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दीवार पत्रिका
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अंगूठाकार| बांग्लादेश में एक दीवार पत्रिका ( बंगाली में इसे दियालिका कहते हैं)
दीवार पत्रिका किसी संस्था विशेष रूप से एक शैक्षिक संस्थान में नोटिस बोर्ड पर एक समय अंतराल पर चलाए जाने वाली पत्रिका है, जहां छात्र और संस्था के अन्य सदस्य एक दूसरे के साथ साझा करने के लिए अपने लेख, कविताएँ, चित्र और अन्य ऐसी रचनाएँ पोस्ट कर सकते हैं। वे संदेश देने वाले कोलाज के रूप में हो सकते हैं।
महत्त्व
दीवार पत्रिकाएं शिक्षण संस्थानों के भीतर छात्रों को उनकी रचनात्मकता को व्यक्त करने के लिए एक माध्यम हैं। इसे नियमित अंतराल के बाद तैयार करने से विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए एक माध्यम के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है, जिसके लिए इसे व्यापक रूप से जाना जाता है। एक खुले खंड पर कुछ विषयों पर नियमित पोस्ट द्वारा चर्चा की जा सकती है।
भाषायी कौशलों के अभ्यास के लिए विशेषकर लेखन कौशल की दृष्टि से, दीवार पत्रिका सबसे अच्छा माध्यम है। बच्चे जितना अधिक पढ़ते और लिखते हैं, उनकी भाषा उतनी अधिक मजबूत होती है। दीवार पत्रिका के लिए रचना तैयार करते हुए बच्चे अपने चिन्तन को टूटी-फूटी भाषा में दबाब मुक्त होकर व्यक्त करते हैं जिससे उनकी भाषा मजबूत होती है। बच्चों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।http://www.teachersofindia.org/hi/article/%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%B5 दीवार पत्रिका पर एक अनुभव दीक्षित प्रमोद www.teachersofindia.org hi 2020-03-06अक्तूबर 2022 InternetArchiveBot विद्यालय में शिक्षण के लिए नियमित रूप से होने वाली गतिविधियों के अलावा कुछ ऐसा होना भी जरूरी है जो विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति न केवल रुचि जगाए, बल्कि उनमें ऐसे कौशल भी विकसित करे जो उनके जीवन में काम आएँ।http://www.teachersofindia.org/hi/article/%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%B5-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8 दीवार पत्रिका : कार्यशाला के अनुभव-पहला दिन पुनेठा महेश www.teachersofindia.org hi https://web.archive.org/web/20190831140130/http://www.teachersofindia.org/hi/article/%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%B5-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8 31 अगस्त 2019 2020-03-06 dead
विद्यालयों में बाल मैत्रीपूर्ण वातावरण का निर्माण तथा आनंद के साथ सीखने में दीवार पत्रिका की भूमिका महत्वपूर्ण है तथा खेल-खेल में शिक्षा की भावना को भी बल मिलता है। बहुभाषायी ज्ञान समृद्ध होता है। बच्चों की सृजनात्मक क्षमता विकास व प्रतिभा प्रदर्शन में यह एक महत्वपूर्ण उपकरण बनती है। विद्यालयों में पठन-पाठन का बड़ा ही मनमोहक वातावरण भी निर्मित होता है। न केवल विद्यार्थियों में अपितु अध्यापकों में भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भाव उत्पन्न होता है। दीवार पत्रिका अभियान से अभिभावकों व समुदाय को भी जोड़ा जा सकता है जिससे वि़द्यालय व समुदाय की दूरी भी कम हो सकती है तथा संवाद का बेहतर वातावरण बनाया जा सकता है। साथ ही दीवार पत्रिका को पाठ्यक्रम से कैसे जोड़ा जाए, इस दिशा में अध्यापक काम कर सकते हैं।http://www.teachersofindia.org/hi/spotlight/%E0%A4%86%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0 फाइल से दीवार पर सारस्वत आकाश www.teachersofindia.org hi https://web.archive.org/web/20190721084306/http://www.teachersofindia.org/hi/spotlight/%E0%A4%86%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0 21 जुलाई 2019 2020-03-08 dead
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