand 30.525 79.077 inline, title उत्तराखण्ड में स्थिति देश प्रान्त उत्तराखण्ड ज़िला रुद्रप्रयाग 1130 2011 भाषा प्रचलित भाषाएँ हिन्दी, गढ़वाली भामस +5:30 पिनकोड दूरभाष कोड गुप्तकाशी (Guptakashi) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित एक गाँव है।"Villages and Panchayats: District Rudraprayag," Government of Uttarakhand, 2018http://morth.nic.in/writereaddata/sublink2images/NH_StartEnding_Station8634854396.htm Start and end points of National Highways 23 April 2009 https://web.archive.org/web/20080922011802/http://morth.nic.in/writereaddata/sublink2images/NH_StartEnding_Station8634854396.htm 22 सितंबर 2008 live विवरण गुप्तकाशी प्रसिद्ध तीर्थ धाम केदारनाथ को यातायात से जोड़ने वाले रुद्रप्रयाग-गौरीकुण्ड राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक कस्बा है। गुप्तकाशी क्षेत्र केदारनाथ यात्रा का मुख्य पड़ाव भी है, साथ ही यहां कई खूबसूरत पर्यटक स्थल भी हैं। पाँच प्रसिद्ध प्रयाग हैं : देवप्रयाग, रुद्रप्रायाग, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और विष्णुप्रयाग। रुद्रप्रयाग से मंदाकिनी नदी के किनारे गुप्तकाशी का मार्ग है। कुल दूरी लगभग ३५ किमी है। पैदल, घोड़ा या डाँडी से लोग जाते हैं, बहुत थोड़ी दूरी पैदल तय करनी होती है। चढ़ाई बड़ी विकट है। जहाँ चढ़ाई आरंभ होती है वहीं अगस्त्य मुनि नाम का स्थान है; वहाँ अगस्त्य का मंदिर है। मार्ग रमणीक है। सामने वाणासुर की राजधानी शोणितपुर के भगनावशेष हैं। चढ़ाई पूरी होने पर गुप्तकाशी के दर्शन होते हैं। गुप्तकाशी को "गुह्यकाशी" भी कहते हैं। तीन काशी प्रसिद्ध हैं : भागीरथी के किनारे उत्तरकाशी, दूसरी गुप्तकाशी और तीसरी वाराणसी। वाराणसी में एक कुंड है जिसका नाम है मणिकर्णिका कुंड। लोग इसी में स्नान करते हैं। इसमें दो जलधाराएँ बराबर गिरती रहती हैं जो गंगा और यमुना नाम से अभिहित हैं। कुंड के सामने विश्वनाथ का मंदिर है। इससे मिला हुआ अर्धनारीश्वर का मंदिर है। पौराणिक कथा इस स्थान के पौराणिक सन्दर्भ भी हैं, जो इसके नाम के बारे में बताते हैं। इस जगह का नाम गुप्तकाशी इसलिए पड़ा कि पांडवों को देखकर भगवान शिव वहीं छुप गए थे। गुप्तकाशी से भगवान शिव की तलाश करते हुए पांडव गौरीकुंड तक जाते हैं। लेकिन इसी जगह एक बड़ी विचित्र बात होती है। पांडवों में से नकुल और सहदेव को दूर एक सांड दिखाई देता है। भीम अपनी गदा से उस सांड को मारने दौड़ते हैं। लेकिन वह सांड उनकी पकड़ में नहीं आता है। भीम उसके पीछे दौड़ते हैं और एक जगह सांड बर्फ में अपने सिर को घुसा देता है। भीम पूंछ पकड़कर खींचते हैं। लेकिन सांड अपने सिर का विस्तार करता है। सिर का विस्तार इतना बड़ा होता है कि वह नेपाल के पशुपति नाथ तक पहुंचता है। पुराण के अनुसार पशुपतिनाथ भी बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। देखते ही देखते वह सांड एक ज्योतिर्लिंग में बदल जाता है। फिर उससे भगवान शिव प्रकट होते हैं। भगवान शिव का साक्षात दर्शन करने के बाद पांडव अपने पापों से मुक्त होते हैं।पांडवों की मुक्ति का रास्ता केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग, आईबीएन-7 इन्हें भी देखें रुद्रप्रयाग ज़िला बाहरी कड़ियाँ गुप्तकाशी मंदिर का दृश्य सन्दर्भ श्रेणी:रुद्रप्रयाग जिला श्रेणी:उत्तराखण्ड के गाँव श्रेणी:रुद्रप्रयाग ज़िले के गाँव श्रेणी:उत्तराखण्ड में शिव मन्दिर श्रेणी:उत्तराखण्ड में पर्यटन आकर्षण श्रेणी:उत्तराखण्ड में हिन्दू मन्दिर