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पुरुष प्रजनन तन्त्र
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पुरुष प्रजनन तन्त्र systema genitale masculinum 1 मूत्राशय 2 जघन (अस्थि) 3 शिश्न 5 शिश्न मुण्ड 6 शिश्नाग्रच्छद 10 वीर्याशय 12 प्रोस्टेट ग्रन्थि 15 वीर्य वाहिका 17 वृषण 18 वृषणकोषपुरुष प्रजनन तन्त्र में कई जननांग होते हैं जो मानव प्रजनन की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं। ये अंग शरीर के बाहर और श्रोणि के भीतर स्थित होते हैं।
मुख्य पुरुष जननांग शिश्न और वृषण हैं जो वीर्य और शुक्राणु उत्पन्न करते हैं, जो संभोग के भाग के रूप में महिला के शरीर में एक डिम्ब को निषेचित करते हैं ; निषेचित डिम्ब (युग्मज) एक भ्रूण में विकसित होता है, जो बाद में एक शिशु के रूप में जन्म होता है।
शिश्न
पुरूष अपने शिश्न या लिंग के द्वारा शुक्राणु को स्त्री के योनि में डालता है। लिंग की लम्बाई 7.5 सेटीमीटर से लेकर 10 सेंटीमीटर तथा इसकी चौड़ाई 2.5 सेंटीमीटर होती है। पुरूश के लिगं के मध्य में एक नलिका होती है। इस नली को मूत्र नलिका कहते है जो इसमें से होती हुई मूत्राशय की थैली तक जाती है। इसी नलिका द्वारा मूत्र और वीर्य की निकासी होती है। पुरूषों के लिंग में तीन मांसपेशियां होती है। दाहिनी व बांई कोरपस कैवरनोसम तथा बीच में कोरपस स्पैनजीऔसम। इन मांसपेशियों में रक्त की नलिकांए होती है। पुरूष लिंग की कठोरता के समय इन मांसपेशियों से अधिक रक्त का संचार होता है व इसके कारण लिंग की लम्बाई 10-15 सेमी और चौड़ाई 3.5 सेमी के लगभग हो जाती है। लिंग की सुपारी की त्वचा आसानी से ऊपर-नीचे खिसक सकती है तथा कठोरता के समय लिंग को चौड़ाई में बढ़ने के लिए स्थान भी देती है। लिंग के अगले भाग को ग्लैस कहते है जो काफी संचेतना पूर्ण होता है।
अंडकोष
अंडकोष पुरूष के नीचे एक थैली होती है। इसे स्क्रौटम कहा जाता है। इस थैली की त्वचा ढीली होती है। जो गर्मियों में अधिक बढ़कर लटक जाती है तथा सर्दियों में सिकुड़कर छोटी होती है। इसके अंदर अंडकोष होते है इनका मुख्य कार्य शुक्राणु और पुरूष उत्तेजित द्रव को बनाना होता है। वे पुरूष जो आग के सामने कार्य करते है, अधिक गर्म पानी से नहाते है। यह कच्छा को अधिक कसकर बांधते है। उनके अंडकोष से शुक्राणु कम मात्रा में या नहीं बन पाते है।
अंडकोश की लंबाई 3.5 सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी होती है। इसमें रक्त का संचार बहुत अधिक होता है। दोनों तरफ के अंडकोष एक नलिका के द्वारा जुड़े होते है। जिसको वास डिफेरेन्स कहते है तथा दूसरी तरफ ये अन्य ग्रंथि से जुड़े रहते है। जिनको सेमिनाल वेसाईकल कहते है।
प्रोस्टेंट ग्रन्थि
प्रोस्टेट ग्रन्थि मूत्राशय व पुरूष लिंग के नीचे होता है तथा सेमिनाइकल वैसाइड भी प्रोस्टेट से लगा रहता है। संभोग के समय सेमिनाल वैसाइकल से द्रव निकलता है। यह द्रव छार होता है जिसमें शुक्राणु काफी समय तक जीवित रहते है। पुरूष उत्तेजना के समय लिंग से एक चिकना द्रव निकलता है जिसे प्रोस्टेटिक द्रव कहते है। जिसमें कभी-कभी शुक्राणु भी देखे गये हैं। इसी कारण परिवार नियोजन का वह तरीका सफल नहीं जिसमें वीर्य निकलने से पहले ही लिंग को योनि से बाहर निकाल लिया जाता है।
शुक्राणु
पुरूष के एक शुक्राणु की लम्बाई 1/25 मिलीमीटर होती है। इसके तीन भाग होते है सिर, गर्दन और पूंछ। शुक्राणु लगभग अंडाकार होता है। गर्दन लम्बी जो सिर और पूंछ को जोड़ती है। पूंछ पतली और मुलायम होती है। इसी से शुक्राणु गतिशील होता है जिससे शुक्राणु 10 सेकेंड में 1 मिलीमीटर की दूरी तक जा सकता है।
शुक्राणुओं का निर्माण अंडकोष में होता है तथा ये सेमीनल वैसाईकल में रहते है। शुक्राणु दो से तीन महीने तक जीवित रह सकते है। यह अंडकोष में बनकर पहले छोटी-छोटी नलिकाओं द्वारा ईपीडिडायमीस में इकट्ठे होते है और वहां से वास डिफेरेन्स द्वारा सेमीनल वैसाइकल में जाते है। संभोग के समय मांसपेशियोनं के सिकुड़ने के कारण यह सेमिनल द्रव के साथ मूत्र नलिका में निकलते है। यह द्रव लगभग 3-5 सी.सी. होता है और प्रत्येक सी.सी.में 50 से 200 मिलियन शुक्राणु होते है।
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सन्दर्भ