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क़फ़स
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अंगूठाकार|250x250पिक्सेल|तोपकाप महल में वलीअहदों के हुजरे, जिसे क़फ़स भी कहा जाता था।
क़फ़स, (उस्मानी तुर्कीयाई: قفس, शाब्दिक मतलब "पिंजरा") उस्मानी महल के शाही हरम का अंग था जहाँ तख़्त के संभावित उत्तराधिकारी (वलीअहद) महल के सिपाहियों द्वारा गिरफ़्तार, नज़रबंद और निरंतर निगरानी में रखे गए थे।
उस्मानी साम्राज्य के प्रारंभिक इतिहास में मृत सुल्तान के प्रतिद्वंद्वी पुत्रों के बीच युद्ध छिड़ गया। एक नए सुल्तान के लिए अपने तमाम भाइयों का क़तल करना एक आम सी बात थी। शिशुओं भी क़तल किए गए थे। 'भ्रातृवध' की इस प्रथा ने उस्मानी तख़्त के दावेदारों की तादाद को निहायत कम कर दिया था, जिसके कारण कई अवसरों पर पूरे उस्मानी शाही ख़ानदान समाप्त होने लगा था।
अहमद प्रथम द्वारा इस प्रथा की समाप्ति के बाद क़फ़स में संभावित वलीअहदों की नज़रबंदी ने मौजूदा सुल्तान के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की और शाही ख़ानदान के लिए निरंतरता सुनिश्चित की।
सन्दर्भ
Freely, John - Inside the Seraglio, प्रकाशित: 1999
श्रेणी:उस्मानी साम्राज्य