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मंजुल भार्गव
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अंगूठाकार|मंजुल भार्गव
मंजुल भार्गव (अंग्रेज़ी: Manjul Bhargava, जन्म: अगस्त ८, १९७४) एक भारतीय मूल के गणितज्ञ हैं।Gallian Joseph A. 2009 Contemporary Abstract Algebra Belmont, CA Cengage Learning 978-0-547-16509-7 571 http://books.google.com/?id=CnH3mlOKpsMC&lpg=PP1&dq=Contemporary%20Abstract%20Algebra&pg=PA571#v=onepage&q&f=false इन्हें २०१४ में प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार फील्ड्स पदक से नवाजा गया है।http://www.mathunion.org/general/prizes/2014/prize-citations/ International Mathematical Union List of all 2014 awardees with brief citations August 12, 2014 https://web.archive.org/web/20171111174206/http://www.mathunion.org/general/prizes/2014/prize-citations 11 नवंबर 2017 live 11 नवंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171111174206/http://www.mathunion.org/general/prizes/2014/prize-citationsAMS Collaboration Distance http://www.ams.org/mathscinet/collaborationDistance.html https://web.archive.org/web/20170729164607/http://www.ams.org/mathscinet/collaborationDistance.html 29 जुलाई 2017
परिचय
1974 में कनाडा में जन्में भार्गव अमेरिका में पले बढ़े और वे भारत में भी रहे है। उन्होंने 2001 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पीएचडी की और वहीं 2003 में प्राध्यापक बने।
मंजुल भार्गव अमेरिका की प्रिंसटन विश्वविद्यालय में गणित के प्राध्यापक है। अगस्त २०१४ में सियोल में आयोजित इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथेमेटिक्स में इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (आईएमयू) ने मंजुल भार्गव को फील्ड्स पदक से नवजा हैं। मंजुल को यह पुरस्कार ज्यामिति में नए तरीके विकसित करने के लिए दिया गया। उनके खाते में संस्कृत की मदद से 200 साल पुराने संख्या सिद्धान्त लॉ को आसान करने की उपलब्धि भी है।Vakil Ravi 2008 A Mathematical Mosaic Brendan Kelly Publishing 978-1-895997-04-0 Burlington, ON 159 http://books.google.com/books/about/A_mathematical_mosaic.html?id=GvTHNPSkoN4C 14 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20151106094131/https://books.google.com/books/about/A_Mathematical_Mosaic.html?id=GvTHNPSkoN4C 6 नवंबर 2015 live
क्वांटा मैगजीन को दिए साक्षात्कार में मंजुल ने बताया, 'उनके दादा राजस्थान में संस्कृत के प्राध्यापक थे। उनके पास मैंने ६२८ ई.पू. के भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त की संस्कृत में लिखी पांडुलिपि देखी थी, जिसमें जर्मनी के गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गाउस के जटिल संख्या सिद्धान्त लॉ जैसा सिद्धांत साधारण तरीके से समझाया गया था।'
इस लॉ के मुताबिक, दो परफेक्ट स्क्वेयर्स के जोड़ से प्राप्त दो नंबर्स को आपस में गुणा किया जाए, तो नतीजा भी दो परफेक्ट स्क्वेयर्स के जोड़ जितना होगा। भार्गव ने ब्रह्मगुप्त के संस्कृत में लिखे सिद्धांत को फेमस रयूबिक क्यूब पर लागू किया और 18वीं सदी के गाउस के लॉ को ज्यादा आसान तरीके से समझाने में कामयाबी हासिल की।
मंजुल ने संस्कृत की कविताओं के रिदम में गणित ढूंढ निकाला। संस्कृत के अक्षरों के क्रम में भी उन्होंने गणित की संरचना बताई है। वह यूनिवर्सिटी में अपने छात्रों को समझाने के लिए भी संस्कृत कविताओं और मैथ्स की समानता के उदाहरण पेश करते हैं। मंजुल ने उस्ताद जाकिर हुसैन से तबला बजाना भी सीखा है।http://aajtak.intoday.in/story/two-indian-origin-professors-win-maths-global-prizes-1-775787.html भारतीय मूल के प्रोफेसर मंजुल भार्गव और सुभाष खोट को गणित का ग्लोबल पुरस्कार 13 अगस्त 2014 आज तक hi 14 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20140814144128/http://aajtak.intoday.in/story/two-indian-origin-professors-win-maths-global-prizes-1-775787.html 14 अगस्त 2014 live
Jnngg एवं सम्मान
भार्गव को अब तक मिले अवार्ड्स में मैथेमेटिकल एसोसिएशन ऑफ अमेरिका से मर्टेन हासे पुरस्कार (२००३), शस्त्र रामानुजन पुरस्कार (२००५), संख्या सिद्धान्त में अमेरिकन मैथेमेटिकल सोसाइटी से कोल पुरस्कार (२००८) इन्फोसिस पुरस्कार (२०१२) और फ़ील्ड्स पदक (२०१४) शामिल हैं। वो २०१३ में अमेरिकी नेशनल एकेडमी के लिए भी चुने गए।
सन्दर्भ
श्रेणी:गणितज्ञ
श्रेणी:भारतीय गणितज्ञ
श्रेणी:जीवित लोग
श्रेणी:भारतीय मूल के लोग
श्रेणी:1974 में जन्मे लोग